एसडीएम के सामने गिड़गिड़ाई मां, फूट-फूट कर रो पड़ीं बेटियां:सूरजपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, सड़क किनारे बने अवैध निर्माण ध्वस्त
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में अतिक्रमण पर कार्रवाई की गई। इस दौरान एक महिला अपनी 5 बेटियों के साथ बाहर निकली और रोने लगी। जब मां रोते-रोते जमीन पर बैठ के गिड़गिड़ाने लगी तो बेटियां भी फूट-फूटकर रोने लगी। मामला, बसदेई चौक का है। सोमवार को सड़क की जमीन पर बने अवैध मकान और दुकानों को हटाने टीम पहुंची थी। जिला प्रशासन का बुलडोजर 21 अवैध निर्माणों पर चला। इस दौरान कई प्रभावित परिवारों की आंखें नम हो गई। इस दौरान कुछ स्थानीय नेता भी महिला के समर्थन में आगे आए। उन्होंने प्रशासन से कहा, इस महिला का कोई नहीं है। घर टूटने के बाद वो कहां जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन ने महिला को तीन दिन का समय दिया। बसदेई चौक पर प्रशासन ने चलाया अतिक्रमण विरोधी अभियान सूरजपुर के भैयाथान मार्ग स्थित बसदेई चौक पर जिला प्रशासन ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। सुबह 11:30 बजे 3 जेसीबी मशीनों के साथ प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सड़क किनारे बने 21 अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। इन निर्माणों में घर और दुकानें शामिल थीं। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों में अफरा-तफरी का माहौल था। लोग जल्दबाजी में अपना सामान बचाने में लगे रहे। कई परिवारों के वर्षों पुराने घर और रोजी-रोटी के साधन इस कार्रवाई में खत्म हो गए। अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने लगी महिला प्रभावितों में एक महिला और पांच बेटियों का परिवार था। महिला ने रोते हुए कहा कि, अगर मकान गिरवा दिया जाएगा तो वह बेघर हो जाएंगे। महिला एसडीएम के सामने फफक कर रोने लगी। उसने मकान को बचाने की गुहार लगाई। वहीं मां को रोता देख बेटियां भी फूट-फूटकर रोने लगी। बताया जा रहा है कि महिला का पति नहीं है। दुकानदारों ने भी कहा, रोजी-रोटी पर संकट एक प्रभावित दुकानदार ने भी बताया कि, हमारी दुकान ही हमारी रोजी-रोटी का सहारा थी। अब हम कहां जाएंगे...?" अचानक बेघर होने का दर्द असहनीय है। आजीविका का एकमात्र साधन यही दुकानें थी, और अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। नोटिस के बाद भी नहीं हटाया अतिक्रमण वहीं जिला प्रशासन के मुताबिक, बसदेई चौक पर सड़क मद की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इसे हटाने के लिए एक महीने पहले नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद बीते दिन एक और नोटिस दिया गया। अतिक्रमणकारियों को जमीन खाली करने के लिए अंतिम चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके, कई दुकानदारों और परिवारों ने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण के कारण सड़क पर जाम और यातायात की समस्या बढ़ रही थी, जिसके चलते यह कार्रवाई जरूरी थी।
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