300 से ज्यादा हत्या करने वाले नक्सली हिड़मा की 'लव-स्टोरी':लेटर लिखकर इजहार,रिजेक्शन मिला, 2 साल बाद राजे ने हामी भरी, नसबंदी कराकर दूल्हा बना

Nov 20, 2025 - 08:53
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300 से ज्यादा हत्या करने वाले नक्सली हिड़मा की 'लव-स्टोरी':लेटर लिखकर इजहार,रिजेक्शन मिला, 2 साल बाद राजे ने हामी भरी, नसबंदी कराकर दूल्हा बना
तारीख- 18 नवंबर 2025 जगह- मारेडुमिल्ली जंगल छत्तीसगढ और आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर सुरक्षाबलों ने मोस्टवांटेड और डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का एनकाउंटर कर दिया। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के बाद फोर्स के बढ़ते दबाव के चलते पत्नी राजे सरेंडर करना चाहती थी। उसे डर था कहीं दोनों मारे न जाएं। बार-बार हिड़मा से हथियार डालने कहती रही। लेकिन पति हिड़मा नहीं माना और आखिर में दोनों एक साथ एनकाउंटर में मारे गए। 300 से ज्यादा कत्ल करने वाले खूंखार नक्सली के काले अध्याय का आखिरकार अंत हो गया। नक्सल संगठन में हिड़मा और राजे की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प रही है। हिड़मा के साथ काम किए आत्मसमर्पित नक्सली बताते हैं कि, साथी महिला नक्सली राजे ने पहले हिड़मा का प्रपोजल ठुकरा दिया था। फिर भी 2 साल तक हिड़मा ने हार नहीं मानी। बाद में राजे ने हामी भरी। नक्सल नियमों के सख्त हिड़मा ने खुद की नसबंदी करवाई और संगठन में ही शादी कर ली। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के नक्सली बाराती बने थे। हिड़मा जब बहू को लेकर अपने घर सुकमा जिले के पूवर्ती आया था तब बहू लाल जोड़े में नहीं बल्कि काली वर्दी में थी। दोनों के हाथों में हथियार थे। मां को बिना बताए शादी करने पर उसकी मां ने हिड़मा को जमकर फटकार लगाई थी। हालांकि, शादी से नाराज मां बाद में राजी हो गई थी। हिड़मा की सुरक्षा गार्ड रही एरिया कमेटी मेंबर (ACM) सुंदरी ने दैनिक भास्कर डिजिटल को यह कहानी बताई है। सुंदरी ने 2014 में सरेंडर किया था। उन्होंने कहा कि हमने लंबा समय हिड़मा और उसकी पत्नी के साथ गुजारा है। संगठन में उनकी शादी, लव स्टोरी की चर्चा रहती थी। दोनों की पहली मुलाकात कब हुई थी? हिड़मा ने राजे को कैसे प्रपोज किया था? राजे की ओर से प्रपोजल ठुकराए जाने के बाद हिड़मा ने क्या किया? राजे के प्यार स्वीकार करने के बाद हिड़मा ने क्या शर्त रखी? फोर्स के बढ़ते दबाव के बीच पत्नी राजे ने सरेंडर करने कहा, लेकिन हिड़मा ने क्यों मना कर दिया? इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए... अब जानिए दोनों की मुलाकात कैसे हुई नक्सल नियमों में सख्त और शांत बर्ताव के साथ खूंखार नेचर वाला हिड़मा लगभग 25 साल पहले संगठन की एक मीटिंग में गया था। यहां साथी नक्सली राजे भी आई हुई थी, जिसे हिड़मा दिल दे बैठा था। जब उसने मीटिंग में राजे को पहली बार देखा तब से उसे दीवाने की तरह मोहब्बत करने लगा था। उस समय राजे जगरगुंडा इलाके में ACM कैडर में थी, जबकि हिड़मा मध्यप्रदेश के बालाघाट रीजन में था। हिड़मा मीटिंग के लिए बड़े कैडर्स के साथ दक्षिण बस्तर आया था। 7 बोली और भाषा जानता था हिड़मा कोया, गोंडी, हल्बी, दोरला, हिंदी, छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी और तेलुगु जैसी भाषा और बोलियों का ज्ञान रखने वाले हिड़मा ने राजे को लव लेटर लिखा था। उसे प्रपोज किया था। हालांकि, हिड़मा की कद-काठी कम होने की वजह से राजे ने उसके प्रपोजल को ठुकरा दिया था। जिसके बाद हिड़मा का दिल टूट गया था। वो किसी न किसी तरह से उससे संपर्क करने की कोशिश करता रहता था। साथी नक्सलियों से एप्रोच लगवाता था। लगभग 2 साल बाद हिड़मा कोंटा एरिया कमेटी का सचिव बनकर दक्षिण बस्तर लौटा। यहां आने पर वह राजे से फिर संपर्क में आया। उसने राजे से दोबारा प्यार का इजहार किया। तब राजे ने उसके प्यार को कबूल लिया और शादी के लिए हामी भरी। नसबंदी करवाया, फिर शादी की हिड़मा नक्सल संगठन के नियम-कायदों को लेकर सख्त था। उसने राजे के सामने पेरेंट्स न बनने की शर्त रखी थी। उसने पहले खुद की नसबंदी करवाई। जिसके बाद प्रेमिका राजे से दक्षिण बस्तर के जंगल में ही शादी की थी। तब हिड़मा की उम्र महज 25 से 27 साल थी, जबकि राजे 20 से 22 साल की थी। उस समय बस्तर में