मैं टोनही नहीं हूं...:दाग से मुक्ति के लिए 20-21 सालों का संघर्ष, कोई लड़ रही कोर्ट में तो कोई समाज से
प्रशांत गुप्ता/अमिताभ अरुण दुबे की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ में ‘टोनही’ (जादू-टोना) प्रताड़ना की शिकार महिलाओं की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो चुकी है। हर वक्त आंखों के सामने वही खौफनाक मंजर घूमता रहता है। वही चेहरे याद आते हैं, जो सालों पहले उन्हें बाल पकड़कर घसीट रहे थे, लात-घूंसे मार रहे थे, सीने पर पैर रख रहे थे, कपड़े फाड़ रहे थे, निर्वस्त्र कर रहे थे और दहाड़ें मारकर हंस रहे थे। पूरा गांव दबंगों की दबंगई के आगे सिर झुकाए खड़ा था। कहीं पीड़िताओं की आंखें फोड़ दी गईं, कहीं उनके परिजनों की हत्या कर दी गई। केस दर्ज हुए, लेकिन आरोपी 4-6 महीने में छूट गए। 2-3 साल में मुकदमे भी खत्म हो गए, पर ‘टोनही’ का दाग आज भी जस का तस है। जो इज्जत गई, वह लौटकर नहीं आई। अब सालों बाद मिला सिर्फ 75 हजार रुपए का सरकारी मुआवजा एक बार फिर इन महिलाओं के पुराने जख्म कुरेद रहा है। भास्कर इंवेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि ऐसी सैकड़ों महिलाएं आज भी सामाजिक न्याय के इंतजार में हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िताओं के केस सरकारी वकीलों ने लड़े, लेकिन आरोपी कब और कैसे छूटे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। न वे इतनी सक्षम हैं और न ही इतनी पढ़ी-लिखी कि उच्च न्यायालयों में अपील कर सकें। उन्होंने इसे ही अपनी नियति मान लिया और इसी दाग के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं। उधर, टोनही प्रताड़ना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कहीं टोनही बताकर गांव से बहिष्कृत किया जा रहा है, कहीं हुक्का-पानी बंद कर दिया जा रहा है। पीड़िताओं का आरोप है कि शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं हो रही। ताजा मामला 21 जनवरी 2026 का है, जहां सरगुजा जिले के उदयपुर में एक महिला को टोनही बताकर प्रताड़ित किया गया और मारपीट की गई। थाने में शिकायत पर केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हुई, टोनही प्रताड़ना का प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। पीड़िता आज भी न्याय के लिए भटक रही है। वहीं, एक आरटीआई के जवाब में शासन ने बताया कि वर्ष 2001 से 2012 के बीच टोनही प्रताड़ना के 1128 प्रकरण दर्ज हुए, जबकि 2005 से 2014 के बीच 1066 मामले सामने आए। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2021 के बीच टोनही के शक में हर साल औसतन 200 घटनाएं हिंसक रूप लेती रहीं। वर्ष 2022 में राज्य में टोनही के शक में 22 हत्याएं हुईं। ये दर्द से भरी बुजुर्ग आंखें हैं; एक केस ऐसा भी- 23 साल तक झेला टोनही का दंश, केस खत्म होने के 21 साल बाद मुआवजा केस-1
हमारी इज्जत गई, शरीर अब मरे जैसा है
गरियाबंद का लचकेरा गांव: टोनही पीड़िता के बारे में पूछने पर युवा हमें तिरिथ बाई के घर ले गया। अकेले जिंदगी गुजार रहीं तिरिथ थक चुकी हैं। कहती हैं- इज्जत चली गई, शरीर मर गया। कहती हैं- बैगा को देवता आए, बोला- तिरिथ, विसाहरिन और श्याम टोनही है। लोग हमें घसीटने लगे। गालियां दी। कपड़ा उतारे। करंट लगाया। पेशाब पिलाई। केस का क्या हुआ नहीं पता, पत्र आया है कि 75000 रु. मिलेगा। 3 बार रायपुर हो आई हूं। विसाहरिन बाई ने इसी तरह घटना बयान की। केस-2 आंखें फोड़ दीं, अब जीना-मरना एक जैसा
