स्वतंत्रता सेनानी कृष्णा मोदी काे दिया गार्ड ऑफ ऑनर:बैतूल में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; मजदूर संगठनों ने बताया अपूरणीय क्षति

Jun 14, 2025 - 15:39
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स्वतंत्रता सेनानी कृष्णा मोदी काे दिया गार्ड ऑफ ऑनर:बैतूल में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; मजदूर संगठनों ने बताया अपूरणीय क्षति
मजदूर आंदोलन के अग्रणी नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का. कृष्णा मोदी का शुक्रवार शाम बैतूल में निधन हो गया। उन्होंने 97 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हार्ट प्रॉब्लम सामने आने पर नागपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया। शनिवार को पाथाखेड़ा में राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। मुखाग्नि उनके दोनों पोते शिवम और पंकज मोदी ने दी। राजकीय सम्मान के तहत प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एडीएम-पुलिस अधिकारी और श्रमिक संगठनों ने दी श्रद्धांजलि इस दौरान एडीएम राजीव नंदन श्रीवास्तव और पुलिस प्रशासन से मयंक तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने परिजनों को 10 हजार रुपए की सम्मान निधि भी दी। इस दौरान पाथाखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रमिक संगठन के लोग मौजूद थे। डब्ल्यूसीएल के महाप्रबंधक लक्ष्मीकांत पात्रा, बीएमएस के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. बसन्त रॉय, नगर पालिका अध्यक्ष किशोर वरदे और भाजपा जिला महामंत्री कमलेश सिंह , एटक नेता श्रीकांत चौधरी समेत कई नेता शामिल हुए। 14 साल की उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में आए एटक के प्रदेश अध्यक्ष हरिद्वार सिंह ने बताया कि बालाघाट जिले के वारासिवनी गांव में जन्मे का. मोदी ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कदम रखा था। स्कूल के दिनों में आंदोलनकारियों के साथ मिलकर आगजनी की थी, जिसके बाद अंग्रेजी शासन से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए थे। बाद में दो स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमाणन के बाद उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा मिला। कांग्रेस नेता मोहम्मद इलियास के मुताबिक उनके बड़े भाई की पैतृक गांव में चाय की दुकान थी, जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गुप्त बैठकें होती थीं। यहीं से उन्हें आजादी के आंदोलन की प्रेरणा मिली। एक बार अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार किया तो थाने का घेराव कर आंदोलनकारियों ने उन्हें छुड़ाया था। प्रदेश अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि मजदूर आंदोलन में का. मोदी की भूमिका हमेशा अग्रणी रही। उन्होंने मजदूरों के वेतन, अधिकार और कल्याण के लिए तमाम राष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाई। उनका पूरा जीवन मजदूरों के संघर्ष को समर्पित रहा। कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव रहे का. कृष्णा मोदी ने अपना पूरा जीवन मजदूरों और श्रमिक हितों के संघर्ष में बिताया। वे ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के वरिष्ठ नेता, मध्यप्रदेश में 20 सालों तक एटक के प्रदेश अध्यक्ष और एक बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्यप्रदेश सचिव भी रहे। कोल इंडिया में मजदूरों के वेतन निर्धारण के लिए गठित जेबीसीसीआई (ज्वाइंट बाइपार्टीट कोलिंग कमेटी) के सदस्य भी रहे। इंडियन माइन वर्कर फेडरेशन के अध्यक्ष पद पर भी उन्होंने लंबे समय तक मजदूरों का प्रतिनिधित्व किया। संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एसकेएमएस) एटक के महासचिव अजय विश्वकर्मा ने कहा कि का. मोदी ने मजदूरों के हक के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनकी मृत्यु से मजदूर आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष हरिद्वार सिंह ने भी गहरा शोक व्यक्त किया।

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