पहली बार CM बिलासपुर में ध्वजारोहण करेंगे..कांग्रेस ने ली चुटकी:बैज बोले- भाजपा में बिलासपुर में सबसे ज्यादा गुटबाजी, बैलेंसिंग करने बना प्रोग्राम
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार में पहली बार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 26 जनवरी को बिलासपुर में ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे। उनके इस प्रोग्राम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। माना जा रहा है कि भाजपा की गुटबाजी और बड़े नेताओं के बीच चल टकराव को डैमेज कंट्रोल करने के लिए सीएम बिलासपुर में झंडा फहराएंगे। वहीं, कांग्रेस ने इस पर चुटकी लेते हुए इसे भाजपा की गुटबाजी बताया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार से संभल नहीं रहा है। भाजपा में बिलासपुर में सबसे ज्यादा गुटबाजी है। सीनियर नेता अमर अग्रवाल को मंत्री नहीं बनाए। साथ ही उन्हें बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री ने गुटबाजी को बैलेंसिंग करने के लिए बिलासपुर चुना है। लेकिन, इससे कोई सुधार नहीं होने वाला है। बिलासपुर में ध्वजारोहण करने वाले भाजपा सरकार के पहले सीएम भाजपा के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार से शुरू हुई परंपरा और इसके निर्वहन पर नजर डालें तो गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री जगदलपुर में परेड की सलामी लेते रहे हैं। राजधानी रायपुर में राज्यपाल मुख्य अतिथि होते हैं। यह पहला अवसर होगा जब भाजपा सरकार के रहते बतौर सीएम जगदलपुर के बजाय मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेने बिलासपुर का रुख किया है। हालांकि, सीएम साय प्रदेश के दूसरे सीएम होंगे जो बिलासपुर के पुलिस मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी साल 2001 से लेकर 2003 तक गणतंत्र दिवस पर बिलासपुर में ही राष्ट्रीय ध्वज फहराते रहे हैं। तीन सीनियर विधायकों को झंडा फहराने नहीं मिला मौका बिलासपुर जिले में पूर्व मंत्री, भाजपा के सीनियर नेता और विधायक अमर अग्रवाल, बिल्हा के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष रहे धरमलाल कौशिक के साथ ही तखतपुर के सीनियर विधायक धर्मजीत सिंह को इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर ध्वजारोहण करने का मौका नहीं मिला। इसे लेकर भाजपा की राजनीति सरगर्म हो गई है। कहा जा रहा है कि अंतर्कलह और गुटबाजी के चलते इन नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। PCC चीफ बोले- भाजपा में बिलासपुर में सबसे ज्यादा गुटबाजी गणतंत्र दिवस के मौके पर बिलासपुर में सीएम साय के कार्यक्रम को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज ने चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार से संभल नहीं रहा है। बिलासपुर भाजपा में सबसे ज्यादा गुटबाजी है। बीजेपी के सीनियर नेता अमर अग्रवाल को मंत्री नहीं बनाया गया। वहीं, उन्हें कुर्सी तक नहीं मिलती। जब भूमि पूजन-उद्घाटन का कार्यक्रम होता है उसमें केंद्रीय मंत्री का नाम तक नहीं रहता है। कार्यक्रम को दिल्ली में ताकत लगाकर रद्द करा देते हैं। ये गुटबाजियों को बैलेंसिंग करने के लिए मुख्यमंत्री ने बिलासपुर को चुना है तो अच्छा है। मुख्यमंत्री के आने से यहां ठीक-ठाक हो। लेकिन, ऐसा दिख नहीं रहा है। संगठन के हस्तक्षेप करने का दावा सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष के दिग्गजों के बीच एक ही बात की चर्चा हो रही है कि आखिर गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री को बिलासपुर आने की जरूरत क्यों पड़ गई। सीएम साय के कार्यक्रम को सरकार का निर्णय नहीं। बल्कि, संगठन के सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने का दावा किया जा रहा है। संगठन के हस्तक्षेप के पीछे का कारण भी पुख्ता है। क्योंकि कुछ दिनों पहले बिलासपुर में जो सियासी घटनाएं हुई और इससे भाजपा जैसे अनुशासित पार्टी की जमकर किरकिरी हुई। इसकी चर्चा बिलासपुर ही नहीं रायपुर और दिल्ली तक पहुंच गई। यही वजह है कि बिलासपुर के नेताओं को संगठित करने के लिए सीएम का कार्यक्रम तय किया गया है। युवा महोत्सव में सीएम के सामने भड़के अमर पिछले दिनों युवा महोत्सव के आयोजन में बहतराई स्थित खेल परिसर में अतिथियों के लिए की गई बैठक व्यवस्था में पूर्व मंत्री व भाजपा के सीनियर नेता अमर अग्रवाल के लिए पीछे की कतार में कुर्सी आरक्षित की गई थी। इसे लेकर कार्यक्रम स्थल में ही जमकर विवाद हुआ था। सामने बुलाने पर अमर अग्रवाल कलेक्टर पर भड़क गए थे। तब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। बीते दो साल के दौरान में जिले में जिस तरह की घटनाएं सत्ताधारी दल में घट रही है, इसके पहले कभी नहीं हुआ। नगरीय प्रशासन विभाग की सकरी की सभा रद्द करनी पड़ी नगर निगम क्षेत्र और तखतपुर विधानसभा के सकरी में आयोजित लोकार्पण व शिलान्यास समारोह की तैयारी पूरी हो गई थी। आमंत्रण पत्र बंट गया था। सभा की शुरुआत होने वाली थी कि अचानक दिल्ली से फोन आया और कार्यक्रम को रद कर दिया गया। नगरीय प्रशासन विभाग के इस कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधायक अमर अग्रवाल का नाम नहीं था। जिसके चलते कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया गया। ये अलग बात है कि जिला प्रशासन ने अपरिहार्य कारण और छूटे हुए विकास कार्यों को शामिल करने के लिए कार्यक्रम स्थगित करने की सूचना दी गई।
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