DGP कार्यालय से अटैच किए गए कप्तान हेमराज मीणा:पुलिस कस्टडी से फरारी वीआईपी ट्रीटमेंट गो तस्करी रोकने में नाकाम साबित हुए कप्तान

Sep 18, 2025 - 13:29
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DGP कार्यालय से अटैच किए गए कप्तान हेमराज मीणा:पुलिस कस्टडी से फरारी वीआईपी ट्रीटमेंट गो तस्करी रोकने में नाकाम साबित हुए कप्तान
जून 2024 में आजमगढ़ के पुलिस कप्तान का कर संभालने वाले हेमराज मीणा जिले में कानून का राज स्थापित करने में पूरी तरह से असफल साबित हुए। इस दौरान जिले में गोकशी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई। जिन थानेदारों को गोकशी रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह भी ऐसे लोगों से मिले हुए नजर आए। यही कारण है कि जिले में लगातार गोकशी की घटनाएं होती रही और पुलिस इन घटनाओं पर मिट्टी डालती रही। इसके साथ ही जिले में पुलिस कस्टडी से फरारी का मामला हो पुलिस पर हमले का मामला हो और अपराधियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने का मामला हो, पुलिस कस्टडी में ही हत्या के आरोपियों द्वारा पुलिस को गाली दिए जाने का मामला हो सभी मामलों पर आजमगढ़ की पुलिस बैकफुट पर ही नजर आई। इस दौरान बरदह थाने के प्रभारी के ग्रामीणों द्वारा लाठी डंडे से पिटाई का वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसमें जिस तरह से पिटाई की गई थी। उस मामले में भी पुलिस ने जिस तरह की कार्रवाई अपेक्षित थी। उस तरह की कार्रवाई नहीं की यही कारण है कि जिले की जनता में पुलिस को लेकर काफी गुस्सा भी है। 25 जून 2024 को शासन ने हेमराज मीणा को आजमगढ़ का पुलिस कप्तान बनाया था और 27 जून को कार्यभार संभाला था। पुलिस कस्टडी से फरार हुआ था 25000 का इनामी आजमगढ़ जिले में 15 फरवरी 2021 को बसपा नेता कमालुद्दीन हत्याकांड के जी आरोपी मुस्तफिज हसन और बाबू को गुजरात से गिरफ्तार करके आजमगढ़ लाया गया था। वहीं आरोपी आजमगढ़ पहुंचने पर पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था ऐसे में इस मामले में भी साजिश की बू आई थी। जून में की गई थी थाना प्रभारी की पिटाई जून 2025 में आजमगढ़ जिले के बरदह थाने के प्रभारी राजीव कुमार सिंह की ग्रामीणों द्वारा दो पक्षों का विवाद सुलझाने जाने पर लाठी डंडे से जमकर पिटाई का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में भी जिले के पुलिस कप्तान को आरोपियों के विरुद्ध जो कार्रवाई करनी थी। उस तरह की कार्रवाई नहीं की गई। जिसे समझा जा सकता है कि हेमराज मीणा के कार्यकाल में आरोपियों के मंसूबे कितने मजबूत थे। लगातार मिलती रही गोकशी की शिकायतें आजमगढ़ जिले के बॉर्डर वाले थाना क्षेत्र में लगातार वह किसी की शिकायत मिलती रही और कई घटनाएं सामने भी आई। ऐसे में वह तस्करी में लिप्त अपराधियों के विरुद्ध जिस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए थी। वैसी कार्रवाई पुलिस ने नहीं की यही कारण है कि 15 महीनो में गो तस्करों के हौसले बुलंद रहे। पुलिस कस्टडी में आरोपी ने दी थी पुलिस को गाली आजमगढ़ जिले के जीयनपुर थाना क्षेत्र में लोको पायलट दुर्गेश हत्याकांड के आरोपी ज्ञानेंद्र मिश्रा का कोर्ट परिसर का एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा था। वायरल वीडियो में जिस तरह से पुलिस का स्टडी में आरोपी थाने के प्रभारी और क्षेत्राधिकारी के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। इसके साथ ही जिस तरह से पुलिस कप्तान हेमराज मीना की चर्चा करते हुए आरोपी कह रहा था कि कप्तान इन्हें नापने जा रहे थे लेकिन हमने बचा लिया। इस बात से साफ जाहिर हुआ कि जिले के पुलिस कप्तान किस तरह से आरोपियों से मिले हुए थे। ऐसे में लगातार जिले की मिल रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए शासन ने आजमगढ़ पुलिस कप्तान को जिले से हटाकर सीधे डीजीपी कार्यालय से अटैच कर दिया।

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