ए-डीसीपी लगाएंगे कोर्ट, महासमुंद होगा नया आईजी रेंज
छत्तीसगढ़ में एएसपी प्रदीप गुप्ता कमेटी की पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लेकर की गई सिफारिश को दरकिनार करते हुए शासन ने भोपाल-इंदौर के कमिश्नरी सिस्टम को मंजूरी दी है, जहां शहरी या निगम क्षेत्र में कमिश्नरी लागू है। देहात के इलाकों में ग्रामीण एसपी की पोस्टिंग की जाएगी। जबकि कमेटी ने भुवनेश्वर जैसे मजबूत सस्टिम की अनुशंसा की थी। नई व्यवस्था में संभागीय आयुक्त कार्यालय को ही पुलिस कमिश्नर ऑफिस बनाया जाएगा, जबकि ग्रामीण एसपी नवा रायपुर अटल नगर में बैठेंगे। यहां उनका खुद का सेटअप, पुलिस लाइन व फोर्स होगा। इनकी रिपोर्टिंग नए रेंज आईजी महासमुंद या बलौदाबाजार को होगी। नए सिस्टम में एडिशनल डीसीपी के दफ्तर में पुलिस कोर्ट लगाई जाएगी। यहीं धारा 151, 107, 116 के आरोपियों को पेश किया जाएगा। पहले इन आरोपियों को एडीएम/एसडीएम कोर्ट में पेश किया जाता था। बजट सत्र में संशोधन
छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में अभी अर्बन पुलिस का प्रावधान नहीं है और कहीं कमिश्नरी शब्द का उल्लेख भी नहीं है। बजट सत्र में सरकार कानून संशोधन का विधेयक लेकर आएगी। नए दफ्तर की तलाश सिविल लाइन में एडिशनल कमिश्नर का ऑफिस होगा। यहां डीसीपी और एडिशनल डीसीपी भी बैठेेंगे। मल्टीलेवल पार्किंग, पुराना पीएचक्यू और कलेक्टोरेट समेत कई जगह नए ऑफिस तैयार किए जाएंगे। भुवनेश्वर में सबसे मजबूत, एमपी में कमजोर सिस्टम नागपुर
नागपुर में 1971 से पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है। यह देश का सबसे पुराना सिस्टम है, जिसे मुंबई से अपनाया गया है। 2023 में यहां 17,297 एफआईआर दर्ज हुईं। यहां मजबूत सिस्टम है। वर्तमान में एडीजी डॉ. रविंदर सिंघल कमिश्नर हैं। भोपाल
भोपाल में नवंबर 2021 में कमिश्नरी सिस्टम लागू हुआ। आईजी हरिनारायण चारी मिश्र कमिश्नर हैं। 2023 में भोपाल में लगभग 20 हजार केस दर्ज हुए। अपराध थोड़ा बढ़ा है। यहां अधिकांश अधिकार कलेक्टर के पास हैं। पुलिस सिर्फ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के मामले देखती है। भुवनेश्वर : भुवनेश्वर में 2008 में कमिश्नरी सिस्टम लागू हुआ। पहले विधानसभा में कानून लाया गया और उसके बाद सिस्टम लागू किया गया। 2023 में यहां 12 हजार से अधिक केस दर्ज हुए। वर्तमान कमिश्नर डॉ. सुरेश देवदत्त सिंह हैं, जिनका मानना है कि अपराध कम हुए हैं। कमिश्नरी में बढ़ाना होगा फोर्स : पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में फोर्स बढ़ाने की जरूरत है। अभी रायपुर में 3,600 का बल मंजूर है, हालांकि वर्तमान में 2,750 का ही बल उपलब्ध है। यानी अभी भी 850 का बल कम है। कमिश्नरी सिस्टम में अधिकारी बढ़ने पर कर्मचारियों की ज्यादा जरूरत होगी। पुलिस का खुद का कोर्ट भी लगता है। कम से कम रायपुर में 5,000 से 6,000 का फोर्स होना चाहिए। हालांकि अभी सीएएफ और अन्य जगहों से फोर्स की पूर्ति अस्थायी तौर पर की जाएगी। भास्कर एक्सपर्ट - अन्वेष मंगलम, रिटायर्ड स्पेशल डीजी पुलिस के पास ही रहे पावर
कमिश्नरी सिस्टम दिल्ली, मुंबई या ओडिशा जैसा होना चाहिए, क्योंकि इन राज्यों में सबसे मजबूत व्यवस्था है। यहां पुलिस के पास पूर्ण अधिकार हैं और कलेक्टर केवल विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का काम करता है। पुलिस को दंडाधिकारी के अधिकार मिलने चाहिए। मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल में लागू कमिश्नरी सिर्फ नाम की है। अभी भी एसपी की तरह ही पुलिस के काम हैं। यह एक तरह से कमजोर है। रायपुर में स्टेट कैपिटल रीजन लागू होने वाला है। इससे निवेश बढ़ेगा और इसकी पहली शर्त मजबूत कानून-व्यवस्था है। जहां कानून मजबूत होता है, वहां निवेश बढ़ता है। मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए सख्त पुलिस व्यवस्था जरूरी है।
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