निर्माण श्रमिकों की बेटियों को ₹25 हजार नकद:साथ में ₹25 हजार की एफडी भी, जानें योजना
मऊ। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। सहायक श्रम आयुक्त प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा देना है। मातृत्व हित लाभ के अंतर्गत पंजीकृत पुरुष श्रमिक की पत्नी को संस्थागत प्रसव पर ₹6,000 की एकमुश्त सहायता मिलती है। वहीं, पंजीकृत महिला कर्मकार को संस्थागत प्रसव पर तीन माह के न्यूनतम वेतन के बराबर धनराशि और ₹1,000 चिकित्सा बोनस दिया जाता है। यह योजना पहले दो बच्चों तक लाभ प्रदान करती है। पुत्र के जन्म पर ₹20,000 और पुत्री के जन्म पर ₹25,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है। इसके अतिरिक्त, पहली या दूसरी संतान बालिका होने पर, अथवा कानूनी रूप से बालिका गोद लेने पर ₹25,000 की सावधि जमा (एफडी) कराई जाती है। यदि जन्म से बालिका दिव्यांग हो, तो ₹50,000 की एफडी की व्यवस्था है। यह राशि बालिका के 18 वर्ष की आयु तक अविवाहित रहने की स्थिति में देय होगी। योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिक का पंजीकरण कम से कम एक वर्ष पुराना होना चाहिए और उसका समय-समय पर नवीनीकरण भी आवश्यक है। आवेदन ऑनलाइन जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से प्रसव के 365 दिनों के भीतर किया जा सकता है। सहायक श्रम आयुक्त ने बताया कि विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों तक योजना का लाभ पहुंचाना है। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि पात्र श्रमिक समय पर आवेदन कर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें।
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