इम्युनिटी कमजोर तो सबसे आम वायरस भी जानलेवा:पार्वो वायरस B19 से कुछ मरीजों में दिमागी सूजन यानी इन्सेफलाइटिस के केस मिले
ज्यादातर लोग जीवन में कम से कम एक बार पार्वो वायरस B19 नाम के वायरस के संपर्क में आते हैं। आम हालात में यह गंभीर नहीं होता, लेकिन एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने पाया कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यही वायरस दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे इन्सेफलाइटिस कहते हैं। इन्सेफलाइटिस में मरीज तेज बुखार, सिर दर्द, दौरे और भ्रम जैसे लक्षणों से जूझ सकते हैं और कई बार हालत जानलेवा भी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि लगभग 100 में 3 मरीजों में इस वायरस की मौजूदगी मिली, जिन्हें अक्सर डॉक्टर पहचान ही नहीं पाते। एम्स भोपाल की लेटेस्ट रिसर्च से खुलासा हुआ कि पार्वो वायरस B19 एक आम वायरस है, लेकिन दुर्लभ परिस्थितियों में इन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इन्सेफलाइटिस दिमाग में सूजन की स्थिति होती है। कभी-कभी इससे स्थायी दिमागी नुकसान या मृत्यु तक हो सकती है। 30 साल के डेटा का किया विश्लेषण
इस रिपोर्ट में बीते 30 सालों में हुई 14 अंतरराष्ट्रीय रिसर्च को शामिल किया गया। जिनमें 3,000 से ज्यादा इन्सेफलाइटिस मरीजों की जानकारी थी। विश्लेषण में पाया गया कि लगभग 100 में 3 मरीजों में पार्वो वायरस B19 था। यह प्रतिशत कम लग सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इन मामलों की पहचान अक्सर नहीं हो पाती, जिसकी वजह से सही इलाज में देरी हो सकती है और मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इम्यूनिटी कमजोर हो तो बनता खतरा रिपोर्ट के अनुसार, पार्वो वायरस B19 कोई नया वायरस नहीं है। लगभग हर इंसान जीवन में कभी न कभी इसके संपर्क में आता है और ज्यादातर में लक्षण भी नहीं होते। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों या कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में यही वायरस खून में गड़बड़ी, त्वचा रोग या दिमागी सूजन का कारण बन सकता है। शोध में बताया गया है कि डॉक्टर अगर इस वायरस के बारे में सतर्क रहें तो कई अनजान इन्सेफलाइटिस मामलों का कारण समझा जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसे मरीज जिनमें इन्सेफलाइटिस की वजह स्पष्ट नहीं होती, उनमें पार्वो वायरस B19 की जांच की जानी चाहिए। समय पर पहचान होने से इलाज बेहतर तरीके से हो सकता है और मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इन विशेषज्ञों ने किया शोध
यह अध्ययन एम्स भोपाल के ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग की वैज्ञानिक डॉ. मेघा के. पांडे के नेतृत्व में किया गया। क्लिनिकल मार्गदर्शन में एम्स भोपाल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित अग्रवाल और अन्य शोधकर्ताओं ने सहयोग दिया। टीम में डॉ. कश्मी शर्मा, डॉ. रोहन श्रीवास्तव, डॉ. सोमेश मिश्रा, डॉ. रेखा खंडिया, डॉ. राम के. नेमा, डॉ. अश्विन राउत और डॉ. वंदना गुप्ता सहित कई वैज्ञानिक शामिल थे। इस अध्ययन में भारत के अलावा यूरोप, अमेरिका और एशिया की रिसर्च का भी विश्लेषण किया गया।
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