जमीन घोटाले में 9 अभियुक्त FIR रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे:संभल में 101 करोड़ की 38 बीघा जमीन हड़पने का मामला, आज सुनवाई
संभल में 101 करोड़ रुपये की 38 बीघा ग्रामसभा भूमि हड़पने के मामले में 31 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में मां-बेटों सहित नौ अभियुक्तों ने एफआईआर रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर शुक्रवार दोपहर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या 47 में सुनवाई होगी। महिला इफतआरा की याचिका कोर्ट संख्या 49 में स्थानांतरित कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (वर्तमान में शाहजहांपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त) राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, हालांकि अन्य किसी अभियुक्त की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। याचिका दायर करने वालों में इफतआरा पत्नी स्व. गुलाम साबिर, शाकिर अली व शारिक अली पुत्र स्व. गुलाम साबिर (निवासी मौहल्ला नवादा, सरायतरीन, थाना हयातनगर), मौहम्मद मुजाहिद पुत्र मौहम्मद हशमत (निवासी मौहल्ला व थाना रायसत्ती), हरजीत सिंह पुत्र धर्म सिंह (निवासी हल्लू सराय), शारिक (निवासी चौधरी सराय कोतवाली संभल), प्रदीप कुमार पुत्र महेंद्र प्रकाश अग्रवाल (निवासी अरविंद नगर धोनड़ा नई दिल्ली), ममदूत आलम पुत्र मकसूद हुसैन (निवासी गांव बेहटा सरथल, थाना सोनकपुर, जनपद मुरादाबाद) और धर्मेंद्र वर्मा पुत्र वांके लाल (निवासी सुल्तानपुर नई दिल्ली) शामिल हैं। यह पूरा मामला संभल तहसील के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्तगोसाईन में मुरादाबाद रोड पर स्थित पांच गाटा संख्या 206, 207, 238, 242/378, 279 से संबंधित है। डीएम अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने 28 जून को इस बेशकीमती जमीन का निरीक्षण किया था। इसके बाद 29 जून को लेखपाल स्पर्श गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने 31 नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। 1 जुलाई को सीओ ने लेखपाल स्पर्श गुप्ता के साथ मिलकर मुक्त कराई गई भूमि का नक्शा तैयार किया और संबंधित बयान दर्ज किए। इस विवाद की जड़ थाना रायसत्ती क्षेत्र के मौहल्ला मियां सराय निवासी सईदुल रहमान द्वारा 12 जुलाई 1967 की एक पट्टे की रसीद को आधार बनाना है। जब पालिका ने इस रसीद को नहीं माना, तो मामला चकबंदी कोर्ट में चला गया। उस समय तख्तगोसाईं गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। लेखपाल की जांच में दस्तावेजों की पड़ताल से यह भी सामने आया कि वर्ष 2008 में उपसंचालक चकबंदी द्वारा इस भूमि का नामांतरण एक फर्जी व्यक्ति के नाम कर दिया गया था। यह नामांतरण फर्जी पट्टे के आधार पर किया गया था, जिस पर नगर पालिका का कोई अधिकार नहीं था। विवेचक सीओ संभल कुलदीप कुमार ने बताया कि हाई कोर्ट में हमारी ओर से पैरवी की जा रही है। लेखपाल स्पर्श गुप्ता की शिकायत पर 31 लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और रिमांड लेकर पूछताछ भी की गई थी। अन्य अभी तक की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।
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