चारामा पूर्व जनपद अध्यक्ष की रायपुर सेंट्रल जेल में मौत:परिजनों ने मौत को बताया संदिग्ध, जेल प्रशासन पर लगाए आरोप, अंतिम संस्कार से इनकार
सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष और जनपद पंचायत चारामा के पूर्व अध्यक्ष जीवन ठाकुर (49) की रायपुर सेंट्रल जेल परिसर में इलाज के दौरान मौत हो गई। दो दिन पहले उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर केंद्रीय जेल भेजा गया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में भर्ती किया गया था। शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे उनकी मौत हो गई। इस घटना से परिजनों, आदिवासी समाज और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में नाराज़गी है। जीवन ठाकुर पर लगे थे धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप मयाना गांव के ग्रामीणों ने जीवन ठाकुर पर फर्जी वन पट्टा बनाने की शिकायत की थी। जांच में यह शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद मौजूदा तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में उन्हें 12 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। प्रशासनिक कारणों से 2 दिसंबर 2025 को उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। तड़के बिगड़ी पूर्व अध्यक्ष की तबीयत कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव मुताबिक, 4 दिसंबर की तड़के जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जेल मेडिकल अधिकारी की सलाह पर उन्हें सुबह 4:20 बजे एंबुलेंस से मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में सुबह 7:45 बजे उनकी जांच की गई और इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप परिजनों और आदिवासी समाज ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जीवन ठाकुर की मौत की जानकारी कई घंटे बाद दी गई, जिस वजह से उन्हें प्रशासन पर भरोसा नहीं रहा। परिजनों का आरोप है कि मौत की सूचना समय पर न देना शक पैदा करता है और घटना पर सवाल खड़े करता है। मृतक के परिजनों और आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने मौत को संदेहास्पद बताया है। उन्होंने कहा है कि जब तक इस मामले में जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। आदिवासी प्रमुखों ने दी आंदोलन की चेतावनी आदिवासी प्रतिनिधि सुमेर सिंह नाग, कन्हैया उसेंडी, गौतम कुंजाम और तुषार ठाकुर ने कहा कि अगर इस मामले की सही जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि गृह विभाग 7 दिनों के भीतर इस घटना की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाए। ऐसा न होने पर वे जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
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