मानसून में 15% बढ़ जाते हैं ब्रेन इंफेक्शन के केस:नेशनल  कांफ्रेंस 'आईडीकॉन' में एक्सपर्टस बोले- बिना पीडियाट्रिशियन, प्रॉब्लम को समझे एंटीबायोटिक्स देना खतरनाक

Jul 20, 2025 - 11:53
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मानसून में 15% बढ़ जाते हैं ब्रेन इंफेक्शन के केस:नेशनल  कांफ्रेंस 'आईडीकॉन' में एक्सपर्टस बोले- बिना पीडियाट्रिशियन, प्रॉब्लम को समझे एंटीबायोटिक्स देना खतरनाक
बच्चों में ब्रेन इन्फेक्शन सामान्य बुखार की तरह शुरू होकर तेजी से गंभीर रूप ले लेते हैं। इसलिए इसे पकड़ना और समय पर इलाज करना कठिन होता है। मानसून में मच्छर और कीड़ों के काटने से इसका खतरा बढ़ जाता है इसलिए बच्चों को मच्छरों से बचाना जरूरी है। यह नवजात शिशुओं से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों तक में हो सकता है। मानसून में इस ब्रेन इन्फेक्शन के केस 15% तक बढ़ जाते हैं। यह बात कोलकाता के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ में प्रोफेसर जयदीप चौधरी ने शनिवार को इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा “EASE मॉड्यूल” (Encephalitis Awareness Study Evaluation) विषय पर दो दिनी जोनल कॉन्फ्रेंस आईडीकॉन के दौरान कही। ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. केके अरोरा ने बताया कि सेंट्रल जोन की कॉन्फ्रेंस का यह चौथा साल है। डॉ बी.सी छापरवाल के नाम से ऑरेशन भी करते हैं। इस कॉन्फ्रेंस में देश भर से 250 डेलीगेट्स और 40 से ज्यादा स्पीकर्स आए हैं। पहले दिन हुए पांच सेशंस में प्रीवेंशन, डायग्नोसिस, इन्वेस्टिगेशन और ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी दी गई। वैक्सीनेशन और मेडिसिन की गाइडलाइन को लेकर जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही पहले दिन न्यूरो इनफेक्शन पर वर्कशॉप भी हुई। ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. पीजी वालवेकर ने कहा कि कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य बच्चों में इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) जैसे जटिल संक्रमणों की पहचान, इलाज और रोकथाम पर जागरूकता फैलाना है। सेक्रेटरी डॉ. सुनील आर्य और डॉ. विवेक पाठक ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत आईएपी अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. नीलम मोहन, कोषाध्यक्ष डॉ. अतनु भद्र सहसचिव डॉ रुचिरा गुप्ता की उपस्थिति में हुई। डॉ. भास्कर शेनॉय, चेयरपर्सन इलेक्ट डॉ. संजय गोरपोडे और सचिव डॉ. चेतन त्रिवेदी भी उपस्थित थे। 90% बच्चे इन्फेक्शन के शिकार डॉ. अरोरा ने बताया बच्चों की बीमारी के मामले में 90% कैसे इन्फेक्शन से जुड़े होते हैं। डिफरेंशियल डायग्नोसिस जरूरी है। ताकि पता लग पाएं कि बच्चे को वायरस, फंगस या बैक्टीरिया किस चीज का इन्फेक्शन है। इससे एंटी बायोटिक्स का मिस यूस रोका जा सकता है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ फर्स्ट लाइन एप बनाया है, जिसकी मदद से डॉक्टर सही दवाइयों और उनकी उचित मात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ताकि ड्रग एब्यूज से बचा जा सकें। एंटी बायोटिक्स के एब्यूज से बचना जरूरी तमिलनाडु के सरकारी कॉलेज से आए डॉ. सिंगारवेलु कहते हैं कि बहुत से पीडियाट्रिशियन बिना प्रॉब्लम को समझे एंटीबायोटिक्स देने लगते हैं। इससे कई तरह के खतरे होते हैं। कई बार डॉक्टर भी नहीं समझ पाते कि इन्फेक्शन का कारण क्या है? इसे में सही समय पर जांच करवाना जरूरी है। डिफरेंशियल डायग्नोसिस जरूरी है, ताकि पता लग पाएं कि बच्चे को वायरस, फंगस या बैक्टीरिया किस चीज का इन्फेक्शन है। इससे एंटी बायोटिक्स का मिस यूस रोका जा सकता है।

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