ललितपुर में रिटायर्ड टीचर के सुसाइड का मामला:परिजनों ने शव लेने से इनकार किया, सुसाइड नोट में पूर्व डीजी पर उकसाने का लगाया अरोप
ललितपुर में 80 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक राजाराम गोस्वामी के परिजनों ने उनके शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। परिजनों ने शुक्रवार सुबह 10 बजे पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर रिटायर्ड डीजी सहित सात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे शव नहीं लेंगे। वहीं 11 बजे तक परिजन व लोग एसपी के पास ही बैठकर वार्ता कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह राज्यमंत्री मनोहर लाल के पुत्र चंद्रशेखर पंथ, भाजपा नेता निखिल तिवारी, गन्धर्व सिंह लोधी और किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अजय पटेरिया के नेतृत्व में 100 से अधिक लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसपी से मिलकर उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की, जिन्होंने राजाराम गोस्वामी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। राजाराम गोस्वामी ने गुरुवार को जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक ने सुसाइड नोट में रिटायर्ड डीजी सहित सात लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। मृतक के पुत्र अनुराग गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें तीन सुसाइड नोट दिए थे और पुलिस को सौंपने के लिए कहा था। राजाराम गोस्वामी ने कहा था कि वह 24 साल पहले दर्ज हुए एक 'झूठे मुकदमे' से परेशान थे, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया। अब पढ़िए टीचर का सुसाइड नोट सुसाइड नोट में शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने लिखा था कि 5 जुलाई 2002 में मेरे जीवन का सबसे बुरा और दुखदाई दिन बनकर आया। 2002 में ललितपुर जनपद में एलवी एन्टॉनी देव कुमार नामक क्रूर, अन्यायी और अत्याचारी पुलिस अधीक्षक आया था। जो पिछड़े वर्ग से बेहद नफरत करता था। 5 जुलाई 2002 को दिन के लगभग 2 बजे दो कांस्टेबल मेरे विद्यालय में आए। मैं कक्षा आठवीं के छात्रों को गणित के प्रश्र हल करा रहा था। मुझसे बोले तुम्हें एसपी साहब बुला रहे हैं। पुलिस अधीक्षक के पास मेरे विरोधी खड़े थे। एसपी ने वहां मुझसे पूछा तू किस जाति का है। एसपी ने कहा कि छूआछूत मानत हो। मैंने कहा कि मैं सन् 1967 से गांव के सरकारी विद्यालय में अध्यापक हूं। भागवती बरार से पानी भरवाया था। गिलास व पानी बहुत गंदे थे, मैंने पानी पीने से मना कर दिया। तब उसने मेरे बीच सडक़ पर सारे कपड़े उतरवाए और मुझे कई लाठियां मारी, गांव के अन्य व्यक्तियों से जाति पूछकर उनके कपड़ उतरवाकर लाठियों से पीटा, सात लोग पिछड़े तथा छह सामान्य वर्ग के लोगों को जेल भेजा गया। हम लोगों पर आरोप लगाए गए कि बरार समाज के लोगों से पानी भरने से रोका गया। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। जान से मारने की धमकी देने की बात कही। जबकि हम लोगों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। पूरा गांव इस बात का साक्षी है। मेरी जिंदगी श्मशान बना दी। मैं अब जीना नहीं चाहता हूं, मेरी मौत का जिम्मेदार एलवी एन्टॉनी देव कुमार रिटायर्ट डीजी लखनऊ, गोकुल प्रसाद पुत्र अजुद्दी रिटायर्ड प्रधानाध्यापक, कामता प्रसाद पुत्र अजुद्दी, देवेन्द्र पुत्र विद्याधर तिवारी शिक्षामित्र तथा झूठी गवाही देने वाले गुलाब पुत्र गोकुल प्रसाद बरार, छोटे लाल, खंजिया बरार निवासी चिगलौआ बार और सीताराम पुत्र जीवन निवासी तालबेहट हैं। इन सभी ने मुझे झुठे मामले में फंसाकर मेरा जीवन बर्बाद किया है।
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