पांडु नदी का जलस्तर घटा, रास्ते-फसलें अब भी जलमग्न:कानपुर देहात में ग्रामीणों की परेशानियां बरकरार, चारे और आवागमन का संकट
कानपुर देहात के रसूलाबाद में पांडु नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। पिछले दिनों की अतिवृष्टि के बाद बढ़े जलस्तर में करीब चार इंच की कमी आई है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। तोरना, रामनगर समेत कई गांवों की गलियां और संपर्क मार्ग अब भी जलमग्न हैं। इससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। वहीं खेतों में पानी भरा होने से धान समेत अन्य फसलों के खराब होने का खतरा बना हुआ है। पशुपालकों के सामने चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। बीते दिनों हुई लगातार बारिश के कारण पांडु नदी का जलस्तर बढ़ गया था। नदी का पानी गांवों और खेतों तक पहुंचने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी बार नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले से प्रभावित किसानों की मुश्किलें और बढ़ गईं। अब पानी कम होना शुरू हुआ है, लेकिन खेतों और रास्तों में जलभराव होने से स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कुर्सी खेड़ा, कृष्ण दत्त निवादा, दलिकपुर महाराजपुर, खरकपुर, सुक्खा निवादा, भग्गा निवादा, रामनगर और तोरना में रास्तों पर पानी भरा है। इससे मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी दिक्कत हो रही है। रामनगर निवासी पप्पू कुरील ने बताया कि उनकी पुत्री की तबीयत खराब है, लेकिन जलभराव के कारण उसे रसूलाबाद अस्पताल नहीं ले जा पा रहे हैं। भग्गा निवादा निवासी पप्पू सिंह ने बताया कि भैंसों के लिए भूसा खत्म हो गया है। पड़ोसियों से उधार लेकर किसी तरह काम चलाना पड़ रहा है। सुक्खा निवादा निवासी पिंकू तिवारी ने बताया कि खेतों में धान की फसल जलमग्न है।पानी भरे होने के कारण हरा चारा भी नहीं ला पा रहे हैं।फसल खराब होने से पुआल मिलने की उम्मीद भी कम है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण दुकानदार भी बाजार तक सामान लेने नहीं जा पा रहे हैं। इससे जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने की शिकायत भी सामने आ रही है। तहसीलदार पंकज उपाध्याय ने बताया कि लेखपालों से जलमग्न क्षेत्रों का सर्वे कराया गया है।पानी उतरने के बाद फसलों में हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। पांडु नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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