दिव्यांग बेटे को पीठ पर बैठाकर रोज स्कूल पहुंचाती मां:पढ़ाई के लिए 10 किमी का सफर; बेटे के साथ दिनभर रहती; इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग

Sep 7, 2026 - 12:10
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दिव्यांग बेटे को पीठ पर बैठाकर रोज स्कूल पहुंचाती मां:पढ़ाई के लिए 10 किमी का सफर; बेटे के साथ दिनभर  रहती; इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग
शहडोल के झींक बिजुरी इलाके के दरशिला गांव का 12वीं कक्षा का छात्र राजकुमार जायसवाल शारीरिक परेशानी के कारण ठीक से चल नहीं पाता। स्कूल जाने के लिए उसकी मां फूल कुमारी रोज उसे पीठ पर बैठाकर करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करती हैं। बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए मां पिछले दो साल से यह जिम्मेदारी निभा रही हैं। बस स्टैंड तक पीठ पर ले जाती हैं राजकुमार झींक बिजुरी के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता है। दरशिला से स्कूल करीब 10 किमी दूर है। फूल कुमारी पहले बेटे को पीठ पर बैठाकर बस स्टैंड तक ले जाती हैं। इसके बाद बस से झींक बिजुरी पहुंचती हैं और वहां भी सहारा देकर बेटे को स्कूल तक ले जाना पड़ता है। आने-जाने में करीब 50 रुपए बस किराया खर्च होता है। स्कूल में छुट्टी तक साथ रहती हैं फूल कुमारी के मुताबिक राजकुमार ने 10वीं तक गांव के पास पढ़ाई की। 11वीं और 12वीं के लिए उसे झींक बिजुरी जाना पड़ रहा है। राजकुमार खुद चल नहीं सकता, इसलिए मां उसे स्कूल पहुंचाने के बाद छुट्टी होने तक वहीं रहती हैं। इसके बाद दोनों वापस घर लौटते हैं। बेटे की पढ़ाई के लिए मजदूरी भी छोड़ी परिवार में फूल कुमारी और उनका बेटा ही हैं। बेटे को स्कूल पहुंचाने और वापस लाने में पूरा दिन निकल जाता है, इसलिए उन्हें मजदूरी का काम भी छोड़ना पड़ता है। आर्थिक परेशानी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग राजकुमार का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना हुआ है। मां के अनुसार वह करीब 80 प्रतिशत दिव्यांग है। राजकुमार चाहता है कि उसे इलेक्ट्रिक साइकिल मिल जाए, ताकि वह स्कूल आने-जाने के लिए मां पर निर्भर न रहे। फूल कुमारी ने मंत्री दिलीप जायसवाल को आवेदन दिया था और कलेक्ट्रेट में भी दस्तावेज जमा किए, लेकिन दो महीने से ज्यादा समय बाद भी सहायता नहीं मिली। पंचायत सचिव ने भी मदद की कोशिश की दरशिला पंचायत के सचिव गंगा राम ने बताया कि उन्होंने कई बार फूल कुमारी को बेटे को पीठ पर उठाकर स्कूल ले जाते देखा है। उन्होंने बुढ़ार में अधिकारियों से संपर्क कर राजकुमार की सहायता की बात रखी थी। वहां से बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र होने के कारण उसे स्कूटी नहीं दी जा सकती। 11 सितंबर के शिविर से उम्मीद अब राजकुमार और उसकी मां को 11 सितंबर को झींक बिजुरी में होने वाले जन विश्वास शिविर से उम्मीद है। जिला सामाजिक न्याय विभाग की अधिकारी प्रज्ञा मरावी ने कहा कि हितग्राही जरूरी दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचते हैं तो जांच के बाद पात्रता के अनुसार संबंधित योजना का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

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