सिद्धार्थनगर में बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ा:बांसी में 99.20 MM बारिश, बानगंगा खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे

Jul 14, 2026 - 09:50
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सिद्धार्थनगर में बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ा:बांसी में 99.20 MM बारिश, बानगंगा खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे
सिद्धार्थनगर जिले में मानसून की बारिश के कारण नदियों और नालों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर द्वारा 14 जुलाई की सुबह 8 बजे जारी दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार, बानगंगा नदी खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे बह रही है। जिले में सबसे अधिक 99.20 मिलीमीटर बारिश बांसी में रिकॉर्ड की गई, जबकि नौगढ़ में 42 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बानगंगा बैराज पर नदी का जलस्तर सुबह 8 बजे 89.20 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का स्तर 93.420 मीटर और चेतावनी स्तर 92.420 मीटर है। इस प्रकार, नदी खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे है। बानगंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 94.950 मीटर दर्ज है। बानगंगा क्षेत्र में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राप्ती नदी के बांसी पुल पर सुबह जलस्तर 84.50 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का स्तर 84.900 मीटर और चेतावनी स्तर 83.900 मीटर है। बांसी में 99.20 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। परसोहन घाट पर नदी का जलस्तर 84.60 मीटर रहा, जहां खतरे का स्तर 95.550 मीटर और चेतावनी स्तर 94.550 मीटर है। परसोहन में 5.20 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मुख्य चोरवा घाट पर सुबह जलस्तर 81.23 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यहां खतरे का स्तर 90.790 मीटर और चेतावनी स्तर 89.790 मीटर है। ककरही पुल पर जलस्तर 84.90 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 85.650 मीटर और चेतावनी स्तर 84.650 मीटर है। ककरही क्षेत्र में 34.60 मिलीमीटर बारिश हुई। आलमनगर गेज स्टेशन पर सुबह जलस्तर 78.47 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का स्तर 87.200 मीटर और चेतावनी स्तर 86.200 मीटर है। उसका रेलवे पुल पर जलस्तर 81.20 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि खतरे का स्तर 83.520 मीटर और चेतावनी स्तर 82.520 मीटर है। उसका क्षेत्र में 47.10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। घोघी नदी के लोटन पुल पर सुबह जलस्तर 90.22 मीटर दर्ज किया गया। वहीं, तेलार नाला के सड्डा नाला गेज स्टेशन पर जलस्तर 86.85 मीटर और जमुआर नाला के नौगढ़ पुल पर 82.14 मीटर रिकॉर्ड किया गया। नौगढ़ में 42 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 14 जुलाई की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक जिले की नदियों और नालों के जलस्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। मानसून की बारिश को देखते हुए संबंधित विभाग जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं।

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