आजाद ने ओरछा में हरिशंकर ब्रह्मचारी बनकर अज्ञातवास काटा था:जयंती पर सातार तट पर बच्चों ने चित्रकला और कविताओं से दी श्रद्धांजलि

Jul 23, 2025 - 21:20
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आजाद ने ओरछा में हरिशंकर ब्रह्मचारी बनकर अज्ञातवास काटा था:जयंती पर सातार तट पर बच्चों ने चित्रकला और कविताओं से दी श्रद्धांजलि
ओरछा के ऐतिहासिक सातार तट पर चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर विशेष कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत आजाद की प्रतिमा और आजाद कुटी पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी गई। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने बच्चों में आजाद जैसा साहस और देशप्रेम जगाने का आह्वान किया। कलेक्टर लोकेश जांगिड ने देशभक्ति को कर्म में दिखाने पर जोर दिया। इस दौरान एसपी डॉक्टर राय सिंह नरवरिया भी मौजूद रहे। बाल आजाद प्रतियोगिता में सिद्धार्थ जांगिड, मृदुल, विराट सिंह चौहान, साकेत पटेरिया और हिमांशु केवट विजेता रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में यश राज जैन, शिवांश, मन्नत गुप्ता, पिंकी केवट, रितिका सोनी और खुशबू अहीरवार ने पुरस्कार प्राप्त किए। सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 'एक पेड़ भारत मां के नाम' अभियान के तहत पौधे भी लगाए गए। ओरछा पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन सुमित सिंह और अनुभवी शर्मा ने किया। दिन में बच्चों को पढ़ाते, रात में क्रांतिकारी गतिविधियों करते बता दें कि सातार नदी के तट पर स्थित यह स्थल चंद्रशेखर आजाद का अज्ञातवास स्थल रहा है। काकोरी कांड के बाद 1929 से 1931 तक आजाद ने पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से यहां निवास किया। दिन में वे बच्चों को पढ़ाते और पूजा करते, जबकि रात में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करते थे। 1980 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यहां आकर आजाद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया था।

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