बड़वानी में नदियों को बचाने का संकल्प:अधिकारियों से 5 घंटे विस्थापितों से की बात; मेधा पाटकर बोलीं- आज तक नहीं हुआ पुनर्वास

Sep 28, 2026 - 19:39
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बड़वानी में नदियों को बचाने का संकल्प:अधिकारियों से 5 घंटे विस्थापितों से की बात; मेधा पाटकर बोलीं- आज तक नहीं हुआ पुनर्वास
बड़वानी में राष्ट्रीय नदी घाटी मंच और नर्मदा बचाओ आंदोलन ने नदियों को बचाने का संकल्प लिया। सोमवार को राजघाट कुकरा नर्मदा किनारे कार्यक्रम हुआ। इसके बाद भू-अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी कार्यालय में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक 5 घंटे चर्चा चली। मेधा पाटकर ने कहा कि हजारों विस्थापितों को आज भी पुनर्वास नहीं मिला, वे टीनशेड में रहने को मजबूर हैं। इस दौरान भू-अर्जन अधिकारी भूपेंद्र रावत और एनवीडीए अधिकारियों से बात हुई। आंदोलनकारियों ने नर्मदा घाटी के विस्थापितों की समस्याओं, अवैध रेत खनन और पुनर्वास में गड़बड़ी बताई। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। आंदोलन से जुड़े राहुल यादव और कमला यादव ने बताया कि 28 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर नदी घाटी मंच की ओर से नदियां बचाने का आह्वान होगा। भूपेंद्र रावत ने बताया कि पुनर्वास स्थलों में दिए प्लॉट की रजिस्ट्री और विवादित पट्टों के नामांतरण पर चर्चा हुई। विवादित पट्टों पर सुनवाई कर निराकरण होगा। उन्होंने बताया कि न्यायालयीन आदेशों का पालन हो, अवैध रेत खनन रोका जाए, उपनदियों में उद्योगों का जहर आने से रोका जाए, क्रूज जैसी पर्यटन योजना से नदी बरबाद करने पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो। शासन बिना विस्थापन के जल-जंगल-जमीन का नियोजन करे और ग्रामसभा को लोकसभा से ऊंचा मानकर स्वशासन व्यवस्था लागू करे। जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए। 28 सितंबर 1989 को हरसूद में देशभर के 250 संगठनों के 35000 लोग जुटे थे, जिसमें सुंदरलाल बहुगुणा, बाबा आमटे, स्वामी अग्निवेश जैसे नेता शामिल थे। वहीं से जनविकास की मांग उठी थी।

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