दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी को मौत की सजा:पत्नी-बेटी को जिंदा जलाया, खुद को मरा साबित करने मानसिक रोगी का गला घोंटा

Apr 29, 2026 - 15:09
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दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी को मौत की सजा:पत्नी-बेटी को जिंदा जलाया, खुद को मरा साबित करने मानसिक रोगी का गला घोंटा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में दुर्ग कोर्ट ने 6 साल बाद आरोपी रवि शर्मा को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला 2020 का है, जिसमें आरोपी ने अपनी पत्नी और डेढ़ साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी थी। उस पर किसी को शक न हो इसके लिए उसने एक अज्ञात व्यक्ति को भी मार दिया, ताकि वो खुद को मरा हुआ साबित कर सके। जांच में पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी और बच्चे राउरकेला में रहते हैं। भिलाई में उसने मंजू से दूसरी शादी कर ली थी। मंजू ने डेढ़ महीने पहले बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन रवि इस बच्चे को नहीं चाहता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था। आखिरकार तंग आकर उसने मंजू को मारने की योजना बना ली। पुलिस ने सीसीटीवी और अन्य सबूतों के आधार पर पता लगा लिया था कि तीनों मर्डर के पीछे रवि शर्मा का ही हाथ था। जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल्स, इस्तेमाल किए गए सामान और दवाइयों की जांच, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान जैसे अहम सबूत सामने आए। इन सभी सबूतों के आधार पर दुर्ग कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने आरोपी को हत्याकांड के लिए मौत की सजा सुनाई। इस मामले में दुर्ग न्यायालय में शासकीय वकील भावेश कटरे ने पैरवी की। भिलाई नगर थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश कुमार ध्रुव ने जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया था। वर्तमान में वे डीएसपी के पद पर EOW/ACB में कार्यरत हैं। उनके द्वारा जांच किए गए अन्य मामलों में भी आरोपियों को मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। क्या था पूरा मामला घटना 21 जनवरी 2020 की सुबह की है। भिलाई के तालपुरी स्थित पारिजात कॉलोनी में रहने वाली मंजू शर्मा के मोबाइल से सुबह करीब 5:35 बजे उसकी मां कला सूर्यवंशी को फोन आया। फोन पर किसी ने कहा कि तुम्हारी बेटी और दामाद घर में जल रहे हैं, बचा सको तो बचा लो। इसके बाद फोन कट गया। परिवार के लोग जब मौके पर पहुंचे तो घर बाहर से बंद था, लेकिन अंदर से धुआं निकल रहा था। दरवाजा तोड़कर अंदर गए तो नजारा देखकर सब दंग रह गए। कमरे में मंजू शर्मा की अधजली लाश बिस्तर पर पड़ी थी। उसके हाथ-पैर और मुंह टेप से बंधे हुए थे। पास में डेढ़ माह की बच्ची भी मृत अवस्था में मिली। वहीं बिस्तर के नीचे एक और युवक का शव पड़ा था, जिसका चेहरा भी टेप से ढंका हुआ था और शरीर का हिस्सा जला हुआ था। पहले ऐसा लगा कि तीसरा शव रवि शर्मा का है, लेकिन जांच में पता चला कि वह कोई अज्ञात व्यक्ति है। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला कुछ और है। जांच में सामने आई साजिश घटनास्थल पर बेडरूम के दरवाजे पर चाक से लिखा मिला कि मंजू बेवफा थी, इसलिए मजबूरी में उसे, उसके पति और बच्चे को मारना पड़ा। नीचे संजय देवांगन आर्मी लिखा था। यह लिखावट भी पुलिस को भटकाने के लिए थी। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि घटना से एक दिन पहले रवि एक अज्ञात युवक को स्कूटी से अपने घर लेकर आया था। वहीं घटना के बाद तड़के वह अकेले स्कूटी से निकलते दिखा। इससे साफ हो गया कि आरोपी रवि ही है। राउरकेला से पकड़ा गया आरोपी मोबाइल कॉल ट्रेस करने पर पता चला कि मंजू की मां को फोन रायपुर रेलवे स्टेशन से किया गया था। पुलिस को शक था कि आरोपी भागकर ओडिशा के राउरकेला जा सकता है, जहां उसकी पहली पत्नी और बच्चे रहते थे। सूचना के आधार पर रेलवे पुलिस ने उसे राउरकेला स्टेशन पर पकड़ लिया। पूछताछ में कबूला जुर्म भिलाई लाकर जब पुलिस ने पूछताछ की तो रवि ने पूरा सच उगल दिया। उसने बताया कि वह पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी और बच्चे राउरकेला में रहते थे। भिलाई में उसने मंजू से दूसरी शादी कर ली थी। मंजू ने डेढ़ महीने पहले बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन रवि यह बच्चा नहीं चाहता था। इसी बात को लेकर दोनों में अक्सर झगड़े होते थे। परेशान होकर उसने मंजू को मारने की योजना बनाई। ऐसे रची खौफनाक योजना रवि ने पहले से ही प्लान बना लिया था कि वह अपनी पत्नी और बच्ची को मार देगा और खुद को मृत साबित करेगा। इसके लिए उसे अपने जैसे कद-काठी के व्यक्ति की जरूरत थी। वह एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को शराब का लालच देकर घर ले आया। उसने शराब में नींद की गोलियां मिलाकर युवक को पिला दी। जब वह बेहोश हो गया तो हथौड़े से वार कर उसकी हत्या कर दी और टेप से मुंह-हाथ बांध दिए। इसके बाद उसने मंजू को भी नींद की दवा देकर सुला दिया और उसे भी गला घोंटकर मार डाला। आखिर में उसने अपनी मासूम बच्ची को भी नहीं छोड़ा और उसकी भी हत्या कर दी। गैस ब्लास्ट का बनाया प्लान हत्या के बाद उसने सबूत मिटाने के लिए युवक के शव को जलाने की कोशिश की। साथ ही गैस सिलेंडर को इस तरह सेट किया कि आग लगने पर ब्लास्ट हो जाए और सब कुछ जलकर खत्म हो जाए। लेकिन गैस सही तरीके से नहीं फैल पाई और पूरा प्लान फेल हो गया। पुलिस के मजबूत सबूत बने आधार पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हथौड़ा, टेप, मोबाइल, स्कूटी और दवाइयों के रैपर जब्त किए। साथ ही हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच में यह भी साबित हो गया कि दीवार पर लिखी बात आरोपी ने ही लिखी थी। इस पूरे मामले में शासकीय वकील भावेश कटरे ने पैरवी की। वहीं तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश कुमार ध्रुव ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। कोर्ट ने सभी पहलुओं को देखते हुए इसे दुर्लभतम मामलों में शामिल माना और आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।

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