बलौदाबाजार के लबन थाना से 22 किमी की दूरी पर खैरागांव है। टोनही पीड़ित श्याम बाई कुंवर (65) रहती हैं। जब हम उनके घर पहुंचे तो वे खाट पर बैठी थीं। पति मंशा राम कुर्सी पर। श्याम बाई ने हमें आहट से पहचाना, बोली- कौन है। पास जाने पर पूछा- आपको दिखाई नहीं देता अम्मा। बोलीं- आंखें फोड़ दीं। किसने फोड़ी- फिर उन्होंने रोते-रोते पूरी कहानी बताई। बोलीं- मुझे टोनही कहकर मारा, पीटा। फिर मेरी और पति की आंखें फोड़ दीं। घर छीन लिया। आरोपी छूट गए। दीवारों पर लिखा है... जो महिला को मारेगा, जेल की हवा खाएगा। महिला को जो टोनही कहेगा, 13 साल की जेल सहेगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से उठ रहीं ये मांगें राज्य में टोनही पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसलिए आवाज उठ रही है कि कम से कम इन्हें इतनी मदद तो मिले। जैसे- ये आंकडे भी डराएंगे 2022 जुलाई: जशपुर जिले के डबनीपानी में महिला की हत्या। 2024 सितंबर: बलौदाबाजार में जादू-टोना के शक में 4 की हत्या 2024 नवंबर: सूरजपुर में टोना के शक में महिला की हत्या 2025 जून: खैरागढ़ अंतर्गत खैरबना गांव में महिला की हत्या। ये सिर्फ 4 केस, ऐसे ही सैकड़ों मामले भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. दिनेश मिश्रा, अध्यक्ष, अंधश्रृद्धा निर्मूलन समिति टोनही प्रताड़ना में मुआवजे का अलग प्रावधान हो
टोनही प्रताड़ना के सैकड़ों मामले सालों से कोर्ट में हैं। पीड़िताएं उपेक्षित व बहिष्कृत जीवन जीने को मजबूर हैं। मगर, इनके पुनर्वास और मुआवजा को लेकर ठोस योजना नहीं बन पाई है। एक्सीडेंट में, करंट लगने पर, सांप के काटने पर मुआवजा के प्रावधान है तो टोनही जैसे गंभीर प्रकरण में अर्थदंड से मुआवजा क्यों दिया चाहिए। सरकार अलग से प्रावधान करे। मैंने कई बार पूर्व व वर्तमान सीएम को पत्र लिखे हैं। जुर्माने से ही मुआवजे का प्रावधान
कानून में अधिकतम 5 वर्ष की जेल एवं जुर्माना का प्रावधान है। जुर्माना से ही पीड़िता को मुआवजा मिलेगा। सख्त कानून है लेकिन विडंबना है कि कानून धरातल तक पहुंच ही नहीं पाया है। जागरूकता की आवश्यकता है।-गजेंद्र सोनकर, सरकारी वकील, रायपुर कोर्ट
मुआवजे के लिए भटक रहीं पीड़िताएं, यहीं से पड़ताल
17 नवंबर 2025 को रायपुर द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से गरियाबंद जिले के लचकेरा गांव की तीन टोनही पीड़ित महिलाओं को सूचना पत्र जारी किया गया। इसमें लिखा था-हाईकोर्ट के आदेशानुसार अभियुक्तों द्वारा जमा की गई अर्थदंड की राशि से 75,000-75,000 रुपए आपको दिए जाने हैं। इसके लिए न्यायालय में उपस्थित हों। यह घटना वर्ष 2003 की है, जब तीन महिलाओं को टोनही घोषित कर घरों से घसीटा गया, निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया, लात-घूंसे बरसाए गए, बाल काटे गए और पेशाब पिलाई गई। मामले में सभी आरोपी छूट गए। 22 साल बाद भी पीड़िताओं को न्याय नहीं मिला। अब उन्हें 75 हजार रुपए मुआवजा दिया जा रहा है, इसके लिए भी उन्हें दो महीने से चक्कर लगवाए जा रहे हैं। यहीं से भास्कर ने अपनी जांच शुरू की।
जानिए... क्या कहता है कानून
टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत टोनही कहने पर 3 साल का कठोर कारावास, जुर्माने का प्रावधान है। शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या नुकसान पहुंचाने पर 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ में बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने अलग से कानून बनाया।
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