सड़क सुरक्षा पर इंदौर में बड़ा एक्शन प्लान:हेलमेट-सीट बेल्ट नियमों की होगी सख्त निगरानी; ब्लैक स्पॉट खत्म करने और गड्ढे भरने पर फोकस
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से इंदौर में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर सख्ती की तैयारी की जा रही है। हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता अभियान तेज किए जाएंगे। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी और अधिक प्रभावी होगी। इसके साथ ही शहर और जिले की सड़कों के रखरखाव, गड्ढों की मरम्मत तथा ब्लैक स्पॉट्स के सुधार कार्यों पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में जस्टिस सप्रे ने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट जीवन रक्षा के सबसे सरल और प्रभावी उपाय हैं, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों में इनका उपयोग अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि केवल चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों को जागरूक कर इसे जनआंदोलन बनाना होगा। उन्होंने सभी शासकीय विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा के संदेश को घर-घर तक पहुंचाएं और प्रत्येक व्यक्ति को “रोड सेफ्टी ब्रांड एम्बेसडर” बनने के लिए प्रेरित करें। सड़कों के गड्ढों का होगा सर्वे बैठक में सड़क इंजीनियरिंग और सड़कों की गुणवत्ता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जस्टिस सप्रे ने निर्देश दिए कि जिले की सड़कों पर मौजूद गड्ढों का तत्काल सर्वे कराया जाए और मरम्मत कार्य बिना देरी शुरू किया जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को भविष्य में ऐसी गुणवत्ता वाली सड़कें बनाने के निर्देश दिए, जिनमें गड्ढे बनने की संभावना कम हो और दुर्घटनाजनक ब्लैक स्पॉट्स विकसित न हों। ब्लैक स्पॉट्स सुधारने से दुर्घटनाएं घटीं बैठक में बताया गया कि जिले के कई ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार कार्य किए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कुछ स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में दुर्घटनाओं को शून्य तक लाने में भी सफलता मिली है। सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं जस्टिस सप्रे ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस, प्रशासन या न्याय पालिका का विषय नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सड़क पर घायल व्यक्ति की मदद करने के लिए किसी विशेष पद या अधिकार की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की जरूरत होती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश में औसतन हर तीन मिनट में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा देता है। इस स्थिति को बदलने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। स्वच्छता के बाद अब सड़क सुरक्षा में नंबर-1 बनने का लक्ष्य जस्टिस सप्रे ने कहा कि इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब समय आ गया है कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी इंदौर देश का अग्रणी शहर बने। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठन, मीडिया और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। बैठक में मौजूद सभी संस्थाओं और संगठनों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा यातायात नियमों के पालन को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया।
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