वन नेशन, वन इलेक्शन विकसित भारत की नींव:मुरैना में भाजपा जिलाध्यक्ष बोले- प्रशासनिक खर्च कम करेगा, लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी; ऐतिहासिक कदम

May 5, 2025 - 16:41
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वन नेशन, वन इलेक्शन विकसित भारत की नींव:मुरैना में भाजपा जिलाध्यक्ष बोले- प्रशासनिक खर्च कम करेगा, लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी; ऐतिहासिक कदम
मुरैना भाजपा जिलाध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने वन नेशन, वन इलेक्शन को चुनावी सुधार और विकसित भारत की आधारशिला बताया। रेस्ट हाउस में उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हिस्सा है। लोकतंत्र को मजबूत और प्रशासनिक खर्चों को कम करने यह ऐतिहासिक कदम है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि एक देश, एक चुनाव सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के सुनियोजित और सशक्त भविष्य की रूपरेखा है। यदि देश में सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे भारत की राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 1.5 प्रतिशत की वृद्धि संभव है। साल 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार यह वृद्धि लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपए की होगी, जो कि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट का लगभग आधा और शिक्षा बजट का एक तिहाई है। लगातार चुनाव से प्रशासनिक मशीनरी पर दवाब कुशवाह ने कहा कि लगातार चुनावी चक्र के कारण प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव बढ़ता है और विकास कार्यों में रुकावट आती है। एक साथ चुनाव से न केवल निवेश वातावरण बेहतर होगा, बल्कि प्रशासनिक लागत भी कम होगी, जिससे देश का आर्थिक संतुलन सुदृढ़ होगा। योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ता असर इस अवसर पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं वन नेशन वन इलेक्शन के जिला प्रभारी संजय शर्मा ने भी विचार साझा करते हुए कहा कि भारत में साल भर कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं, जिससे विकास कार्य रुक जाते हैं। आदर्श आचार संहिता के चलते योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा पड़ जाता है। यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो सरकारी संसाधनों का दोहन रुकेगा और विकास को नई गति मिलेगी। यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत लोकतंत्र और समावेशी विकास का मंच है। उन्होंने सभी देशवासियों से अपील की कि वे इस पहल को समझें और इसका समर्थन करें ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सपना साकार हो सके। 1.5 लाख करोड़ की होगी बचत भाजपा जिला सह मीडिया प्रभारी संजय डंडोतिया ने बताया कि अगर देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो इससे अनुमानित 1.5 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी, जो देश के शिक्षा और स्वास्थ्य बजट का लगभग 50% है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर लोगों को जागरूक करने के लिए जिले भर में संगोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

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