500 में खरीदा...10 हजार में बेचा जा रहा कछुआ:चंबल-बालाघाट से मुंबई होकर बड़े शहरों तक सप्लाई; STSF की जांच में MP समेत 4 राज्यों का नेटवर्क

Sep 7, 2026 - 12:10
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500 में खरीदा...10 हजार में बेचा जा रहा कछुआ:चंबल-बालाघाट से मुंबई होकर बड़े शहरों तक सप्लाई; STSF की जांच में MP समेत 4 राज्यों का नेटवर्क
चंबल और बालाघाट की वेनगंगा नदी से निकलने वाले कछुए अब तस्करों के लिए कमाई का जरिया बन गए हैं। स्थानीय स्तर पर 500 से 900 रुपए में खरीदे जाने वाले कछुओं को इंदौर समेत मध्य प्रदेश के बड़े शहरों के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक भेजा जाता है। प्रजाति और ग्राहक की मांग के आधार पर इनकी कीमत 3 हजार से 10 हजार रुपए तक वसूली जाती है। वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) की जांच में तस्करी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में पता चला कि गिरोह पहले कछुओं को स्थानीय लोगों से खरीदता था। इसके बाद उन्हें कुछ दिनों तक सुरक्षित रखकर खरीदार तलाशे जाते थे और ग्राहक की पसंद के अनुसार सौदा तय किया जाता था। चंबल में अलग नेटवर्क की जानकारी, एसटीएसएफ तलाश में जुटी शिवाजी मार्केट स्थित फ्रिश टाउन के कर्मचारी बिलाल की रिमांड पूरी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर एसटीएसएफ को चंबल क्षेत्र में सक्रिय एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पता चला है, जिसने तस्करी के लिए अलग नेटवर्क तैयार कर रखा था। टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच में कछुए पकड़ने वालों के अलावा उन्हें खरीदने, रखने, परिवहन कराने और अंतिम खरीदार तक पहुंचाने वालों की भूमिका भी देखी जा रही है। ऐसे राज्यों तक पहुंचाए जाते थे कछुए गिरोह से जुड़े लोग चंबल और बालाघाट क्षेत्र के चुनिंदा स्थानीय लोगों के संपर्क में रहते थे। कछुए पकड़ने वाले इन्हें 500 से 900 रुपए में बेचते थे। इसके बाद नेटवर्क के दूसरे सदस्य खरीदार तलाशते और ग्राहक की मांग के अनुसार सौदा करते थे। जांच में सामने आया है कि अंधविश्वास के कारण कुछ लोग खास प्रजातियों के कछुओं के लिए ज्यादा रकम देने को तैयार रहते थे। इसी का फायदा उठाकर तस्कर इन्हें कई गुना कीमत पर बेचते थे। एसटीएसएफ को मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी मिली है। सड़क मार्ग से कछुओं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता था। मुंबई से भी अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके लिए कछुओं को बाक्स में रखकर कोरियर और बस सेवा से पार्सल के रूप में भेजा जाता था। 30 कछुओं की डील से खुलीं नेटवर्क की कड़ियां इंदौर में कछुआ तस्करी के मामले में एसटीएसएफ ने 20 अगस्त को केशव शर्मा और रोहन गौड़ को गिरफ्तार किया था। दोनों के पास से 30 कछुए मिले थे। पूछताछ में पता चला कि इन्हें करीब 40 हजार रुपए में बेचने की तैयारी थी। दोनों को पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। इसी दौरान देवास के होटल व्यवसायी रौनक जुनेजा का नाम सामने आया। एसटीएसएफ के अनुसार रौनक फरार है और उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। जांच के दौरान टीम रौनक के बहनोई कमल मेहता के घर पहुंची थी। यहां से कछुआ और तोता बरामद हुआ। कमल को सरकारी गवाह बनाए जाने की बात सामने आने के बाद उसके भी फरार होने की जानकारी है। अब खरीदारों तक पहुंच रही एसटीएसएफ एसटीएसएफ अब उन लोगों की जानकारी जुटा रही है, जो कछुए पकड़ने वालों से संपर्क करते थे और उन्हें दूसरे राज्यों तक पहुंचाते थे। साथ ही उन खरीदारों की भी पहचान की जा रही है, जो अंधविश्वास या अन्य कारणों से कछुओं के लिए हजारों रुपए खर्च करते हैं।

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