राजिम कल्प कुंभ 2026...संत समाज ने बहिष्कार का ऐलान किया:राजपत्र से नाम हटाने को बताया अपमान, सरकार से हस्तक्षेप की मांग

Feb 9, 2026 - 10:41
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राजिम कल्प कुंभ 2026...संत समाज ने बहिष्कार का ऐलान किया:राजपत्र से नाम हटाने को बताया अपमान, सरकार से हस्तक्षेप की मांग
राजिम कल्प कुंभ 2026 को लेकर रायपुर के साधु-संतों में नाराजगी है। संत समाज ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी राजपत्र (गजट) में रायपुर के कई प्रमुख महंतों और संतों के नाम हटा दिए गए हैं। संतों ने इसे अपने समाज की उपेक्षा और अपमान बताया है। रायपुर स्थित श्री सुरेश्वर महादेव पीठ में आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने कहा कि राजपत्र में जारी सूची से रायपुर के प्राचीन मठों से जुड़े कई संतों के नाम गायब हैं। इनमें महंत देवदास जी महाराज, महंत वेद प्रकाश, गोंडवाना समाज के संत निराहारी महाराज और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या मां सहित अन्य संतों के नाम शामिल बताए गए हैं। ‘नाम काटकर संत समाज को अपमानित किया जा रहा’ संतों ने आरोप लगाया कि राजपत्र में बार-बार नामों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उनका कहना है कि पहले भी सूची में सीमित नाम होने की जानकारी मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। संत समाज ने इसे जानबूझकर किया गया अपमान बताया। संतों ने स्पष्ट किया कि जब तक नाम काटने-जोड़ने वाले व्यक्ति या अधिकारी को सामने लाकर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक रायपुर के संत राजिम कल्प कुंभ में शामिल नहीं होंगे। संतों ने ऐसे व्यक्ति को ‘कालनेमि’ बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों के व्यवहार पर भी उठाए सवाल संतों ने मेला प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी के व्यवहार पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि बातचीत के दौरान संतों के साथ सम्मानजनक भाषा और आचरण नहीं अपनाया गया। संतों ने कहा कि पिछले साल भी इसी तरह की स्थिति बनी थी, इसके बावजूद उन्होंने आयोजन में सहयोग किया था। संत समाज ने जताया विरोध, सरकार से हस्तक्षेप की मांग संत समाज ने कहा कि राजिम कल्प कुंभ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश-दुनिया में पहचान बनाने वाला आयोजन है, लेकिन कुछ लोगों की वजह से संत समाज में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि संत समाज का सम्मान बना रहे। प्रेस वार्ता में संत महासभा से जुड़े पदाधिकारी, आचार्य और बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।

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