भोपाल में 2 डॉक्टरों की पूरे महीने की सैलरी कटी:500 KM दूर से एक ने लगाई हाजिरी, दूसरे की अटेंडेंस में अलग-अलग चेहरे आए नजर
भोपाल में मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ चिकित्सकों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की गई फर्जी अटेंडेंस का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि एक डॉक्टर ने अपने कार्य स्थल से करीब 500 किलोमीटर दूर रहते हुए ऐप पर हाजिरी लगा दी। जबकि दूसरे मामले में एक ही डॉक्टर की अटेंडेंस में अलग-अलग चेहरों की तस्वीरें दर्ज मिलीं। यह गड़बड़ी सीएमएचओ कार्यालय की नियमित समीक्षा के दौरान पकड़ में आई। मामला सामने आते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों डॉक्टरों का एक माह का वेतन काटने के आदेश बुधवार को जारी कर दिया है। सार्थक ऐप की निगरानी से सामने आया मामला
पिछले कुछ समय से भोपाल सीएमएचओ कार्यालय ‘सार्थक ऐप’ पर दर्ज की जा रही उपस्थिति की नियमित निगरानी कर रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत जब हालिया उपस्थिति डेटा का विश्लेषण किया गया, तो कुछ एंट्री असामान्य पाई गईं। ऐप में दर्ज लोकेशन और फोटो वेरिफिकेशन ने स्पष्ट संकेत दिए कि संबंधित चिकित्सक वास्तविक कार्य स्थल पर मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही थी। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है। एक ही डॉक्टर, अलग-अलग चेहरे
पहला मामला मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, बाग मुगलिया से जुड़ा है। यहां पदस्थ चिकित्सक डॉ. मिनहाज की उपस्थिति जांच के दौरान और भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सार्थक ऐप पर दर्ज उनकी हाजिरी में अलग-अलग लोगों के चेहरे दिखाई दिए। इससे संदेह गहराया कि या तो किसी अन्य व्यक्ति से उपस्थिति दर्ज करवाई गई या फिर तकनीकी सिस्टम से छेड़छाड़ की गई। अधिकारियों के मुताबिक यह मामला सिर्फ गैरहाजिरी का नहीं, बल्कि डिजिटल प्रक्रिया के दुरुपयोग का भी संकेत देता है। 500 किलोमीटर दूर से लगी हाजिरी
दूसरा मामला मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, गौतम नगर में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव सिंह से जुड़ा है। उन्होंने अपने कार्यस्थल से लगभग 500 किलोमीटर दूर रहते हुए ‘सार्थक ऐप’ पर उपस्थिति दर्ज करा दी। इतना ही नहीं, रोजमर्रा की उपस्थिति भी लगभग 11 किलोमीटर दूर की लोकेशन से लगाई जा रही थी। इससे साफ है कि चिकित्सक नियमित रूप से अपने निर्धारित क्लिनिक में उपस्थित नहीं थे, जबकि कागजों में वे ड्यूटी पर मौजूद दिखाए जा रहे थे। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा नियम विरुद्ध उपस्थिति केवल कागजी अनियमितता नहीं है। इसका सीधा असर मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को सुलभ, सस्ती और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे मरीजों की जांच, इलाज और परामर्श प्रभावित होना स्वाभाविक है। पूरे महीने की सैलरी काटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ भोपाल ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों चिकित्सकों का एक माह का वेतन काटने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई न केवल दंडात्मक है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश मानी जा रही है कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए उपस्थिति में हेर-फेर करना गंभीर अनुशासनहीनता और अवैधानिक कृत्य है। यह विभागीय दायित्वों के प्रतिकूल है और ऐसे मामलों पर सख्त रुख अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य व्यवस्था को मजबूत करना है, न कि उसका दुरुपयोग करना। नोटिस जारी, आगे और कार्रवाई के संकेत
दोनों चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्ट जवाब मांगा गया है। नोटिस में पूछा गया है कि किस आधार पर कार्यस्थल से इतनी दूर रहते हुए उपस्थिति दर्ज की गई और अलग-अलग चेहरों वाली हाजिरी कैसे संभव हुई। अधिकारियों के अनुसार यदि चिकित्सकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ और भी कठोर अनुशासनात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सीएमएचओ कार्यालय का कहना है कि आगे भी सार्थक ऐप की सख्त निगरानी जारी रहेगी। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग अब लापरवाही और मक्कारी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के मूड में है, ताकि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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