चकाचक सड़क के 6 करोड़ मांगने के मामले में कार्रवाई:400 डॉटा एंट्री ऑपरेटर्स का काम बदला, JE-AE पहले हो चुके हैं सस्पेंड
देवरिया में चकाचक सड़क की मरम्मत के नाम पर 6 करोड़ रुपए मांगने के मामले में लगातार कार्रवाई हो रही है। 10 मई को दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद से ही सीएम ऑफिस एक्शन में है। PWD के बड़े अफसरों को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। शनिवार को लखनऊ समेत सभी जिलों के PWD दफ्तर में तैनात सभी 400 डाटा एंट्री ऑपरेटर का कार्य क्षेत्र बदल दिया गया है। ये ऑपरेटर 20 साल से एक ही जगह पर जमे हुए थे। सिर्फ लखनऊ में ही ऐसे 174 ऑपरेटर हैं। देवरिया में सड़क मामले में डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध मिली थी। इसलिए यह एक्शन हुआ है। इस मामले में 11 मई को JE राम गणेश पासवान को सस्पेंड कर दिया गया था। फिर 13 मई को सरकार ने AE सुधीर कुमार को सस्पेंड कर दिया था। एक्सईएन अनिल जाटव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कहा गया था। उसकी जांच चल रही है। देवरिया के बजट बाबू रविंद्र गिरी को भी सस्पेंड कर दिया गया है। मुख्यालय से डाटा एंट्री ऑपरेटरों का कार्य क्षेत्र बदला
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (मुख्यालय-1) एवं विभागाध्यक्ष अनिल कुमार दुबे ने एक आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मुख्यालय के सभी कार्यालय अध्यक्षों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने अधीन वृत्तीय एवं खंडीय कार्यालयों में कार्यरत आउटसोर्सिंग डाटा एंट्री ऑपरेटरों का पटल परिवर्तन करें। यह कार्रवाई करके इसकी सूची 19 मई, 2025 तक अधिशासी अभियंता, कम्प्यूटराइजेशन खंड, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ को उपलब्ध कराएं। अब जानिए क्या है पूरा मामला?
साल-2015 में कप्तानगंज से रुद्रपुर तक 50 किमी सड़क बनने के लिए PWD ने टेंडर निकाला। इसमें गौरी बाजार से रुद्रपुर तक के हिस्से का टेंडर जय शक्ति कंस्ट्रक्शन को मिला। इसका बजट तब लगभग 16 करोड़ रुपए था। काम शुरू हो गया। सड़क का एक हिस्सा बन भी गया। उसी दौरान इस सड़क को एशियन डेवलपमेंट बैंक ने फंडिंग कर दी। जय शक्ति कंस्ट्रक्शन ने जितना काम किया था, उसका 10 करोड़ का बिल भुगतान कर दिया गया। बाकी रुपए सरकार को सरेंडर कर दिए गए। इधर, एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 38 करोड़ 64 लाख 20 हजार रुपए इस सड़क के लिए जारी किए। इस राशि से पीडब्ल्यूडी ने 2022 में सड़क बनाकर पूरी कर दी। अब दस साल बाद फिर उसी बॉन्ड (16 करोड़) को ओपन कर तथ्यों को छुपाते हुए बचे हुए 6 करोड़ रुपए की डिमांड भेज दी गई। चूंकि, इस रुपए से कोई काम तो होना नहीं था। यह केवल आपस में बांटा जाता, लेकिन बंटवारे में बराबरी का हिस्सा न मिलने की वजह से मामला लीक हो गया। लखनऊ से मामले की जांच के लिए टीम गठित की। उसके पहले दैनिक भास्कर की टीम ने मामले का इन्वेस्टिगेशन करने देवरिया पहुंची। 50 किलोमीटर की यह सड़क कुशीनगर जिले के कप्तानगंज-हाटा से होते हुए देवरिया के गौरीबाजार से रुद्रपुर तक जाती है। यह सड़क चकाचक है। कहीं पर भी गड्ढे नहीं हैं। हम देवरिया के PWD के दफ्तर पहुंचे, जहां ज्यादातर अफसर-बाबू नदारद दिखे। वहां मौजूद ठेकेदारों और बाबुओं से बात की। पहचान नहीं बताने की शर्त पर ठेकेदारों ने बताया कि कुछ लोगों को हिस्सा नहीं मिल रहा था। इसी को लेकर विवाद हुआ और मामला सामने आ गया। एक्सईएन अनिल जाटव पर मेहरबान हैं जांच अधिकारी
