जापान से 6,850 किमी का सफर तय कर काशी पहुंचे:मां कुष्मांडा के दरबार में पूरी हुई मुराद तो दोबारा आया जापानी युवक,21 ब्राह्मणों से कराया विशेष पूजन

Sep 1, 2026 - 15:18
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जापान से 6,850 किमी का सफर तय कर काशी पहुंचे:मां कुष्मांडा के दरबार में पूरी हुई मुराद तो दोबारा आया जापानी युवक,21 ब्राह्मणों से कराया विशेष पूजन
काशी की आध्यात्मिक आभा और सनातन संस्कृति का आकर्षण सात समंदर पार रहने वाले लोगों को भी अपनी ओर खींच रहा है। जापान से करीब 6,850 किलोमीटर की यात्रा तय कर कुछ जापानी युवा वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने काशी के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। इन श्रद्धालुओं ने भगवती दुर्गाकुंड मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर मां कुष्मांडा का आशीर्वाद लिया। जापानी युवकों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले काशी यात्रा के दौरान उन्होंने मां के मंदिर में पूजा विधान को समझा था। इसके बाद जापान लौटकर उन्होंने उसी विधि से माता की आराधना शुरू की और उनकी मनोकामना पूरी हुई। इसी आस्था के चलते वे एक बार फिर काशी पहुंचे हैं। जापान से आए श्रद्धालुओं में सुवांग और लियोंग सू रमैया समेत अन्य युवक शामिल रहे। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित विभिन्न मंदिरों में दर्शन किया। इसके बाद दुर्गा कुंड स्थित मां के मंदिर में विधि-विधान से विशेष पूजन कराया। तीन साल पहले काशी आए थे, जापान लौटकर शुरू की माता की आराधना जापान से आए सुवांग ने बताया कि वे करीब तीन वर्ष पहले काशी आए थे। उस दौरान उन्होंने मां के मंदिर में पूजा-अर्चना की और वहां होने वाले पूजा विधान को समझा। उन्होंने बताया कि जापान लौटने के बाद उन्होंने उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की पूजा-पाठ शुरू की। सुवांग के मुताबिक, माता से मांगी गई उनकी कामना पूरी हुई, जिसके बाद उन्होंने दोबारा काशी आने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि काशी आकर उन्हें बेहद शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा, “हम तीन साल पहले काशी आए थे। यहां माता के मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उस समय हमने माता के पूजा विधान को समझा था। अपने देश जाने के बाद हमने उसी तरह पूजा-पाठ किया। आज हमारी मांगी हुई कामना पूरी हुई है, इसलिए हम लोग पुनः काशी आए हैं।” सुवांग ने कहा कि काशी उन्हें काफी शांत नगरी लगती है और यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा महसूस होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें सनातन धर्म के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा है, इसी विश्वास के कारण इतनी लंबी दूरी तय कर वे काशी पहुंचे हैं। 21 ब्राह्मणों ने किया दुर्गा सप्तशती का पाठ जापानी श्रद्धालुओं का विशेष पूजन भगवती दुर्गा कुंड मंदिर में आचार्य विकास पांडे के निर्देशन में संपन्न हुआ। आचार्य विकास पांडे ने बताया कि जापान से आए श्रद्धालुओं के मन में भगवती के प्रति अपार श्रद्धा, विश्वास और भाव है। इसके साथ ही वे बाबा विश्वनाथ के प्रति भी गहरी आस्था रखते हैं। उन्होंने बताया कि विशेष पूजा के दौरान विधि-विधान से गणेश जी, गौरी तथा पंचांग वेदियों का पूजन कराया गया। इसके बाद 21 ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। जापानी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक पाठ का श्रवण किया। इसके बाद हवन और आरती का आयोजन भी हुआ। आचार्य विकस ने बताया कि जापान से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें भगवती के चरणों में बेहद गहरी आस्था है। विशेष रूप से सु जी और लोंग जी माता के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं। उनका विश्वास है कि जीवन में उन्होंने जो कुछ भी प्राप्त किया है, वह भगवती की कृपा से ही संभव हुआ है। इसी भावना के साथ उन्होंने काशी पहुंचकर माता की आराधना और विशेष पूजन संपन्न कराया।

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