दतिया में दीपावली पर ठाकुर जी की जुआ लीला:शेष शैय्या पर भक्तों को मिलेंगे शयन रूप के दर्शन
दतिया के ठाकुर श्री बड़े गोविंद मंदिर में दीपावली से भगवान की अनोखी जुआ लीला शुरू हो गई है। यह परंपरा, जिसे समाज में आमतौर पर बुराई माना जाता है, यहां भक्ति और उत्सव का रूप ले लेती है। मान्यता है कि दीपावली की रात ठाकुर जी अपनी प्रिया संग चौपड़ खेलते हैं और पूरी रात चौसर खेलने के बाद वहीं शेष शैय्या पर विश्राम करते हैं। अगले दिन, प्रतिपदा की सुबह भक्तों को भगवान के इसी शयन रूप के दर्शन कराए जाते हैं। मंदिर के पुजारी पं. मनीष गोस्वामी के अनुसार, यह सदियों पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपनी लीलाओं के दौरान जुआ खेलकर संसार को यह संदेश दिया था कि जीवन में हार-जीत दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए। दीपावली की रात मंदिर में विशेष आयोजन किया गया था। ठाकुर जी को प्रिया संग चौपड़ पर विराजमान कराया गया और पूरे मंदिर को फूलों तथा दीयों से सजाया गया। भक्तों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई थी। परंपरा के अनुसार, प्रतिपदा के दिन भक्त मंदिर के चबूतरे पर पाशे फेंकते हैं। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है। कुछ श्रद्धालु इसे धार्मिक परंपरा मानकर दांव लगाते हैं, वहीं कुछ पुराने व्यापारी और बुजुर्ग इसे सामाजिक रीति के रूप में निभाते हैं। एक समय था जब दीपावली की रात शहरभर में जुआ की फड़ें लगती थीं, लेकिन अब प्रशासनिक सख्ती के कारण यह परंपरा केवल धार्मिक स्वरूप में सीमित हो गई है। इसके बावजूद, बड़े गोविंद मंदिर में ठाकुर जी की यह जुआ लीला आज भी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
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