मोबाइल से सीखी तकनीक:गन्ना उत्पादन 300 से बढ़कर 500 क्विंटल पहुंचा, कबीरधाम के किसान की 2 एकड़ की खेती 6 एकड़ तक पहुंची, मुनाफा भी तगड़ा

Apr 20, 2026 - 09:35
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मोबाइल से सीखी तकनीक:गन्ना उत्पादन 300 से बढ़कर 500 क्विंटल पहुंचा, कबीरधाम के किसान की 2 एकड़ की खेती 6 एकड़ तक पहुंची, मुनाफा भी तगड़ा
कबीरधाम जिले के मजगांव निवासी किसान महाबली पटेल ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेती में नवाचार कर मिसाल पेश की है। महाबली बीते चार साल से खेती कर रहे हैं। महज दो एकड़ खुद की जमीन से शुरुआत कर आज छह एकड़ में गन्ने की सफल खेती कर रहे हैं। उनकी मेहनत और नई तकनीकों के प्रयोग से गन्ना उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। महाबली पटेल ने 2016 में करपात्री स्कूल से 12वीं पास की। पढ़ाई के बाद उन्होंने आर्मी और पुलिस विभाग में भर्ती होने की तैयारी की लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी बीच शादी हो गई, फिर उन्होंने खेती को ही मुख्य व्यवसाय बना लिया। शुरूआत में पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। इस खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही थी, जबकि बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने विकल्प के तौर पर गन्ने की खेती शुरू की। महाबली की खास बात यह रही कि उन्होंने खेती की नई तकनीकें मोबाइल के जरिए सीखीं। साथ ही उनके खेत मालिक जो कृषि विभाग से जुड़े हैं, उनसे भी समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता रहा। उन्होंने शुरुआत में सिर्फ आधा एकड़ में गन्ना लगाया था, लेकिन अच्छे परिणाम मिलने के बाद धीरे-धीरे रकबा बढ़ाते गए। महाबली बताते हैं कि पहले वे गन्ने की खेती पारंपरिक तरीके से करते थे। इसमें पौधों के बीच दूरी कम रखी जाती थी। बीज लगाने के लिए पुरानी पद्धति का ही उपयोग करते थे। इससे उत्पादन सीमित रहता था। बाद में उन्होंने गन्ने की कतारों के बीच दूरी बढ़ाने (ढाई से तीन फीट) और गेपिंग तकनीक अपनाई। इसमें पौधों के बीच उचित अंतर रखकर उन्हें पर्याप्त पोषण और धूप मिलती है। इससे गन्ने की मोटाई और वजन, दोनों बढ़ते हैं। इस बदलाव का असर सीधे उत्पादन पर पड़ा। पहले जहां एक एकड़ में 300 क्विंटल गन्ना मिलता था, अब वही उत्पादन बढ़कर 500 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। गन्ने की मोटाई और गुणवत्ता में भी काफी सुधार आया है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिल रही है। महाबली ने बताया कि गन्ने की खेती में कतार से कतार की दूरी 2.5 से 3 फीट रखना, समय पर सिंचाई, संतुलित उर्वरक का उपयोग और खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है। गेपिंग तकनीक अपनाने से पौधों की संख्या संतुलित रहती है। उत्पादन में 20-30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। धान की तुलना में गन्ना नकदी फसल है, जिसमें सही प्रबंधन से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। हालांकि इसमें शुरुआती लागत अधिक होती है, लेकिन उत्पादन और बाजार मूल्य को देखते हुए यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि किसान अगर नई तकनीक अपनाए, जानकारी हासिल करे और पारंपरिक सोच से आगे बढ़े तो कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन और आय संभव है। महाबली पटेल- मोबाइल नंबर: 91311-63687

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