MBBS एडमिशन में फीस कम कराने के नाम पर ठगी:खंडवा में नीट क्वालिफाई छात्रा के परिजनों से 9 लाख की ठगी, काउंसलर फरार
खंडवा की एक नीट क्वालिफाई छात्रा को सरकारी कॉलेज में बीडीएस की सीट मिली थी। लेकिन जिद एमबीबीएस कोर्स की थी, जयपुर नेशनल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिल गई। लेकिन भारी-भरकम फीस में छूट के लिए पेरेंट्स ने एक काउंसलर से संपर्क किया। इस दौरान काउंसलर ने रजिस्ट्रेशन आदि के नाम पर 9 लाख रूपए ले लिए और उसे फर्जीवाड़े की भनक लगी तो वह रफूचक्कर हो गया। मामले में टीचर दंपती ने खंडवा पुलिस से शिकायत की हैं। पहले सायबर सेल में शिकायत की गई, जिसके बाद अब पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया हैं। थाना मोघट रोड़ पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर मामले को जांच में लिया हैं। शिकायत में छात्रा के परिजनों ने बताया कि, यूपी के नोएडा में रहने वाले एक शख्स ने एडमिशन के बाद फीस में छूट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की। एडमिशन के लिए जब उस व्यक्ति के साथ कॉलेज गए और वहां हमसे काउंसलर को लेकर पूछताछ की तो हमने काउंसलर का नाम बता दिया। काउंसलर को इस बारे में हमने जानकारी दी तो वो वहां से भाग निकाला। - टीचर मां ने बताई पूरी कहानी, पढ़िए सिलसिलेवार छात्रा की मां और केस की फरियादी टीचर ने बताया कि, उनकी बेटी ने अच्छे नंबरों से नीट क्वालिफाई किया था। नीट की तैयारी के लिए उसने बारहवीं के बाद एक साल ड्राप लिया था। कुल मिलाकर मकसद था कि एमबीबीएस में एडमिशन मिलें और कम फीस में काम हो जाए। एमएमसी की काउंसिलिंग के दौरान एक सरकारी कॉलेज में बीडीएस कोर्स में सीट मिली। लेकिन बेटी को एमबीबीएस करना था, इसलिए सीट छोड़ दी। इसके बाद राजस्थान के जयपुर नेशनल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिली। जहां कोर्स का पैकेज एक करोड़ 25 लाख रूपए था। एडमिशन प्रक्रिया के दौरान कोई गलती ना हो, इसलिए हर कोई काउंसलर हायर करता हैं। मेडिकल एडमिशन के लिए कांउसलर हायर करना आम बात है। हमारा संपर्क नोएडा के रहने वाले अंशु कुमार यादव से हुआ, उन्होंने खुद एनआईटीयन होना बताया। कहा कि उनकी प्राइवेट इन्फोटेक कंपनी है, जो भोपाल से रजिस्टर्ड है। उसने जयपुर नेशनल कॉलेज के संबंधित एक-दो काउंसलर के नाम लिए तो हमें भरोसा हो गया। एक रिश्तेदार से भी उनके सेंटर का विजिट कराया था। बात यह थी कि, जयपुर नेशनल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स का पैकेज एक करोड़ 25 लाख था। काउंसलर ने पैकेज को एक करोड़ 10 लाख रूपए कराना बताया। इसी दौरान सीट बुकिंग के लिए उसने दो लाख रुपए मांगे। हमने दो लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किया। फिर उसने 30 हजार रूपए काउंसलिंग फीस मांगी। वो भी हमने दे दी। इसके बाद 7 लाख रूपए नगद मांगे और कहा कि वह हाॅस्टल और काशनमनी भर देगा। फिर कहा कि 18 लाख रुपए आरटीजीएस करवा दो। बताया कि पूरा पेमेंट एक करोड़ 10 लाख रुपए में एडजस्ट हो जाएगा। हम लोग 10 लाख रुपए लेकर एडमिशन के लिए कॉलेज गए, साथ में कांउसलर भी था। वहां एडमिशन इंचार्ज ने पूछा कि आपका काउंसलर कौन है। हमने बताया कि हमारा काउंसलर अंशु कुमार यादव हैं, जो कि बाहर बैठे हैं। फिर हमने काउंसलर से जाकर कहा कि तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे, हमने नाम बता दिया है। यह सुनते ही वह भाग गया, हमें पता चला कि हमारे साथ फ्रॉड हुआ है लेकिन यह पता नहीं था कि वो अचानक भाग जाएगा। काउंसलर के पास यूपी पासिंग ब्लैक स्कार्पियों थी। खंडवा आकर मैंने सायबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। पता चला कि वह अकाउंट से पैसे निकाल चुका है। खाता अब फ्रीज करने से कोई मतलब नहीं है। फिर एडिशनल एसपी से मिले तो उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज करा दीजिए। लेकिन मोघट पुलिस ने शुरूआत में एफआईआर नहीं की। पुलिस टीम जयपुर भी गई, वहां से सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले, अब एसपी के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस सहयोग कर रही है। हम तो उस काउंसलर को भी 25 फीसदी पैसा देंगे। जो पैसा गया वो बड़ी बात नहीं है लेकिन बेटी और हमने जो मेंटल ट्रामा झेला है। हालांकि, पैसा अरेंज कर हमने कॉलेज की नॉर्मल फीस में एडमिशन करवा दिया है।
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