एक के गहनों की चाह में कई घर उजड़े:ANTF ने दबोचा नशे का सौदागर; कर्ज से शुरू हुआ जुर्म, पत्नी के गहनों की सनक में फैला मौत का कारोबार

Jan 24, 2026 - 16:48
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एक के गहनों की चाह में कई घर उजड़े:ANTF ने दबोचा नशे का सौदागर; कर्ज से शुरू हुआ जुर्म, पत्नी के गहनों की सनक में फैला मौत का कारोबार
राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 6 सालों से फरार 25 हजार रुपए के इनामी अंतरराज्यीय नशा तस्कर भोपालसिंह को मध्यप्रदेश के नीमच जिले से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब और महाराष्ट्र में नशे का नेटवर्क चला रहा था। ऐसे फंसा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के जाल में मुखबिर से सूचना मिलने के बाद ANTF ने खरीदार बनकर भोपालसिंह से संपर्क साधा। बड़ी खेप का लालच देकर उसे गांव से बाहर खेत पर मिलने बुलाया गया। 20 जनवरी के आसपास भोपालसिंह जैसे ही खेत पर पहुंचा, पहले से घात लगाए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की टीम ने चारों ओर से घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। गांव के भीतर कार्रवाई में पूर्व में असफलता को देखते हुए टीम ने रणनीतिक तरीके से यह गिरफ्तारी की। कर्ज से शुरू हुआ जुर्म का रास्ता पूछताछ में आरोपी भोपालसिंह ने बताया कि माता की बीमारी, खेती में नुकसान और पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी शादी के खर्चों के कारण उस पर भारी कर्ज हो गया था। खेती से कर्ज न चुकता कर पाने के कारण उसने नशा तस्करी के धंधे में कदम रखा। हालांकि कर्ज उतर गया, लेकिन करीब आधा दर्जन एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे उसके सिर चढ़ गए। फरारी और मुकदमों में काली कमाई खर्च हो गई और वह दोबारा कंगाली की हालत में पहुंच गया। दूसरी शादी के बाद फिर काले धंधे में उतरा एटीएस व एएनटीएफ आईजी पुलिस विकास कुमार ने बताया कि दूसरी शादी के बाद पत्नी को सोने के गहनों से सजाने की सनक में भोपालसिंह ने फिर से नशे के कारोबार को हवा दी। उसने मेवाड़ और मारवाड़ के दूर-दराज इलाकों तक नशे का साम्राज्य फैला दिया।एक तरफ उसकी पत्नी नए-नए गहनों से संवरती रही, तो दूसरी ओर नशे की लत में फंसे परिवारों की महिलाओं के गहने उतरते चले गए। अफीम पट्टे से शुरू हुई कालाबाजारी भोपालसिंह के पिता के नाम अफीम की खेती का सरकारी पट्टा था, जिसकी पूरी उपज सरकार को सौंपनी थी। लेकिन भोपाल चोरी-छिपे अफीम उत्पादों की कालाबाजारी करने लगा। मुकदमों के बाद सरकार ने पट्टा निरस्त कर दिया, इसके बाद उसने क्षेत्र के काश्तकारों से 400-500 रुपए किलो में डोडा-चूरा खरीदकर 2000-2500 रुपए किलो में बेचना शुरू किया। एस्कॉर्टिंग से दोगुना मुनाफा नशे की आपूर्ति के साथ-साथ भोपाल मध्यप्रदेश से राजस्थान तक डोडा-चूरा भरी गाड़ियों को सुरक्षित एस्कॉर्ट कराने का ठेका भी लेने लगा। इससे उसका मुनाफा दोगुना हो गया और नेटवर्क पंजाब व गुजरात तक फैल गया।

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