एक साल बाद भारी वाहनों के लिए खुला गेगासो-गंगा पुल:₹20 करोड़ से हुआ कायाकल्प, रायबरेली-फतेहपुर की सीधी कनेक्टिविटी बहाल
रायबरेली के लालगंज-सरेनी मार्ग पर स्थित गेगासो गंगा पुल पर एक साल बाद भारी वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो गया है। मरम्मत पूरा होने के बाद जिला प्रशासन और एनएचएआई के निर्देश पर बुधवार शाम पुल को सभी प्रकार के हल्के और भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया। पुल के दोबारा चालू होने से रायबरेली और फतेहपुर के बीच सीधी कनेक्टिविटी बहाल हो गई है। पुल खुलने से बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले भारी वाहनों को अब 20 से 25 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। पिछले एक वर्ष से भारी वाहन डलमऊ और उन्नाव होकर लंबा रास्ता तय कर रहे थे, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही थी। अब व्यापारिक गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था को भी राहत मिलेगी। 1978 में बनकर तैयार हुआ था पुल गेगासो गंगा पुल का निर्माण उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 1970 के दशक की शुरुआत में शुरू कराया था। वर्ष 1978 में यह पुल बनकर तैयार हुआ, जिस पर उस समय करीब 1.94 करोड़ रुपये की लागत आई थी। उद्घाटन के समय रायबरेली के तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र प्रकाश शुक्ल (आईएएस) थे। पिछले 48 वर्षों से यह पुल रायबरेली, लालगंज और सरेनी को फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट तथा मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग बना हुआ है। संरचनात्मक खामियां मिलने पर बंद किया गया था पुल लगातार ओवरलोड ट्रकों, गिट्टी-मौरंग से लदे भारी वाहनों और बढ़ते यातायात के दबाव के कारण पुल की संरचना कमजोर हो गई थी। वर्ष 2025 में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और एनएचएआई की संयुक्त तकनीकी टीम ने निरीक्षण किया, जिसमें एक्सपेंशन जॉइंट्स के क्षतिग्रस्त होने, बेयरिंग घिस जाने और पिलर स्लैब में गंभीर दरारें मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी हर्षिता माथुर के निर्देश पर 12 जुलाई 2025 से पुल पर भारी और व्यावसायिक वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। ₹20 करोड़ से हुआ पुल का तकनीकी पुनरुद्धार आवागमन बंद होने के बाद एनएचएआई ने करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से पुल के पुनरुद्धार का कार्य कराया। हाइड्रोलिक जैक की मदद से पुल को उठाकर सभी पुराने बेयरिंग बदले गए। पिलरों की मजबूती बढ़ाने के लिए कार्बन फाइबर रैपिंग और केमिकल ग्राउटिंग की गई। इसके अलावा 1.2 किलोमीटर लंबे हिस्से पर उच्च गुणवत्ता वाली डामर की नई परत बिछाई गई, जिससे पुल को फिर से सुरक्षित और मजबूत बनाया गया। रोज गुजरते हैं 15 से 20 हजार वाहन गेगासो गंगा पुल से प्रतिदिन लगभग 15 से 20 हजार वाहन गुजरते हैं। यह पुल रायबरेली, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग होने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अहम है। इसी मार्ग पर प्रसिद्ध मां संकटा देवी मंदिर और गेगासो गंगा घाट स्थित हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पुल दोबारा खुलने से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है।
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