साढ़े तीन करोड़ के वाटर प्लांट कहां हुए गायब:भीषण गर्मी में पेयजल संकट, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को किया तलब; चार हफ्तों में जवाब दें

May 8, 2026 - 22:02
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साढ़े तीन करोड़ के वाटर प्लांट कहां हुए गायब:भीषण गर्मी में पेयजल संकट, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को किया तलब; चार हफ्तों में जवाब दें
मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लगाए गए पेयजल वाटर प्लांटों के गायब होने और उनके संचालन बंद होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य और नगर प्रशासन से पूछा है कि करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए वाटर प्लांट आखिर कहां गए। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने की। याचिकाकर्ता व पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से एडवोकेट मनीष यादव और शोभित गुप्ता ने पक्ष रखा। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पूर्व परिषद द्वारा करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए की लागत से शहर के विभिन्न क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों पर जनता को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वाटर प्लांट लगाए गए थे। इन वाटर यूनिट्स के रखरखाव और नियमित जांच की जिम्मेदारी भी तय की गई थी। शुरुआत में ये मशीनें शहर के कई प्रमुख स्थानों पर दिखाई दीं, लेकिन बाद में इनका संचालन बंद हो गया और अब इनका कोई पता नहीं हैं। एडवोकेट ने कोर्ट को बताया कि भीषण गर्मी के दौर में शहरवासियों को पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है और लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। ऐसे में जनता के पैसे से लगाए गए वाटर प्लांटों का गायब होना गंभीर विषय है। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, इंदौर नगर निगम कमिश्नर, कार्यपालन यंत्री नर्मदा जल वितरण विभाग और स्मार्ट सिटी के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

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