विधायक बरैया के बयान पर भ्रम, कांग्रेस ने किया खंडन:कहा- महिला अपमान नहीं, कुरीतियों के विरोध का संदर्भ था बयान, तोड़ा-मरोड़ा गया
विधायक फूलसिंह बरैया के हालिया बयान को लेकर शुक्रवार को दतिया में युवा कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रामू गुर्जर ने प्रेसवार्ता की। उन्होंने ने कहा कि भांडेर विधायक बरैया का बयान महिलाओं के अपमान या शोषण के समर्थन में नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों और जातिगत अन्याय को उजागर करने के संदर्भ में था, जिसे जानबूझकर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रेसवार्ता में बताया गया कि यह एक ऐतिहासिक और सामाजिक सच्चाई है कि कुछ प्राचीन व अर्ध-प्राचीन ग्रंथों एवं पुस्तकों में शूद्र, एससी, एसटी, ओबीसी और वंचित वर्गों को सेवक या दास मानने जैसी आपत्तिजनक अवधारणाएं मौजूद रही हैं। इन्हीं विचारों के आधार पर महिलाओं और कमजोर वर्गों के शोषण को सामाजिक रूप से वैध ठहराने की मानसिकता विकसित हुई। दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि ऐसी पुस्तकें आज भी खुलेआम उपलब्ध हैं और उन पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई। समर्थन नहीं, बल्कि विरोध करना चाहते थे
गुर्जर के मुताबिक विधायक बरैया का उद्देश्य इन विचारों का समर्थन करना नहीं, बल्कि इनके विरुद्ध आवाज उठाना था। उन्होंने कहा कि असली सवाल वक्तव्य देने वाले का नहीं, बल्कि उन पुस्तकों, उनके लेखकों-प्रकाशकों और उस व्यवस्था का है, जो आज भी ऐसे साहित्य पर रोक लगाने में विफल रही है। प्रेसवार्ता में डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई। कहा कि संविधान निर्माता की मूर्तियां तोड़ना, तस्वीरें जलाना और जातिगत भेदभाव से जुड़ी घटनाएं लोकतंत्र और मानव गरिमा के लिए गंभीर खतरा हैं। महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध भी उसी विकृत सोच का परिणाम हैं। इस दौरान मांग की गई कि जाति-वर्ण आधारित ऊंच-नीच, छुआछूत और महिलाओं के शोषण को वैध ठहराने वाली सभी पुस्तकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और सरकारें इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करें। प्रेसवार्ता में पूर्व युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष दतिया रविन्द्र सिंह उर्फ रामू गुर्जर ने कहा कि समाज को जातिगत नफरत और शोषण से मुक्त करने के लिए सत्य पर आधारित विमर्श और साहसिक निर्णय समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने अपील की कि जनप्रतिनिधियों के वक्तव्यों को संदर्भ सहित समझा जाए, न कि भ्रम फैलाने के लिए उनका दुरुपयोग किया जाए।
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