झीरम घाटी हमला, 10 दोषियों की सजा पर आज फैसला:उम्रकैद या फांसी पर कोर्ट करेगा निर्णय, 13 साल बाद दोषसिद्धि का फैसला आया था
छत्तीसगढ़ के बस्तर में साल 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में दोषी करार दिए गए 10 आरोपियों की सजा पर आज यानी 16 सितंबर को फैसला होगा। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत सजा का ऐलान करेगी। कोर्ट ने 5 सितंबर को मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अब कोर्ट यह तय करेगा कि दोषियों को उम्रकैद, फांसी या कानून के तहत कोई दूसरी सजा दी जाए। फैसले पर पीड़ित परिवारों, कांग्रेस और बचाव पक्ष की नजर है। झीरम घाटी मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके साथ ही अलग-अलग दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 5 सितंबर को NIA की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। 25 मई 2013 को परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से जगदलपुर लौट रहा था। काफिले में कांग्रेस के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने सड़क पर पेड़ गिराकर काफिले का रास्ता रोक दिया। काफिला रुकते ही नक्सलियों ने हमला कर दिया। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। NIA ने 2013 में शुरू की जांच, सितंबर 2014 में दाखिल की चार्जशीट झीरम घाटी हमले के बाद मामले की जांच NIA को सौंपी गई। NIA ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान कई आरोपियों के नाम सामने आए। बाद में गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई चली। NIA ने सितंबर 2014 में मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने दिसंबर 2023 में झीरम घाटी हत्याकांड में शामिल माओवादियों की जानकारी सार्वजनिक करते हुए विज्ञापन भी जारी किया था। इसमें कई नक्सलियों के नाम और उनसे जुड़ी जानकारी दी गई थी। दो न्यायिक आयोग और SIT भी बनी झीरम घाटी हमले की जांच अलग-अलग स्तर पर होती रही। घटना के बाद न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाया गया। आयोग को सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षा में चूक, SOP, पुलिस बलों के समन्वय और परिवर्तन यात्रा से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2018 में SIT का गठन किया गया। SIT को हमले में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच करनी थी। साल 2021 में एक और न्यायिक जांच आयोग बनाया गया। इसकी जिम्मेदारी न्यायमूर्ति सतीश अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति गुलाम मिन्हाजुद्दीन को दी गई थी। कांग्रेस ने कहा- बड़े सवालों के जवाब अब भी बाकी 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रही है। पार्टी का आरोप है कि झीरम घाटी हमले के पीछे बड़ी साजिश थी, लेकिन जांच अब तक कथित मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच पाई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि NIA की जांच में लीपापोती हुई। उनका कहना था कि SIT की जांच से राजनीतिक षड्यंत्र सामने आ सकता था। उन्होंने भाजपा पर मामले की तह तक जांच नहीं करने और षड्यंत्रकारियों को बचाने का आरोप भी लगाया। बचाव पक्ष बोला- हाईकोर्ट में अपील करेंगे दोषसिद्धि के बाद 10 आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है। आदेश की कॉपी मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। कुछ आरोपियों के परिजनों ने भी उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया है। आज कोर्ट के फैसले पर नजर 13 साल पुराने इस मामले में 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। अब आज कोर्ट उनकी सजा पर फैसला सुनाएगा। कोर्ट यह तय करेगा कि दोषियों को किस प्रावधान के तहत और कितनी सजा दी जाए।
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