20 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में आज फैसला:11000 पन्नों की CBI चार्जशीट में अमित जोगी पर भी चार्ज, पहले बरी,हाईकोर्ट में फिर खुला केस

Apr 2, 2026 - 09:40
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20 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में आज फैसला:11000 पन्नों की CBI चार्जशीट में अमित जोगी पर भी चार्ज, पहले बरी,हाईकोर्ट में फिर खुला केस
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आज यानी गुरुवार को अंतिम सुनवाई होगी। इसके लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच गठित की गई है। मामले में सीबीआई ने 11000 पन्ने की जांच रिपोर्ट पेश की है, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी चार्ज लगा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले को हाईकोर्ट में फिर से खोला गया है। इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की थी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच में सतीश जग्गी, सीबीआई, राज्य सरकार और अमित जोगी के वकील मौजूद रहे। बुधवार को केस की सुनवाई के दौरान अमित जोगी के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें केस की फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसलिए जवाब देने के लिए समय दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया और सीबीआई के वकील को निर्देश दिया कि फाइल तुरंत उपलब्ध कराई जाए। CBI की जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें दरअसल पहले सीबीआई ने इस हत्याकांड में अमित जोगी के साथ ही 29 लोगों को आरोपी बनाया था। उनमें से 28 को सजा मिली और 1 अभियुक्त अमित जोगी बाइज्जत बरी कर दिए गए थे। ऐसे में अब दोबारा केस खुलने के बाद सीबीआई की 11000 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हुई है। हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके। हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, लेकिन अब केस रिओपन होने के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि अमित जोगी को जमानत लेनी होगी। 2003 में गोली मारकर की गई थी हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। सतीश जग्गी का आरोप- तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। हत्याकांड में 28 लोग पाए गए दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे। 2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला:जोगी बोले- 11000 पन्नों का केस, कॉपी तक नहीं; सतीश बोले- ये एक बेटे की लड़ाई छत्तीसगढ़ के 23 साल पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। 2003 में कांग्रेस नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी, जिसमें कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर…

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