गंज शाहिदा मस्जिद को दिया रेलवे का अल्टीमेटम समाप्त:कभी भी हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, अंजुमन इंतेजामिया ने DM से की थी मुलाकात

Jun 21, 2026 - 09:29
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गंज शाहिदा मस्जिद को दिया रेलवे का अल्टीमेटम समाप्त:कभी भी हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, अंजुमन इंतेजामिया ने DM से की थी मुलाकात
वाराणसी के काशी स्टेशन की फर्स्ट इंट्री पर मौजूद मस्जिद गंज शहीदा को 13 जून को रेलवे ने एक नोटिस दिया था। इस नोटिस में मस्जिद को अवैध बताते हुए इसे 20 जून तक खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। इसकी मियाद आज पूरी हो गई। ऐसे में रेलवे कभी भी गंज शहीदा मस्जिद पर कभी भी कार्रवाई कर सकता है। इस नोटिस का जवाब अंजुमन इंतेजामिया मसजिद कमेटी ने भी दिया और बताया था की मस्जिद रेलवे के आने के पहले की है। साथ ही अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के सदस्य मुफ्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी और ज्वाइंट सेक्रटरी एसएम यासीन के साथ डीएम से मिले थे और इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। गंज शहीदा मस्जिद को 20 जून तक खाली करने का नोटिस वाराणसी के काशी स्टेशन पर मौजूद गंज शहीदा मस्जिद को 28 अगस्त 2024 को वाराणसी कोर्ट में खारिज हुए मुकदमे के आधार पर रेलवे ने एक नोटिस दी थी। रेलवे ने 13 जून की शाम एक नोटिस मस्जिद पर चस्पा किया और मस्जिद को अवैध घोषित कर दिया। इसके साथ ही मस्जिद को खाली करने का 20 जून तक का अल्टीमेटम दिया गया। नोटिस में लिखा गया था कि 20 जून के बाद रेलवे कभी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है। नोटिस में लिखा यह मस्जिद है अवैध रेलवे प्रशासन की ओर से मस्जिद गंज शहीदा पर चस्पा किए गए नोटिस में 20 जून 2026 तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि काशी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार (सर्कुलेटिंग एरिया) के पास रेलवे भूमि पर मस्जिद का निर्माण है, जो स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों में बाधा बन रहा है। नोटिस के अनुसार, इस मामले में मूल वाद संख्या 1174/1991 (अंजुमन इंतेजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) सिविल जज (जूनियर डिवीजन), वाराणसी की अदालत में लंबित था, जिसे 28 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया था। रेलवे प्रशासन ने नोटिस में कहा है कि रेलवे भूमि पर स्थित इस निर्माण को हटाने का निर्णय लिया गया है। संबंधित पक्ष को 20 जून तक स्वयं मस्जिद खाली करने और हटाने का अनुरोध किया गया है। निर्धारित समय सीमा के बाद रेलवे प्रशासन किसी भी दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने नोटिस पर उठाए सवाल इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के सचिव एस.एम. यासीन ने कहा था - मामले में अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मुकदमा अदम पैरवी (पैरवी न होने) के कारण खारिज हुआ था। उस समय हमारे अधिवक्ता रईस अंसारी की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं और बाद में उनका निधन हो गया था। इसी दौरान ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई भी अपने चरम पर थी, जिसके कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने आगे कहा- जिस नोटिस की प्रति हमें मिली है, उस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर या रेलवे की आधिकारिक मुहर नहीं है। ऐसे में इसकी वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं। 1883-84 के बंदोबस्ती नक्शे में है मौजूद एसएम यासीन ने बताया - मस्जिद गंज शहीदा 1034 ईंसवीं की बनी हुई है। इस मस्जिद में कब्रिस्तान और कई मजारें हैं जैसा की इसके नाम से पता चलता है। इसके अलावा इस मस्जिद के रेलवे के पहले से होने का पुख्ता दस्तावेज बनारस के 1883-84 बंदोबस्ती नक्शा है। जिसमें साफ मस्जिद का जिक्र है। यदि यहां मस्जिद नहीं होती तो नक्शे में मस्जिद नहीं लिखा जाता जबकि हमारे पास कोर्ट की अटेस्टेड कॉपी है। तो यह रेलवे कैसे अवैध कह रहा है। 1887 में आया काशी स्टेशन का अस्तित्व यासीन ने कहा - हमारी मस्जिद 1883-84 के बंदोबस्ती नक्शे में हैं और आप का स्टेशन ही 1887 में अस्तित्व में आया तो अब आप बताइये किसकी जमीन पर किसका अवैध कब्जा है। यह सरासर गलत है कि हम कोर्ट में केस हारे हैं। हमारा मस्जिद को लेकर कोई केस नहीं था। बगल की जमीन पर केस था। वो भी हारे नहीं है बल्कि उसे पैरवी न होने पर खारिज किया गया है। उसके अलावा साल 1967 में यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में वक्फ नंबर-81 के नाम से दर्ज हुई है। डीएम सत्येंद्र कुमार से की थी मुलाकात वाराणसी के काशी स्टेशन के रीडेवलेपिंग कार्य में आ रही मस्जिद गंज शहीदा को रेलवे की तरफ से नोटिस मिलने के बाद शहर मुफ्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमिटी के प्रतिनिधिमंडल से डीएम सत्येंद्र कुमार से मुलाकात की। इस दौरान सभी ने यह मांग किया कि मस्जिद गंज शहीदा के संबंध में डीएम द्वारा रेलवे से बातचीत कर कोई समाधान निकाला जाए क्योंकि मस्जिद काफी पुरानी और आस्था का केंद्र है। अब पाकिस्तान की इंट्री वाराणसी में 1034 ईसवीं में बनी गंज शहीदा मस्जिद पर रेलवे द्वारा ध्वस्तीकरण की नोटिस चस्पा किए जाने के बाद अब नया मामल सामने आया है। इस प्रकरण में अब पाकिस्तान की इंट्री हो गयी है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के ऑफिस के X अकाउंट से 6 घंटे पहले एक पोस्ट की गई है। जिसमें पूरे भारत और वाराणसी में 1000 साल पुरानी मस्जिद गंज शहीदा को तोड़ने की कार्रवाई को रोकने की मांग की गई है। इस ट्वीट के आने के बाद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने पाकिस्तान को मुंह-तोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि - पाकिस्तान पहले अपनी मस्जिदों की हिफाजत करे जहां हमेशा बमबारी होती है और बेगुनाह लोग मारे जाते हैं।

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