5 साल बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के पंजीयन शुरू:खंडवा से पिछली बार 8 लोग गए थे, इस बार 10 लोगों के जाने का अनुमान

Apr 27, 2025 - 10:38
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5 साल बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के पंजीयन शुरू:खंडवा से पिछली बार 8 लोग गए थे, इस बार 10 लोगों के जाने का अनुमान
पांच साल के लंबे इंतजार के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता फिर से खुल गया है। विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया भी आज से प्रारंभ हो चुकी है, जो 13 मई तक चलेगी। यात्रा के बारे में मध्यप्रदेश कैलाशी परिवार के संयोजक पीयूष शर्मा ने बताया कैलाश यात्रा आयोजन इस साल जून से अगस्त के बीच किया जाएगा। करीब 750 भारतीय श्रद्धालु इस बार पवित्र स्थल की यात्रा कर सकेंगे। खंडवा से इस बार 20 लोगों के रजिस्ट्रेशन होने के साथ 10 लोगों का यात्रा पर जाने का अनुमान है। यात्रा में 3 लाख रूपए तक का खर्च आता है उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथूला दर्रे के जरिए कुल 15 जत्थे कैलाश मानसरोवर की ओर रवाना होंगे। इनमें से 5 जत्थे लिपुलेख के रास्ते और 10 जत्थे नाथूला दर्रे के जरिये यात्रा करेंगे। हर जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे। 22 दिनों की यात्रा में 1.80 लाख से 2.85 लाख तक का खर्च आएगा। ऐसे होता है पंजीयन और चयन पासपोर्ट धारक श्रद्धालु को आधिकारिक वेबसाइट www.kmy.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन करना होता है। उसके बाद विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कंप्यूटरीकृत ड्रॉ प्रक्रिया से यात्रियों का चयन किया जाता है। जिन्हें चिकित्सा परीक्षण में पास होने के बाद ही यात्रा के लिए पात्र माना जाता है। पंजीयन के लिए यह दस्तावेज अनिवार्य यात्रा के ऑनलाइन पंजीयन के लिए भारतीय पासपोर्ट के साथ ही यात्री को अपनी व्यक्तिगत जानकारी एवं 1 फोटोग्राफ की आवश्यकता होगी। यात्रा के लिए निर्धारित उम्र सीमा 18 साल से 70 साल तक की है। अधिक जानकारी के लिए यात्रा हेल्पलाइन नंबर 94250 86007 पर संपर्क कर सकते है। शिवभक्तों में उत्साह और खुशी की लहर भारत-चीन सीमा विवाद और कोविड-19 महामारी के चलते 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी तरह ठप थी। भारत सरकार के विशेष प्रयास से यात्रा पुनः प्रारंभ हो रही है जिसका लाभ शिवभक्तों को मिलेगा। भारत सरकार ने उत्तराखंड के पारंपरिक मार्ग लिपुलेख पास पर सड़क निर्माण किया, जिससे यात्रा सुगमता से होगी। खंडवा के पूर्व कैलाश यात्री सुनंदा ढाके, अमर यादव, रामनारायण कुशवाह, बालकृष्ण पुरस्वानी, अशोक त्रिवेदी, लोकेश पालीवाल, मंगल यादव, रितेश चौहान सहित शिवभक्तों ने सरकार का आभार माना और खुशी व्यक्त की। कैलाश मानसरोवर: आस्था का केंद्र तिब्बत के क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मों में गहरी आस्था का प्रतीक है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा अपने धार्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक महत्व, नैसर्गिक खूबसूरती और रोमांचक प्रकृति के लिए जानी जाती है। भगवान शिव के निवास के रूप में हिन्दुओं के लिए अतिमहत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक महत्व रखती है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं।

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