150 साल पहले रोजगार के लिए डिग्री नहीं...हुनर जरूरी था:ग्लोबल स्किल पार्क में सीएम बोले-इस व्यवस्था ने प्रतिभाओं को रोका

Aug 20, 2026 - 19:31
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150 साल पहले रोजगार के लिए डिग्री नहीं...हुनर जरूरी था:ग्लोबल स्किल पार्क में सीएम बोले-इस व्यवस्था ने प्रतिभाओं को रोका
भोपाल के संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित 550 प्रशिक्षुओं के अभिमुखीकरण समारोह (ऑरिएंटेशन प्रोग्राम) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान के वर्ल्ड क्लास कैंपस और अत्याधुनिक अकादमिक लैब का जायजा लिया और वहां ट्रेनिंग ले रहे युवाओं से सीधा संवाद किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में युवाओं के हुनर को उद्योगों की मांग से जोड़ने के लिए कई प्रमुख कंपनियों के साथ एमओयू (MoU) भी साइन किए गए। इसी मंच से युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने रोजगार और डिग्री को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और विचारणीय बात कही। 150 साल पहले कौशल ही था स्वावलंबन का आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लगभग 150 वर्ष पहले, यानी साल 1857 के आसपास के दौर में भारत में रोजगार के लिए किसी भी तरह की डिग्री की कोई मजबूरी या अनिवार्यता नहीं थी। उस समय लोग अपनी क्षमता, व्यक्तिगत प्रशिक्षण और कौशल (कौशल विकास) के दम पर अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ते थे और आत्मनिर्भर बनते थे। समय के साथ डिग्री को ही रोजगार का मुख्य पैमाना बना दिया गया, जिसने हमारी पारंपरिक भारतीय प्रतिभाओं और हुनर के विकास में एक अदृश्य बाधा खड़ी करने का काम किया। आधुनिक दौर की चुनौती: बड़ी डिग्रियों के बाद भी युवा बेरोजगार मुख्यमंत्री ने ग्लोबल स्किल्स पार्क के शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड की सराहना करते हुए इसे आज के दौर की बहुत बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में देश के कई बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थानों से भारी-भरकम डिग्रियां हासिल करने के बावजूद अनेक युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और वे बेरोजगार भटक रहे हैं। ऐसे समय में हुनर और प्रशिक्षण पर आधारित यह संस्थान युवाओं के जीवन को एक सही और सुरक्षित दिशा दे रहा है। संत रविदास और श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के मौके पर इस संस्थान का नाम उनसे जुड़ना सौभाग्य की बात है। संत जी ने सामाजिक कुरीतियों का सामना करते हुए भी अपने हुनर और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। इसके साथ ही सीएम ने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि हम उन्हें उनकी 64 कलाओं और 14 विद्याओं की वजह से याद करते हैं। यहां तक कि उनके हाथ में दिखने वाला सुदर्शन चक्र भी वास्तव में एक अद्भुत कौशल और उन्नत तकनीक का ही प्रतीक है। एआई (AI) का दौर और मानवीय बुद्धि का संतुलन बनाना जरूरी मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलती तकनीक का है। हमें इस दौर में खुद को लगातार अपडेट रखना होगा और नई तकनीकों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि परमात्मा ने हमें जो स्वाभाविक बौद्धिक क्षमता दी है, उसका विकास भी जरूरी है। युवाओं को अपनी बुद्धि, हुनर और कड़ी मेहनत के बल पर खुद को दुनिया के सामने सिद्ध करना चाहिए क्योंकि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। सिंगापुर की तर्ज पर बना ₹1,600 करोड़ का विश्वस्तरीय ‘स्किल्स हब’ भोपाल का संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि देश का सबसे आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र है। इसकी परिकल्पना साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिंगापुर स्थित 'ITEES' भ्रमण से मिली प्रेरणा के बाद की गई थी। साल 2017 में इसकी नींव रखी गई और साल 2019 में सिटी कैंपस से शुरू हुआ यह सफर साल 2024 में 36 एकड़ में फैले मुख्य परिसर तक पहुंच गया। करीब 1600 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार इस परिसर में 80 अत्याधुनिक इंटरनेशनल लैब्स और 75 स्मार्ट क्लासरूम हैं, जहां वर्तमान में 1200 से अधिक युवा 9 उन्नत तकनीकी पाठ्यक्रमों में वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग ले रहे हैं। 98% रिकॉर्ड प्लेसमेंट और ₹13 लाख तक का इंटरनेशनल पैकेज इस संस्थान ने प्लेसमेंट के मामले में देश के बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ दिया है। अब तक यहाँ से 3000 से अधिक युवाओं को इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन मिल चुका है, जबकि औसत सफलता दर 98 प्रतिशत रही है। संस्थान के 1163 से अधिक छात्र प्लेसमेंट पा चुके हैं, जिनमें से 35 युवा हंगरी, जापान और दुबई जैसे देशों में भारत का नाम चमका रहे हैं। जहां भारत में विद्यार्थियों को अधिकतम 12 लाख रुपए तक का पैकेज मिला है, वहीं हंगरी में प्लेसमेंट पाने वाले युवाओं को 13 लाख रुपए तक का अंतर्राष्ट्रीय पैकेज हासिल हुआ है। ₹4 करोड़ का 'वराहमिहिर हॉल' और भविष्य के विस्तार का रोडमैप संस्थान की क्षमता और गतिविधियों को नया विस्तार देने के लिए कैंपस में करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से एक बहुउद्देशीय 'वराहमिहिर हॉल' का लोकार्पण और नामकरण किया गया है। यह आधुनिक हॉल शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बड़े संस्थागत आयोजनों का मुख्य केंद्र बनेगा। इसके अलावा, ग्लोबल स्किल्स पार्क के ठीक सामने स्थित 2.5 एकड़ की अतिरिक्त प्राइम लैंड का उपयोग इस संस्थान के आगामी विस्तार के लिए किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में और अधिक युवाओं को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग मिल सकेगी। नेशनल रैंकिंग में मप्र की देश में चौथी रैंक और बेटियों को 25% छूट कौशल विकास के मामले में मध्य प्रदेश आज देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो चुका है। वर्तमान में राज्य में कुल 940 आईटीआई (ITI) संचालित हैं, जिनमें 280 सरकारी और 644 निजी संस्थान हैं। राष्ट्रीय स्तर की आईटीआई ग्रेडिंग में मध्य प्रदेश ने देश भर में चौथा स्थान हासिल किया है। साल 2025 में सरकारी आईटीआई की सीटों पर रिकॉर्ड 94.55% एडमिशन हुए, जिसमें बेटियों के प्रवेश में 3.51% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई। सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए आईटीआई फीस में 25% की बड़ी छूट दी है, जबकि अनाथ और बाल देखरेख संस्थानों से आने वाले युवाओं की फीस को 'डेफर' (आगे बढ़ाने) की संवेदनशील व्यवस्था की है। पीएम मोदी से सम्मान और चीन का टिकट मध्य प्रदेश के हुनर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। साल 2025 में प्रदेश के 10 युवाओं ने देश भर में 'ट्रेड टॉपर' बनने का गौरव हासिल किया। इनमें मध्य प्रदेश की बेटी तृषा तावड़े ने इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में पूरे सेंट्रल जोन में पहला स्थान पाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मान-पत्र हासिल किया। यही नहीं, 'इंडियास्किल्स' प्रतियोगिता में राज्य के 26 युवाओं ने प्रतिनिधित्व करते हुए 1 गोल्ड, 2 ब्रॉन्ज और 5 मेडल जीते। अब प्रदेश के अजय अहिरवार चीन में होने वाली प्रतिष्ठित 'वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन' में ब्रिकलेइंग कौशल में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं।

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