नक्सलवाद चरम पर था। तब सलवा जुडूम का दौर भी शुरू हो चुका था। हिड़मा के कोंटा इलाके के जंगल में उसकी शादी की शहनाई बज रही थी। नक्सली गांव खाली करवा रहे थे। उस समय नक्सल संगठन में काम किए सरेंडर्ड नक्सलियों ने बताया कि हिड़मा की शादी में सिर्फ बस्तर के ही नक्सली नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के नक्सली भी आए थे। बड़े कैडर्स के नक्सली बाराती बने थे। शादी के बाद कुछ दिनों तक हिड़मा और उसकी पत्नी साथ थे। लेकिन बाद में संगठन से मिली बड़ी जिम्मेदारियों के बाद दोनों अलग-अलग इलाके में चले गए थे। बाल संघम से ACM और फिर बनी टीचर हिड़मा की पत्नी राजे उर्फ राजक्का गोलापल्ली थाना क्षेत्र के वीरापुरम गांव की रहने वाली थी। करीब 1994-95 में नक्सल संगठन में बाल संघम में शामिल हुई। 1991 में हिड़मा भी बाल संघम में भर्ती हुआ था। सन 2002-03 में राजे को जगरगुंडा एरिया कमेटी की जिम्मेदारी दी गई थी। राजे भी हिड़मा की तरह फुर्तीली और तेज दिमाग की थी। साल 2006-07 में किस्टाराम एरिया कमेटी का प्रभार मिला था। जिसके बाद साल 2009 में बटालियन मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल की शिक्षिका बनी थी। तब तक शादी के बाद हिड़मा और राजे अलग-अलग रहते थे। पार्टी मीटिंग हो या फिर अन्य किसी काम से जाना हो तो वे मिलते थे। लेकिन साल 2009 में जब हिड़मा को पहले PLGA बटालियन का उप कमांडर और फिर सैन्य बटालियन प्रभारी बनाया गया तो दोनों साथ रहने लगे। राजे भी इसी बटालियन में टीचर थी। सरेंडर करना चाहती थी पत्नी, हिड़मा नहीं माना साल 2007 से लेकर 2022 तक हिड़मा ने बस्तर में 26 से ज्यादा हमले किए और करीब 300 से ज्यादा जवानों और आम नागरिकों का कत्ल किया है। जिसके बाद इसे साल 2023-24 में नक्सल संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर बनाया गया था। नक्सलियों की बटालियन 1 में सक्रिय और हिड़मा के गार्ड रहे सरेंडर नक्सलियों की माने तो साल 2023 के बाद से फोर्स का ऑपरेशन तेज हो गया था। लगातार एनकाउंटर और सरेंडर हो रहे थे। जिससे नक्सल संगठन पर दबाव बढ़ रहा था। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के बाद से हिड़मा पत्नी को लेकर तेलंगाना चला गया था। उसकी पत्नी लगातार उससे सरेंडर करने कहती रही। लेकिन हिड़मा नहीं माना। वहीं 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले में फोर्स के साथ हुई मुठभेड़ में दोनों पति-पत्नी मारे गए। यहां नक्सल संगठन का यह ब्लैक चैप्टर क्लोज हो गया। मां की गुहार पर भी क्यों नहीं किया सरेंडर ? इसके जवाब में पूर्व नक्सली ने बताया, 'वो बहुत कट्टर और स्वाभिमानी किस्म का था। जिन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, उन्हें संगठन में गद्दार कहते हैं। वो कहता था कि मर जाऊंगा लेकिन गद्दार नहीं बनूंगा।' 'आप नहीं समझ सकते कि जिस संगठन में कोई इतनी मुश्किलें उठाकर रहा हो, फिर उसे अपना अलग रास्ता चुनने पर गद्दार कहा जाए तो कितना बुरा लगता है। संगठन में एंट्री होने के बाद आप अपने फैसले लेने के लिए आजाद नहीं रह जाते। फैसला लिया तो संगठन आपका दुश्मन बन जाता है।' ................................. इससे संबंधित ये खबरें भी पढ़ें... 01. हिड़मा की मां बोली थी- लौट आओ बेटा: पूवर्ती में कमाई करके खाएंगे-जिएंगे, 8वें दिन एनकाउंटर, बचपन में थामा हथियार, 300 से ज्यादा कत्ल "हिड़मा बेटा घर लौट आओ, कहां पर हो आ जाओ कह रही हूं। नहीं आ रहा है तो मैं कैसे करूं, कहीं आसपास रहता तो ढूंढने जाती। और क्या कहूं बेटा, आजा। यहीं पूवर्ती में कमाई करके खाएंगे और जिएंगे। जनता के साथ रहकर जी लेना, लेकिन घर लौट आ बेटा।" पढ़ें पूरी खबर 02. थ्री-लेयर सिक्योरिटी में रहने वाला नक्सली हिड़मा कैसे फंसा: मुखबिर से खबर मिली, ग्रेहाउंड फोर्स ने घेरकर मार गिराया; एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी नक्सली माड़वी हिड़मा और उसके बॉडीगार्ड बारसे देवा के आत्मसमर्पण के लिए 10 नवंबर को छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM और गृह मंत्री विजय शर्मा ने आखिरी कोशिश की थी। डिप्टी CM रायपुर से करीब 550 किलोमीटर का सफर तय कर सुकमा जिले के उस गांव पहुंचे थे, जहां हिड़मा और देवा की मां रहती हैं। पढ़ें पूरी खबर

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