इंदागांव:दो माह में खुदकुशी की 18 कोशिशें, 3 मौतें वजह- कच्ची शराब जिसमें यूरिया-धतूरा की मिलावट
रायपुर से गरियाबंद, मैनपुर को पार करने के बाद जैसे ही हम इंदागांव पहुंचे वहां अजीब सा सन्नाटा मिला। आमतौर पर गांव के लोग सड़क किनारे, चौपाल या रंगमंच के पास जरूर मिलते हैं। लेकिन यहां की बड़ी आबादी घरों से कम ही बाहर निकल रही है। गांव की आबादी करीब 3500 है। लेकिन सभी महिलाएं और बुजुर्ग घरों में ही रहकर अपने बच्चों पर नजर रख रहे हैं। वजह यह पिछले दो महीने में 18 लोग आत्महत्या की कोशिश कर चुके हैं। तीन की तो मौत भी हो गई। ऐसे में हर घर में डर का माहौल है। घरों में मौजूद महिलाओं ने बताया कि दिनभर सब अच्छा रहता है लेकिन शाम होते तक लोग नशा कर लेते हैं। इसके बाद वो रस्सी, चादर, दुपट्टे जैसी चीजों को घूर-घूर कर देखते हैं। बार-बार पूछने पर बोलते कि मन कर रहा फंदा लगा लूं। इतने लोग आत्महत्या की कोशिश कर चुके हैं कि अब दिलों में डर सा बैठ गया है। इसलिए घर में खासतौर पर युवक-युवतियों से नजर हटाने का मन नहीं करता। कब-कौन-क्या कर ले कोई भरोसा नहीं। भास्कर ने ग्राउंड पर जाकर जो वजह पता की और एक्सपर्ट से इसे लेकर बात की तो पता चला कि पहले से अगर कोई स्ट्रेस सिंड्रोम से गुजर रहा है और शराब में धतूरा जैसी चीजों का सेवन करता है तो ऐसा संभव है। आत्महत्या की कोशिश करने वालों को बचाना भी इस गांव में मुश्किल काम है। क्योंकि गांव के दोनों ओर 40-40 किमी तक कोई अस्पताल नहीं है। एक ओर से जाने पर देवभोग और दूसरी ओर से जाने पर मैनपुर अस्पताल जाना पड़ता है। दोनों गांव की दूरी इंदागांव से कम से कम 40 किमी है। इंदागांव में बड़ी आबादी गोंड, भुजिया और कमार जाति वालों की है। इसलिए राज्य सरकार ने इस गांव को आदिवासी संरक्षित गांव घोषित किया है। आदिवासियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से नियमानुसार इस विशेष जाति के लोग 5 लीटर कच्ची शराब अपने घरों में रख सकते हैं। लोग इसी नियम का फायदा उठाते हैं। पांच लीटर के आड़ में मनमर्जी से शराब बनाई और बेची जा रही है। गांव के दर्जनों लोगों से बात की तो पता चला कि गांव में नशा बेहद हावी है। 750 एमएल शराब 100 रुपए में बेची जाती है। जो गिलास में शराब लेना चाहे उसे 50 रुपए में देते हैं। यही कच्ची शराब लोगों के दिमाग पर बुरा असर कर रही है। इस वजह से लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। नशा दिमाग में हावी होता है तो आत्महत्या की कोशिश करते हैं। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. मिथुन दत्ता, मनोचिकित्सक और काउंसलर बार-बार कच्ची शराब पिए तो खतरा
कई निजी और शासकीय अस्पताल में अपनी सेवाएं दे चुके मनोचिकित्सक औ काउंसलर डॉ. मिथुन दत्ता ने बताया कि कच्ची शराब जिसमें धतूरा और दूसरी चीजें मिली हुई हो उसका लगातार सेवन करने के बाद व्यक्ति मानसिक संतुलन खोता रहता है। किसी तरह का स्ट्रेस हो और उस पर कच्ची शराब पीते ही रहे तो लोग आत्महत्या के लिए आसानी से प्रेरित हो जाते हैं। ऐसे लोगों को समझाने के साथ ही उन्हें शराब से दूर रखना ही बड़ा इलाज होगा। केस स्टडी -जिनकी मौत हुई, उन घरों में लड़ाई-झगड़े या किसी चीज की कमी जैसी कोई बात नहीं घर में किसी चीज की कमी नहीं आत्महत्या करने वाले 20 साल के कमल यादव के पिता देवलाल यादव बताते हैं कि हमारे घर में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है। बेटे ने जिस दिन सुसाइड किया था उस दिन दिनभर काम करता रहा। ऐसा लगा नशा भी किया है। रात में बाथरूम जाने से भी डर रहा था। शराब पी और फंदे पर झूल गए
तीन लड़कों के पिता 42 साल के गजेंद्र यादव सुबह से रात तक पड़ोसी के घर में हो रही शादी से बेहद खुश थे। लेकिन रात को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके बेटे नरेश, गुलशन और मेघन यादव ने बताया कि ऐसी कोई बड़ी परेशानी नहीं थी जिसकी वजह से आत्महत्या कर लें।
ओडिशा से रोज आना-जाना
इंदागांव से 2 किमी जंगल पार करते ही ओडिशा की सीमा शुरू हो जाती है। यह एक बैरियर लगाया गया है, लेकिन नाम का। ओडिशा के गांव कोतलू में एक शराब भट्ठी है। इस भट्टी में हर तरह की शराब मिल रही है। ओडिशा से इंदागांव और इंदागांव से ओडिशा रोजाना दर्जनों लोग आना-जाना करते हैं। वे अपने शराब भी रखते हैं। इंदागांव की शराब वहां और वहां की शराब यह बेची जाती है।
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