शंकराचार्य निश्चलानंद बोले-तामझाम के कारण रोके गए अविमुक्तेश्वरानंद:दुर्ग में कहा-मामले को गलत तरीके से पेश किया गया, हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं

Jan 29, 2026 - 09:04
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शंकराचार्य निश्चलानंद बोले-तामझाम के कारण रोके गए अविमुक्तेश्वरानंद:दुर्ग में कहा-मामले को गलत तरीके से पेश किया गया, हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग आए हैं। इस दौरान स्वामी निश्चलानंद ने गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य को लेकर कहा कि स्नान के लिए नहीं रोका गया था, बल्कि तामझाम और अव्यवस्था के कारण उन्हें रोका गया। स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि मामले को गलत तरीके से पेश किया गया। हिंदू राष्ट्र का विचार किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए है। सनातन धर्म दुनिया को शांति, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग आए हैं। वे यहां भक्तों से मिलेंगे और आध्यात्मिक ज्ञान पर प्रवचन देंगे। यह कार्यक्रम दुर्ग जिले के अंडा गांव में आयोजित किया जा रहा है। पहले देखिए ये तस्वीरें- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ा बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। इस दुख की भरपाई पता नहीं कौन सा नेता आएगा कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी। जिन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान किया है, उन्हें औकात दिखानी होगी। उन्होंने कहा- कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता। अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। वकील गौरव द्विवेदी ने चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा। अभी 2 स्नान बचे हैं। माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)। यानी विवाद के कारण शंकराचार्य ने माघ मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य का प्रशासन से विवाद हुआ, फिर वे बिना स्नान किए लौट गए। इसके बाद उन्होंने बसंत पंचमी के दिन भी स्नान नहीं किया था। अब वे बाकी दोनों स्नान में भी शामिल नहीं होंगे। अब तक क्या हुआ, जानिए- 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11 दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया। प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी। शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया। अब जानिए कि मौनी अमावस्या के स्नान के वक्त क्या हुआ था... 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। इसके बाद से वह संगम के तट पर धरना दे रहे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए- शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंटा-

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