देसी कपास बुवाई पर प्रोत्साहन-राशि बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन नहीं जारी:MLA बोले-सदन में उठाया था मुद्दा, DDA बोले-अभी रकबा का रिकॉर्ड नहीं मांगा

Apr 10, 2026 - 09:54
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देसी कपास बुवाई पर प्रोत्साहन-राशि बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन नहीं जारी:MLA बोले-सदन में उठाया था मुद्दा, DDA बोले-अभी रकबा का रिकॉर्ड नहीं मांगा
देसी कपास की बुवाई पर किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी का हरियाणा सरकार की ओर से अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। इस कारण किसानों के हाथ हताश लगी है। अभी देसी कपास की बुवाई होनी है। अगर किसानों को प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी का लाभ नहीं मिला तो कपास फसल का रकबा बढ़ पाना मुश्किल होगा। इसके चलते अधिकांश किसान धान की बुवाई करने पर मजबूर होंगे। इसका असर सिरसा ही नहीं हिसार, फतेहाबाद, जींद, भिवानी व आसपास क्षेत्र में पड़ेगा। सिरसा कपास उत्पादन में हब माना जाता है और हरियाणा में सबसे ज्यादा कपास की बुवाई यहीं पर होती है। यहां पर कॉटन का केंद्रीय अनुसंधान केंद्र का मुख्यायल भी है, जहां पर अनुसंधान होते हैं। ये मुद्दा हरियाणा विधानसभा में भी उठा था, जिसके बाद किसानों को उम्मीद हुई थी। सरकार ने इस बजट सत्र में देसी कपास बुवाई पर प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी की घोषणा भी की थी। अभी तक सरकार की ओर से भी राशि बढ़ोतरी न करने का ठोस कारण भी नहीं सामने आया है और न ही कृषि विभाग से इस बारे में एरिया बुवाई रकबा की रिपोर्ट मांगी है। इसके बिना ये पता नहीं चल पाएगा कि इसका लाभ इसी खरीफ सीजन में किसानों को मिलेगा या नहीं। नोटिफिकेशन आने के बाद मिलेगा लाभ : डीडीए कृषि विभाग से उप निदेशक सुखबीर सिंह ने दैनिक भास्कर एप टीम से बातचीत में बताया, देसी कपास की बुवाई पर किसानों को तीन हजार रुपए ही प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अभी प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी का सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। पहले सरकार द्वारा रकबा रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिसके बाद इसका लाभ मिल पाएगा। किसानों में रूचि बढ़ पाना मुश्किल वर्तमान समय में करीब सात हजार किसान है, जो 17 हजार एकड़ रकबा में देसी कपास फसल की बुवाई करते हैं। इन किसानों को सरकार की इस योजना का लाभ मिलता है। अभी तक सरकार से इनको तीन हजार रुपए एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलती है। ये राशि एक हजार रुपए बढ़ाकर चार हजार रुपए की गई है। इसे बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। कृषि विभाग ने भी देसी कपास की बुवाई पर तीन हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की अधिकारिक घोषणा की है। दूसरी कपास में गुलाबी सुंडी एवं कई तरह की बीमारियों के चलते बुवाई करना छोड़ दिया है। किसानों में रूचि न बढ़ पाने के कारण कपास का रकबा घटता जा रहा है। लोग धान की बुवाई करते हैं। इसका नतीजा ये है कि जमीनी पानी का स्तर घटता जा रहा है। विधायक गोकुल ने उठाया था मुद्दा सिरसा विस सीट से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने देसी कपास का रकब घटने का मुद्दा हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में उठाया था। विधायक सेतिया ने देसी कपास बुवाई के लिए लाभांवित योजना का दायरा बढ़ाने की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने विधानसभा बजट सत्र में देसी कपास का मुद्दा उठाने के बाद इस योजना का दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया। जिस पर कृषि एवं पंचायत मंत्री श्याम सिंह राणा ने जवाब दिया था।

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