मऊगंज के जिम सेंटर में 2 साल से लगे ताले:CMO बोले- चोरी की आशंका' बनी बंदी की वजह; लाखों की मशीनें खा रहीं जंग
मऊगंज में कलेक्टर निवास के ठीक सामने विधायक निधि से बना आधुनिक जिम सेंटर पिछले दो साल से बंद पड़ा है। लाखों रुपए की लागत से युवाओं को फिटनेस के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह केंद्र अब खंडर हो गया है। परिसर में उगी घास, जंग लगी मशीनें और वीरान पड़े उपकरण इसकी प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाते हैं। जनपद सदस्य शेख मुख्तार सिद्दीकी ने नगर परिषद मऊगंज पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। सिद्दीकी के अनुसार, जिम में आज भी पूरा सामान मौजूद है और कोई चोरी नहीं हुई है, फिर भी इसे बंद रखा गया है। उन्होंने कहा कि लाखों रुपए की मशीनें बिना उपयोग के पड़ी हैं, जो सरकारी संसाधनों का सीधा दुरुपयोग है। सीएमओ बोले- चोरी की आशंका' बनी बंदी की वजह यह जिम सेंटर तीन साल पहले नगर परिषद और विधायक प्रदीप पटेल की निधि से बनाया गया था। यह मऊगंज के सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल इलाके में स्थित है। इसके सामने कलेक्टर निवास, पास में न्यायाधीश और एसडीएम के सरकारी आवास, पीछे शासकीय केदारनाथ महाविद्यालय और नजदीक स्कूल हैं। इतने सुरक्षित क्षेत्र में भी जिम की अनदेखी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है। इस संबंध में सीएमओ महेश पटेल ने सेंटर बंद होने का कारण चोरी की आशंका बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चोरी को लेकर न तो कोई एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पटेल के अनुसार, बारिश के बाद लोगों ने जिम आना बंद कर दिया था और मशीनों के पार्ट्स चोरी होने लगे थे। उन्होंने बताया कि अब गार्डन विकास और चौकीदार की नियुक्ति के लिए नया एस्टिमेट तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद जिम को दोबारा खोला जाएगा। देखिए जिम की तस्वीरें... विधायक निधि के इस्तेमाल और जवाबदेही पर सवाल स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिम की सुरक्षा के लिए पहले एक चौकीदार नियुक्त किया गया था, लेकिन अब वह भी वहां मौजूद नहीं है। उपयंत्री और योजना शाखा के कर्मचारी भी इस मामले पर जवाब देने से बचते नजर आए। सुखेंद्र सिंह बन्ना ने जिम निर्माण और निधि के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि “लोगों की बात है कि विधायक ने यहां निधि लगाई, जबकि अन्य स्थानों पर उन्होंने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की। अगर सामान चोरी हुआ होता तो कार्रवाई होती, रिपोर्ट होती। अब जिम बंद है और सामान कब, कैसे और किस हाल में है-कोई जवाब देने वाला नहीं।” जिम सेंटर की यह स्थिति जनता में रोष पैदा कर रही है। लाखों की लागत से बनी सुविधा का यूं खंडहर में बदल जाना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।
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