कानपुर के छात्रों ने मूक-बधिर के लिए बनाया AI मॉडल:इशारों को रियल टाइम में आवाज और टेक्स्ट में बदलेगा
कानपुर शहर के एलनहाउस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एमबीए प्रथम वर्ष के तीन छात्रों प्रियांशु, प्रशांत और सूर्यांश ने तकनीक को संवेदनशीलता से जोड़ते हुए मूक-बधिर बच्चों के लिए एक नई राह खोली है। छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो बच्चों के हाथों और हाव-भाव से किए गए इशारों को रियल टाइम में स्पीच और टेक्स्ट में बदल देता है, जिससे संवाद की दूरी कम हो सके। एआई और डीप लर्निंग से आसान संवाद
यह मॉडल डीप लर्निंग और सीएनएन तकनीक पर आधारित है। कैमरे के सामने जैसे ही बच्चा इशारों में कुछ कहता है, सिस्टम तुरंत उसका अर्थ समझकर शब्दों में बदल देता है। इससे माता-पिता और परिजन बच्चों की बात न सिर्फ समझ पाएंगे, बल्कि उनकी जरूरतों पर समय रहते प्रतिक्रिया भी दे सकेंगे। मोबाइल से पोर्टेबल डिवाइस तक की तैयारी
प्रोजेक्ट के मेंटर प्रो. माधवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार यह तकनीक मोबाइल एप और लैपटॉप दोनों पर आसानी से काम कर सकती है। भविष्य में इसे पोर्टेबल डिवाइस के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि यह आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंच सके। विजन स्टार्टअप में मिला निवेशकों का भरोसा
लखनऊ में आयोजित ‘विजन स्टार्टअप’ कार्यक्रम में इस मॉडल की प्रस्तुति दी गई। शुरुआत में इसे सामान्य प्रोजेक्ट माना गया, लेकिन जैसे-जैसे इसकी सामाजिक उपयोगिता सामने आई, एक निवेशक ने इसमें गहरी रुचि दिखाई और डिवाइस विकसित करने के लिए सहयोग का भरोसा दिलाया। खामोशी को शब्दों में बदलने का लक्ष्य
छात्र प्रियांशु का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ प्रोजेक्ट बनाना नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी आसान बनाना है जो संवाद की कमी से जूझ रहे हैं। यदि यह मॉडल आम उपयोग में आ जाता है, तो मूक-बधिर बच्चों की खामोशी सचमुच शब्दों में बदल जाएगी।
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