PWD में जांच अधिकारी सुरेंद्र कुमार देवरिया एक्सईएन अनिल जाटव पर खासा मेहरबान हैं। सीएम ऑफिस से उनके खिलाफ नियम 7 की कार्रवाई के आदेश हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अनिल जाटव देवरिया में ही तैनात है। जबकि नियम यह है कि उन्हें उस पोजिशन से हटाकर कहीं और अटैच करना चाहिए था। इस तरह अनिल जाटव वहां रहते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इसमें शामिल चेहरों को उजागर करने के लिए बजट बाबू रविंद्र गिरी और दूसरे कर्मचारियों से हिडन कैमरे पर बात की थी। रविंद्र गिरी भी मामले में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा था- अगर फंसा तो सबको घसीटूंगा। किसी ने कहा, मेरे सिग्नेचर नहीं तो कोई फोन स्विच ऑफ करके गायब हुआ
दैनिक भास्कर की टीम ने इस घोटाले से जुड़े सभी लोगों से बातचीत करने की कोशिश की थी। लेकिन, किसी का नंबर बंद मिला, तो किसी ने मामले से पल्ला ही झाड़ लिया। गोरखपुर के चीफ इंजीनियर राकेश वर्मा से इस संबंध में लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई। कई दिनों तक फोन मिलाने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्होंने मैसेज का भी कोई जवाब नहीं दिया देवरिया ऑफिस में एई सुधीर कुमार मिले। उन्होंने साफ कहा कि मुझे फंसाया जा रहा है। मेरा इन सबसे कोई संबंध नहीं है। फाइल पर मेरे फर्जी सिग्नेचर बनाए गए होंगे। एक्सईएन प्रांतीय खंड देवरिया अनिल जाटव ने फोन पर बताया- मामला पकड़ में आने के बाद तत्काल मुख्यालय को पैसा वापस कर दिया गया है। इसकी जांच तीन सदस्यीय कमेटी कर रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। मेरा लॉगइन आईडी कैसे यूज हुआ, यह मैं नहीं जानता। एसीई ऑफिस के बजट बाबू उपेंद्र प्रसाद ने बताया कि डिवीजन से डिमांड फाइल आई थी। उसे चीफ गोरखपुर को भेज दिया गया। एसई साहब जैसा निर्देश दिए उसी तरह से लेटर बन गया। प्रांतीय खंड के कंप्यूटर ऑपरेटर ऋषभ का नाम सामने आया। हालांकि, वह भी हमें ऑफिस में नहीं मिला। उसने फोन पर बताया कि गलती हो गई है। इसके बाद उसने फोन काट दिया। कई बार फोन करने के बाद भी फोन नहीं उठाया। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें... यूपी में चकाचक सड़क के लिए मंगा लिए 6 करोड़, बाबू बोला- मैं फंसा तो सबको घसीटूंगा; खुफिया वीडियो में पूरा खुलासा एशियन डेवलपमेंट बैंक की चकाचक सड़क को खराब बताकर 6 करोड़ रुपए मंजूर कराए। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अफसर-इंजीनियर्स और बाबू इस 6 करोड़ रुपए को लूट पाते, उसके पहले इनमें ही फूट पड़ गई। मामले की लखनऊ शिकायत पहुंची। अब तीन सदस्यीय एसआईटी इसकी जांच कर रही है। इससे पहले दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले का इन्वेस्टिगेशन किया। आखिर इसमें किन अफसर-इंजीनियर और कर्मचारियों की क्या भूमिका थी, कैसे प्लान तैयार किया गया? हमने हिडन कैमरे पर बाबू से लेकर अफसरों तक से बात की। पढ़ें पूरी खबर
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