छत्तीसगढ़ की राजनीति पर ज्योतिषीय नजर:विष्णुदेव होंगे मजबूत, भूपेश बघेल का बढ़ेगा प्रभाव, नए चेहरों का बढ़ेगा कद, महिला नेतृत्व और आंदोलनों के संकेत
साल 2026 छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। ज्योतिषाचार्य आचार्य उदय के अनुसार आने वाला साल सत्ता, संगठन और सड़कों-तीनों स्तरों पर हलचल लेकर आएगा। ग्रहों की चाल यह संकेत दे रही है कि वर्ष की शुरुआत में राजनीतिक और प्रशासनिक अव्यवस्था बनी रहेगी। जुलाई के बाद वही हालात धीरे-धीरे संतुलन और लाभ की ओर बढ़ते नजर आएंगे। यानी 2026 संघर्ष से शुरू होकर स्थिरता पर खत्म हो सकता है। आचार्य उदय बताते हैं कि राज्य की कुंडली में राहु की स्थिति के कारण अप्रैल तक तनावपूर्ण माहौल रहेगा। आचार्य उदय के अनुसार सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ सकता है और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। विशेष रूप से 13 मई से 30 जून के बीच किसी बड़े आंदोलन या जनआक्रोश की संभावना जताई गई है। हालांकि, गुरु के केंद्र में होने से साल को अंततः लाभदायक बताया गया है, लेकिन सप्तम भाव में शनि यह संकेत देता है कि सत्ता को यह लाभ कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद ही मिलेगा। आने वाला साल छत्तीसगढ़ के प्रमुख राजनीतिक चेहरों के लिए अहम रहने वाला है। आचार्य उदय के अनुसार भूपेश बघेल का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल दिखाई दे रहा है, जबकि टीएस सिंहदेव अपनी सरल और संतुलित कार्यशैली के साथ सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। मोहन मरकाम के राजनीतिक कद में बढ़ोतरी के संकेत हैं। विकास उपाध्याय को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है। ओपी चौधरी को सरकार में विशेष और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सत्ता और निर्णय क्षमता में और मजबूती आ सकती है। इसके साथ ही राज्य में नक्सलवाद के समाप्त होने की पूरी संभावना है। अप्रैल से जून के बीच नक्सल समस्या के पूरी तरह खत्म होने के संकेत मिल रहे हैं। नए नेताओं के उभार के संकेत, राजनीति सिर्फ पुराने चेहरों तक सीमित नहीं 2026 की राजनीति में सबसे अहम बदलाव नए नेतृत्व का उभार हो सकता है। आचार्य उदय के मुताबिक इस साल ऐसे नए राजनीतिक चेहरे सामने आ सकते हैं, जो छत्तीसगढ़ की जनता के लिए सकारात्मक और जमीनी स्तर पर काम करेंगे। लंबे समय से सक्रिय पुराने चेहरों की वापसी के मजबूत योग नहीं दिखते। जनता का झुकाव उन नेताओं की ओर रहेगा, जो काम और परिणाम के साथ राजनीति करेंगे, न कि सिर्फ पहचान के भरोसे। महिला नेतृत्व बनेगा राजनीति का मजबूत स्तंभ इस साल छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला नेताओं की भूमिका खास तौर पर प्रभावशाली रहने वाली है। आचार्य उदय के अनुसार महिला नेतृत्व न केवल चर्चा में रहेगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उसकी अहम भागीदारी होगी। देवकर साहब जैसे चेहरे चर्चा में रहेंगे, वहीं लक्ष्मी रजवाड़े सहित 2 महिला मेयर अपने काम से अलग पहचान बना सकती हैं। स्थानीय स्तर से लेकर राज्य राजनीति तक महिला शक्ति का असर साफ नजर आने की संभावना है। तीसरे मोर्चे के लिए मुश्किल साल जहां नए चेहरों के उभार की बात है, वहीं तीसरे मोर्चे के लिए 2026 अनुकूल नहीं दिखता। आचार्य उदय की भविष्यवाणी के अनुसार तीसरे मोर्चे का कोई खास प्रभाव नजर नहीं आएगा। राज्य की राजनीति मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमती रहेगी और जनता का भरोसा भी इन्हीं 2 दलों के बीच बंटा रहेगा। भाजपा और कांग्रेस, दोनों में अंदरूनी खींचतान 2026 में छत्तीसगढ़ की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस को अंदरूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आचार्य उदय बताते हैं कि दोनों दलों में आंतरिक कलह उभर सकती है, जिसका असर संगठन और रणनीति पर दिखेगा। हालांकि, ग्रहों की स्थिति भाजपा के पक्ष में ज्यादा अनुकूल मानी जा रही है। इस साल धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दे राजनीति में अधिक उभरकर सामने आ सकते हैं, जो भाजपा को अतिरिक्त बढ़त दिला सकते हैं। आदिवासी राजनीति का बढ़ता प्रभाव आचार्य उदय के अनुसार 2026 में आदिवासी नेतृत्व की राजनीतिक ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। शनि की स्थिति यह संकेत देती है कि सरकार की योजनाएं, विकास कार्य और नीतिगत फैसले आदिवासी क्षेत्रों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इसका सीधा असर आदिवासी समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रभाव पर पड़ेगा। आने वाला साल आदिवासी राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। दिल्ली से बढ़ेगा दखल, गृहमंत्री की भूमिका अहम राज्य की राजनीति पर राष्ट्रीय स्तर का असर भी साफ दिखाई देगा। आचार्य उदय के अनुसार केंद्र की राजनीति में गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका और अधिक मजबूत हो सकती है। इसका असर छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर भी दिख सकता है। सत्ता के कई अहम निर्णय दिल्ली से तय होने की संभावना जताई गई है। नक्सलवाद 2026 में खत्म होने के संकेत आचार्य उदय की भविष्यवाणी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा नक्सलवाद को लेकर है। उनके अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच नक्सल समस्या के पूरी तरह समाप्त होने की प्रबल संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में सुरक्षा और विकास के लिहाज से एक बड़ा मोड़ साबित होगा। क्षेत्रवाद की राजनीति का ढलता सूरज 2026 क्षेत्रीय राजनीति के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा है। आचार्य उदय के अनुसार क्षेत्रवाद की राजनीति धीरे-धीरे खत्म होती जाएगी और जनता का झुकाव विकास और स्थिर शासन की ओर होगा। इस बीच अजय चंद्राकर जैसे नेताओं का प्रभाव बढ़ सकता है, लेकिन समग्र रूप से क्षेत्रीय राजनीति का असर कमजोर पड़ता नजर आएगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए परीक्षा का साल कुल मिलाकर साल 2026 छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए परीक्षा का साल होगा। वर्ष की शुरुआत संघर्ष, असंतोष और आंदोलन से हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेगा, हालात संतुलन, समन्वय और राजनीतिक लाभ की ओर बढ़ते नजर आएंगे। नए नेतृत्व का उभार, महिला नेताओं की मजबूती और आदिवासी राजनीति का बढ़ता असर, ये सभी मिलकर 2026 को छत्तीसगढ़ की राजनीति का यादगार साल बना सकते हैं। ................................ नए साल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... नया साल टर्निंग प्वॉइंट...नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़: 15000 नौकरियां मिलेंगी, पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा लागू, मेट्रो-महादेव घाट कॉरिडोर पर फोकस, ट्रेनों की बदलेगी टाइमिंग साल 2026 छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ कैलेंडर का नया पन्ना नहीं, बल्कि प्रशासनिक, सुरक्षा और शहरी ढांचे में बड़े बदलावों का साल बनने जा रहा है। नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अब आखिरी पड़ाव में है। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक राज्य नक्सल मुक्त होगा। पढ़ें पूरी खबर
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