देवा पारदी मामले में अवमानना याचिका निरस्त:कोर्ट ने CBI और राज्य से कहा- निर्देशों का पालन न करने पर अतिरिक्त आरोप पत्र दायर करें

Nov 15, 2025 - 08:43
 0  0
देवा पारदी मामले में अवमानना याचिका निरस्त:कोर्ट ने CBI और राज्य से कहा- निर्देशों का पालन न करने पर अतिरिक्त आरोप पत्र दायर करें
गुना के देवा पारदी की पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया है। देवा की मां ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 15 मई 2025 के आदेश का पालन नहीं हुआ था। हालांकि कोर्ट ने कहा कि CBI और राज्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उक्त आदेश के गैर-पालन के संबंध में अतिरिक्त आरोप पत्र दायर करेंगे। बता दें कि 15 जुलाई 2024 को बीलाखेड़ी के रहने वाले देवा पारदी (25) की शादी गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क पर होने वाली थी। 14 जुलाई की शाम को बारात के लिए निकलते समय पुलिस ने ट्रैक्टर से देवा और उसके चाचा गंगाराम को ले लिया। पुलिस ने उन्हें चोरी के मामले में कुछ बरामदगी के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस कस्टडी में मौत के बाद विरोध 14 जुलाई की शाम परिवार को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि देवा को पोस्टमॉर्टम रूम में लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि पुलिस कस्टडी में उसकी मौत हो गई। पारदी समुदाय की महिलाओं ने अस्पताल में विरोध किया। देवा की चाची और उसकी होने वाली दुल्हन ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगाने की भी कोशिश की थी। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचाया। महिलाओं का आरोप था कि म्याना थाने में देवा और उसके चाचा के साथ मारपीट की गई, जिससे मौत हुई। 17 जुलाई को पारदी महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इस मामले में म्याना थाने के 7-8 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज हुई थी।​​​​​​​ कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुई गिरफ्तारी पुलिसकर्मियों पर गैर इरादतन हत्या, मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में देवा की मां अंसुरा बाई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने में आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई तो देवा पारदी की मां हंसुरा बाई ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इस याचिका पर 23, 25 और 26 सितंबर को सुनवाई हुई। दोनों फरार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और CBI को जमकर फटकार लगाई थी। 26 सितंबर को सुनवाई के बाद 8 अक्टूबर तक का समय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम आपकी दलीलों से सहमत नहीं हैं। अगला कदम अवमानना ​​के आरोप तय करना होगा। कोर्ट के फटकार के अगले दिन SI की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के फटकार के अगले दिन ही मामले में फरार SI उत्तम सिंह की गिरफ्तारी हो गई थी। वे सरेंडर करने के लिए CBI कोर्ट पहुंचे थे, जहां पहले से मौजूद CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वहीं मामले में फरार TI संजीत मावई की 5 अक्टूबर गिरफ्तारी हो चुकी है। शिवपुरी जिले के बदरवास इलाके से उन्हें गुना पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस मामले में 8 अक्टूबर को कोर्ट में फिर सुनवाई हुई। CBI ने कोर्ट को बताया कि दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सुनवाई में न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि इतने दिनों में क्या हुआ? आप उन्हें क्यों नहीं पकड़ पाए? आपको कार्रवाई करने के लिए हमें लगभग अवमानना ​​के आरोप लगाने ही होंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए। तीन जजों की बेंच ने गिरफ्तारी का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति महादेवन ने कहा कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई की गई? इस अदालत के गिरफ्तारी के आदेश के बावजूद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी? सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हम पाते हैं कि इस न्यायालय की कठोर और सख्त टिप्पणियों के कारण गिरफ्तारी की गई है। तथ्य यह है कि 15 मई के आदेश का पालन नहीं किया गया है और केवल इस अवमानना ​​याचिका के दायर होने और इस न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों के अनुसरण में ही गिरफ्तारी हुई है। इन परिस्थितियों में हम प्रतिवादियों को निर्देश देते हैं कि वे स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि इस न्यायालय के 15 मई के आदेश के अनुपालन में चूक क्यों हुई और गिरफ्तारी केवल 27 सितंबर और 5 अक्टूबर को क्यों की गई। इस स्पष्टीकरण को पेश करने के उद्देश्य से हम मामले की सुनवाई 6 नवंबर तक स्थगित करते हैं। 6 नवंबर को CBI और राज्य ने कोर्ट में एफिडेविट फाइल किया। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 12 नवंबर तक टाल दी थी। कोर्ट ने याचिका का किया निराकरण 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) और राज्य के स्थायी अधिवक्ता ने हलफनामे पेश कर देरी का स्पष्टीकरण दिया कोर्ट ने बताया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया और तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी केवल अवमानना याचिका दायर होने और कोर्ट की टिप्पणियों के बाद ही हुई। गिरफ्तार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई मध्य प्रदेश राज्य ने अब गिरफ्तार किए गए दो अधिकारियों अधिकारियों संजीत सिंह मावई, तत्कालीन टीआई म्याना थाना और उत्तम सिंह तत्कालीन एएसआई/चौकी प्रभारी उमरी चौकी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 मई 2025 के आदेश का पालन सुनिश्चित करने और गैर-पालन के संबंध में अतिरिक्त आरोप पत्र दायर किया जाएगा। कोर्ट ने अवमानना कार्रवाई समाप्त कर दी और स्पष्टीकरण को स्वीकार किया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0