दो पीढ़ी गुजरी नहीं मिला मुआवजा:48 साल में नहीं मिल सका मुआवजा तो किसान ने नहर पाटकर शुरू की खेती

Mar 19, 2026 - 09:02
 0  0
दो पीढ़ी गुजरी नहीं मिला मुआवजा:48 साल में नहीं मिल सका मुआवजा तो किसान ने नहर पाटकर शुरू की खेती
सक्ती जिले के हसौद क्षेत्र से सामने आया मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को बयां करता है, बल्कि एक किसान के धैर्य के टूटने की निराशा की कहानी है। करीब 48 साल तक मुआवजे के लिए भटकने के बाद आखिरकार किसान कृष्णा कश्यप ने वह कदम उठाया है, जिसका असर पूरे क्षेत्र के किसानों पर पड़ने वाला है। 1979-80 में बिर्रा से घिवरा तक माइनर नहर का निर्माण किया गया। इस नहर का एक हिस्सा ग्राम घिवरा निवासी कृष्णा कश्यप के पुश्तैनी खेत, खसरा-1846 (0.33 एकड़) के बीचों-बीच से गुजरा। उस समय नहर निर्माण के बदले दादा ननकीराम कश्यप के नाम पर मुआवजा तय किया गया। किसी कारणवश यह राशि उन्हें कभी नहीं मिली। समय बीतता गया, पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन मुआवजे की फाइल वहीं अटकी रही। दादा के निधन के बाद पिता कुंजराम कश्यप ने कई बार विभाग को आवेदन देकर अपनी मांग रखी, मगर हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। 2015-16 में जब उम्मीद की सभी राहें बंद हो गईं, तब परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 2019-20 में मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन किया गया और नई दर से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच 2021 में कोरोना काल के दौरान कुंजराम कश्यप का निधन हो गया। इसके बाद कृष्णा कश्यप ने सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए नामांतरण कराया, ताकि मुआवजा मिल सके। विभाग ने भी कहा कि सभी वारिसों के नाम दर्ज होने के बाद भुगतान कर दिया जाएगा। 2022 में नामांतरण के मामले में तहसील में कार्रवाई शुरू हुई। सीधी बात - राम देवांगन एसडीओ, सिंचाई विभाग जैजैपुर दो-तीन दिन में कोई रास्ता सामने आ जाएगा आपके क्षेत्र में किसान द्वारा नहर पाटने का मामला सामने आया है, क्या जानकारी है आपको? - हां, यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। एक किसान ने मुआवजा नहीं मिलने के कारण नहर को समतल कर दिया है। क्या इस मामले में प्रशासन को पहले से जानकारी थी? - जी, हमने इस संबंध में क्लर्क और SDM मैडम को सूचित कर दिया है। प्रशासन स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। क्या किसान की तरफ से कोई कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है? - हां, इस मामले में कोर्ट केस भी चल रहा है। उसी के तहत आगे की कार्रवाई हो रही है। यह विवाद कब से चल रहा है? - 20-25 दिनों से यह मामला हमारे संज्ञान में आया है और तभी से इस पर काम किया जा रहा। इस समस्या का समाधान कब तक होने की उम्मीद है? - प्रशासन इस पर तेजी से काम कर रहा है। उम्मीद है कि अगले 2-3 दिनों में मामला सुलझा लिया जाएगा। नहर पटने से 500 एकड़ में खेती प्रभावित होगी कृष्णा कश्यप के नहर पाटने का असर अब पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है। जिस नहर के जरिए धिवरा, किकिरदा, करही, झरप, नगारीडीह और मल्दा जैसे गांवों के करीब 500 एकड़ से अधिक खेतों की सिंचाई होती थी, वह अब बाधित हो गई है। नहर के दोनों ओर से बंद हो जाने के कारण आने वाले खरीफ सीजन में हजारों किसानों को सिंचाई संकट का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सीधा असर फसलों की उत्पादकता पर पड़ेगा और किसानों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। कृष्णा कश्यप का कहना है कि उन्होंने यह कदम मजबूरी में उठाया है। “मैंने विभाग से कई बार निवेदन किया, हर जरूरी दस्तावेज जमा किए, लेकिन 48 साल में भी मुआवजा नहीं मिला। अब मेरे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था,” वे कहते हैं। चिट्‌ठी लिखी-मुआवजा नहीं चाहिए: लगातार हो रही अनदेखी और वर्षों की प्रतीक्षा से थक चुके कृष्णा कश्यप ने अंततः एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया। उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि अब उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए। जिस राशि के लिए उनके दादा और पिता जीवनभर संघर्ष करते रहे, वह उन्हें भी नहीं चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी जमीन वापस लेने का फैसला किया और नहर को समतल कर खेती शुरू कर दी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0