खरीदी केंद्रों पर बफर लिमिट से ज्यादा धान:गरियाबंद में मिलर्स की कम रुचि; खरीदी केंद्रों में लिमिट से 4-8 गुना ज्यादा धान मौजूद

Feb 18, 2026 - 14:34
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खरीदी केंद्रों पर बफर लिमिट से ज्यादा धान:गरियाबंद में मिलर्स की कम रुचि; खरीदी केंद्रों में लिमिट से 4-8 गुना ज्यादा धान मौजूद
गरियाबंद जिले के धान खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना अधिक धान जमा हो गया है। नियमों के अनुसार बफर लिमिट से अधिक धान का उठाव 72 घंटे के भीतर होना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों में यह स्थिति महीनों से बनी हुई है। इससे समितियों को धान के रखरखाव और सूखत (वजन घटने) को लेकर चिंता सताने लगी है। जिले के कई खरीदी केंद्रों में निर्धारित बफर लिमिट से 4 से 8 गुना ज्यादा धान मौजूद है। यह खरीद नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। लंबे समय तक धान खुले में रहने से उसकी गुणवत्ता खराब होने और नुकसान की आशंका बढ़ गई है। धान उठाव की गति धीमी होने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि मिलर्स उठाव में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका एक कारण दो साल पहले की बैंक गारंटी का अब तक वापस नहीं होना बताया जा रहा है। इसके अलावा शाम के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक से परिवहन भी प्रभावित हुआ है। इस साल 50.65 लाख क्विंटल खरीद, उठाव सिर्फ 56 प्रतिशत इस साल जिले में समर्थन मूल्य पर कुल 50 लाख 65 हजार 726 क्विंटल धान की खरीद हुई है। अब तक केवल 28 लाख 25 हजार 888 क्विंटल धान का परिवहन हो पाया है। यह कुल खरीद का 56.45 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत कम बताया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश के 33 जिलों में गरियाबंद उठाव के मामले में 15वें स्थान पर है। समितियों को सूखत और नुकसान का डर उठाव में देरी से समितियों की चिंता बढ़ गई है। ब्रांच स्तर से जिले को भेजे गए पत्राचार में समितियों ने कहा है कि बफर लिमिट से ज्यादा धान होने से रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है और सूखत का नुकसान भी बढ़ सकता है। वजन घटा तो खरीदी केंद्रों पर कार्रवाई का खतरा नियमों के अनुसार अगर खरीदी के बाद धान के वजन में कमी आती है तो जिम्मेदारी खरीदी केंद्रों की मानी जाती है। ऐसी स्थिति में कमीशन में कटौती हो सकती है और अंतर की राशि वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। देरी की पहली वजह: मिलर्स की रुचि कम जिले में कुल 57 राइस मिलें हैं, लेकिन इस बार केवल 45 मिलर्स के लिए डीओ जारी हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने में 21 लाख 17 हजार 650 क्विंटल धान का डीओ जारी हुआ, जबकि मिलर्स ने अब तक केवल 13 लाख 73 हजार 110 क्विंटल धान का उठाव किया है। बताया जा रहा है कि जिन मिलर्स को डीओ जारी हुआ है, उनके पास दो साल पुराना स्टॉक भी मौजूद है। एफसीआई में चावल रखने की जगह कम पड़ने के कारण भी दिक्कत आ रही है। साथ ही करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी भी फंसी हुई है। दूसरी वजह: सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद भारी वाहनों पर रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में 5 फरवरी से शाम ढलने के बाद भारी माल वाहकों की आवाजाही नेशनल हाईवे पर बंद कर दी गई है। प्रतिबंध से पहले रोजाना करीब 150 ट्रक संग्रहण केंद्र कुंडेल पहुंचते थे, अब यह संख्या आधी रह गई है। हालांकि प्रतिबंध के दायरे में 90 में से केवल 31 खरीदी केंद्र आते हैं, फिर भी परिवहन कर्ताओं की लापरवाही से अन्य जगहों पर भी उठाव प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 16 लाख 98 हजार 840 क्विंटल का टीओ जारी हुआ, जबकि ट्रांसपोर्टर केवल 13 लाख 74 हजार क्विंटल का उठाव कर पाया। दीवानमुड़ा में सबसे कम उठाव पिछले दो सालों से खरीदी में अनियमितता को लेकर चर्चित दीवानमुड़ा खरीदी केंद्र में सबसे कम उठाव होने से संदेह बढ़ गया है। उड़ीसा सीमा से लगे इस केंद्र में 1 लाख 3 हजार 519 क्विंटल की रिकॉर्ड खरीदी हुई। अब तक यहां से केवल 39 हजार 460 क्विंटल का परिवहन हुआ है। वर्तमान में 10 हजार 800 क्विंटल क्षमता वाले इस केंद्र में 64 हजार 5 हजार 920 क्विंटल धान शेष है। ओडिशा सीमा से लगे अधिकतर केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा धान मौजूद है। DMO किशोर चंद्र का बयान डीएमओ मार्कफेड किशोर चंद्र ने कहा कि सभी केंद्रों के लिए पर्याप्त टीओ और डीओ जारी किए गए हैं। सड़क में प्रतिबंध और मिलर्स की संख्या कम होने के कारण उठाव की गति प्रभावित हो रही है। जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे का बयान जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे ने कहा कि अधिकतम उठाव के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। पूरी क्षमता से परिवहन कराया जा रहा है। मिलर्स से भी अधिक उठाव कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन लगातार किया जा रहा है।

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