यूपी DGP प्रशांत कुमार को मिल सकता है सेवा विस्तार:दिल्ली की तरफ निगाहें, अगर मिला तो प्रदेश के इतिहास में पहले डीजीपी होंगे
यूपी DGP प्रशांत कुमार की रिटायरमेंट डेट कल (31 मई 2025) है। हालांकि उनके सेवा विस्तार मिलने की चर्चा है। अभी आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है। सभी की निगाहें दिल्ली की ओर हैं। वहीं से मंजूरी मिलने के बाद सेवा विस्तार पर मुहर लगेगी। अगर ऐसा हुआ तो यूपी के इतिहास में पहली बार होगा कि किसी कार्यवाहक DGP को सेवा विस्तार मिलेगा। दरअसल कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो रहा है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव की ओर से डीजीपी के सेवा विस्तार के लिए पत्रावली केंद्र सरकार को भेजी गई है। इस पर केंद्र सरकार को फैसला करना है। क्यों मिला सकता है सेवा विस्तार मुख्यमंत्री को फिलहाल प्रशांत कुमार का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा था, इसलिए वे भी चाहते थे कि प्रशांत कुमार को कम से कम 3 से 6 महीने और काम करने का मौका मिले। लेकिन बिना केंद्र की सहमति के ये मुमकिन नहीं हो सकता, क्योंकि अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को सेवा विस्तार बिना केंद्र की अनुमति के नहीं मिल सकता। इसलिए डीजीपी के सेवा विस्तार की संभावना है 29 मई को डीजीपी मुख्यालय पर इस विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें रिटायर हो रहे डीजी रैंक के अफसर पीवी रामाशास्त्री और संजय एम तरडे को तो विदाई दी गई, लेकिन डीजीपी के विदाई का कोई जिक्र नहीं हुआ। हालांकि डीजीपी ने इस विदाई समारोह में खुद कहा कि जब इस कार्यक्रम का होस्ट मैं खुद ही हूं तो मैं खुद को विदाई कैसे दे सकता हूं? उन्होंने यह भी कहा कि इसे लेकर तरह–तरह की चर्चाएं हो रही हैं जो निराधार हैं। उनका इशारा सेवा विस्तार की ओर था। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की वजह से नहीं बन पाए स्थायी डीजीपी
प्रशांत कुमार के स्थायी डीजीपी नहीं बन पाने की वजह सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय है, जिसमें यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से राज्यों के डीजीपी की नियुक्ति का प्राविधान है। इसके तहत 30 साल की सेवा पूरी कर चुके अफसरों की डिटेल यूपीएससी को भेजी जाती है। यूपीएससी उन्हीं में से बेदाग तीन अफसरों के नाम का पैनल राज्य सरकार को भेज देता है, राज्य सरकार को इन्हीं अधिकारियों में से किसी एक को डीजीपी बनाना होता है। आम तौर पर वरिष्ठता के क्रम में तीन अफसरों के नाम राज्य को भेजे जाते हैं, जिनमें से किसी एक को डीजीपी बनाए जाने की बाध्यता होती है। हितेश चंद्र अवस्थी के रिटायरमेंट के समय यूपीएससी के माध्यम से मुकल गोयल की नियुक्ति डीजीपी के पद पर हुई थी, जिन्हें राज्य सरकार ने बीच में ही हटा दिया था। बिहार के रहने वाले हैं प्रशांत कुमार
उनका जन्म बिहार के सीवान में हुआ था। IPS अफसर बनने से पहले प्रशांत कुमार ने MSc, MPhil और MBA भी किया था। बतौर IPS प्रशांत कुमार का जब चयन हुआ था, तो उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था। हालांकि, 1994 में यूपी कैडर की IAS डिंपल वर्मा से उन्होंने शादी की। इसके बाद प्रशांत कुमार ने यूपी कैडर में ट्रांसफर ले लिया।
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