बुलंदशहर में छात्रा से दुष्कर्म के बाद होटल सीज:आरोपी चाचा गिरफ्तार, स्कूल छोड़ने के बहाने होटल ले जाकर किया था रेप
"चाचा, मुझे स्कूल छोड़ दो..." यह मासूम भरोसा उस 12वीं की छात्रा का था, जिसने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि जिस रिश्तेदार के कंधों पर सुरक्षा का मान होता है, वही उसकी जिंदगी को काले अंधेरे के मुहाने पर धकेल देगा। खुर्जा देहात थाना क्षेत्र के मुंडाखेड़ा चौराहे से शुरू हुई वह सुबह सिर्फ एक छात्रा की स्कूल यात्रा नहीं थी, बल्कि रिश्तों के कत्ल और एक मासूम के विश्वास के चकनाचूर होने की खौफनाक दास्तान बन गई। एनएच-34 स्थित उस ‘मिड हाईवे’ होटल के कमरे की दीवारें आज भी उस चीख की गवाह हैं, जिसे जबरन पहनाए गए बुरके और दरिंदगी के साए में घोंट दिया गया। रिश्ते में चाचा लगने वाला रिजवान, जिसने इलाज के नाम पर डॉक्टर का पेशा चुना था, खुद इंसानियत के लिए नासूर बन बैठा। दरिंदगी इतनी बर्बर थी कि मासूम की साँसें उखड़ने लगीं, ब्लीडिंग से उसका शरीर निढाल हो गया, लेकिन इस हैवान का दिल नहीं पसीजा। कुछ दवाइयां थमाकर और पूरे परिवार को मौत के घाट उतारने की धमकी देकर उसने अपनी ही भतीजी को चौराहे पर तड़पता छोड़ दिया। इस वक्त अस्पताल के आईसीयू और मेडिकल वार्ड के बाहर सन्नाटा पसर रहा है, जिसे सिर्फ पीड़ित मां-बाप की सिसकियां तोड़ रही हैं। जिस बेटी को सुबह किताबों के साथ हंसते-खेलते विदा किया था, उसे खून से लथपथ देखकर परिजनों की आंखों के आगे अंधेरा छा गया। पिता की कांपती आवाज बस एक ही सवाल पूछ रही है—"अगर अपनों पर ही भरोसा नहीं रहेगा, तो बेटियां सुरक्षित कहां रहेंगी?" चिकित्सकों की टीम पीड़िता को बचाने और उसकी स्थिति को स्थिर करने के लिए लगातार जुटी हुई है, लेकिन जो मानसिक आघात और गहरा ज़ख्म उसकी रूह पर लगा है, उसकी भरपाई शायद कोई दवा न कर पाए।क्षेत्राधिकारी (सीओ) शोभित कुमार और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। प्रशासनिक मुस्तैदी दिखाते हुए एसडीएम सत्येंद्र कुमार के निर्देशों पर उस खौफनाक वारदात के ठिकाने 'मिड हाईवे' ओयो होटल को सीज कर दिया गया है। लेकिन यह मामला सिर्फ एक आरोपी रिजवान की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम ओयो हॉस्टलों और होटलों के ढचरों पर भी करारा तमाचा है, जो चंद पैसों के लालच में नियमों की धज्जियां उड़ाकर ऐसे अपराधों का अड्डा बन जाते हैं।
पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों का आक्रोश चरम पर है। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने एक सुर में प्रशासन से गुहार लगाई है कि आरोपी के खिलाफ महज कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि उसके अवैध काले साम्राज्य और संपत्तियों पर प्रशासन का बुलडोजर चलाया जाए।
रिश्तों के भरोसे का जनाजा
यह घटना सिर्फ एक अपराध की खबर नहीं, बल्कि हमारे समाज के ताने-बाने पर एक गहरा जख्म है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, जब डॉक्टर ही दरिंदा बन जाए, तब कानून से उम्मीद की किरण ही एकमात्र सहारा बचती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बेटी को न्याय दिलाने के लिए कितनी नज़ीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है, ताकि फिर किसी रिजवान की हिम्मत रिश्तों की गरिमा को तार-तार करने की न हो सके।
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