जयसिंह हत्याकांड- शादी के 13 दिन पहले मर्डर:बीमार मां गा रही गीत; बहन ने दिखाया दूल्हे का सूट; सोना-जमीन या चुनावी रंजिश ने ली जान

Nov 15, 2025 - 08:43
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जयसिंह हत्याकांड- शादी के 13 दिन पहले मर्डर:बीमार मां गा रही गीत; बहन ने दिखाया दूल्हे का सूट; सोना-जमीन या चुनावी रंजिश ने ली जान
मुरैना के मोहनपुरा गांव में 10 नवंबर को जय सिंह तोमर (25) नाम के युवक को डंडे से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया गया था। गंभीर हालत में उसे ग्वालियर ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया। 2 दिन बाद यानी 12 तारीख की रात उसकी मौत हो गई। हत्या का आरोप पूर्व सरपंच रामकरण सिंह तोमर और उसके परिवार पर है। जय सिंह की हत्या क्यों की गई। इसके पीछे अलग-अलग कहानी सामने आ रही हैं। कोई सोने की डीलिंग की बात कह रहा है, कोई चरनोई की जमीन का विवाद बता रहा है। कोई कोर्ट में चल रहे एक केस में समझौते की बात कह रहा है। दैनिक भास्कर की टीम पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए मोहनपुरा और गोपी गांव पहुंची। यहां सन्नाटा पसरा था। 22 नवंबर को जय की शादी होने वाली थी। बेटे की हत्या से अनजान बीमार मां ढोलक बजार मंगलगीत गा रही है। बहन अपने दूल्हे भाई का सूट दिखा रही है। टीम ने उनसे बात की। ग्रामीणों से विवाद को समझा। आरोपी सरपंच के घर पर भी पहुंचे। हालांकि पूर्व सरपंच के डर से ग्रामीणों का मुंह है। पढ़िए यह रिपोर्ट… जानिए ग्रामीण और परिवार वाले मर्डर की वजह क्या बता रहे...? चरनोई जमीन विवाद मामले में की थी शिकायत ग्राम मोहनपुरा, गोपी पंचायत के अंतर्गत आता है। गोपी गांव के रामकरण सिंह तोमर वर्ष 2005 में सरपंच थे। सरपंच रहने के दौरान उन्होंने जेसीबी से गांव की शासकीय चरनोई की 100 बीघा से भी अधिक जमीन समतल कर उस पर कब्जा कर लिया, जिस पर आज भी उनका कब्जा है। पंचायत के ही मोहनपुरा निवासी जय सिंह तोमर, लगातार अपनी पंचायत की चरनोई भूमि पर पूर्व सरपंच की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों और सीएम हेल्पलाइन पर कर रहे थे। जय तोमर द्वारा की जा रही शिकायतों से पूर्व सरपंच रामकरण नाराज थे और उनके बीच विवाद शुरू हो गया। पूर्व सरपंच लगातार जय पर शिकायत वापस लेने और रोकने का दबाव बना रहे थे। दैनिक भास्कर की टीम जब गोपी गांव की इस चरनोई जमीन पर पहुंची, तो उन्होंने पाया कि एक ही चक में फैली इस जमीन पर पूर्व सरपंच का कब्जा था। कोई भी ग्रामीण कैमरे के आगे बोलने से डर रहा था। कोर्ट से केस वापस लेने का बना रहे थे दबाव मोहनपुरा के जय तोमर ने पूर्व सरपंच के चरनोई भूमि पर किए गए कब्जे की शिकायत वापस नहीं ली। 19 मार्च 2024 को गोपी पंचायत के पूर्व सरपंच रामकरण सिंह तोमर, रामकृष्ण, पप्पू, सौरभ और अन्य परिजनों के साथ मोहनपुरा गांव स्थित जय के घर पहुंचे और मारपीट की। बचने के लिए जय अपने घर की छत पर भाग गया, लेकिन पूर्व सरपंच और उसके परिजन ने छत पर पहुंचकर जय को नीचे सड़क पर फेंक दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। उसका इलाज ग्वालियर ट्रॉमा सेंटर में चला। इस मामले में सिहोनिया पुलिस ने ग्वालियर ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर जय की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ 21 मार्च 2024 को मामला दर्ज किया था। यह मामला अंबाह न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें जय की जल्द ही गवाही होनी थी। इसलिए पूर्व सरपंच रामकरण इस मामले में जय पर राजीनामा का दबाव बनाकर केस वापस लेने के लिए कह रहा था। सरपंच का चुनाव लड़ने को लेकर हुआ था विवाद जय तोमर ने साल 2020 में सरपंच का चुनाव लड़ने का फैसला किया था। गोपी पंचायत से नामांकन दाखिल किया। चुनाव चिन्ह ताला-चाबी मिला। पूर्व सरपंच रामकरण को जय का चुनाव लड़ना पसंद नहीं आया। उन्होंने जय और उनके परिवार से चुनाव न लड़ने के लिए कहा, लेकिन जय ने इनकार कर दिया। जय ने कहा कि वह लोगों की सेवा करना चाहते हैं और रामकरण लोगों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत के ग्रामीण चाहते हैं कि वह चुनाव लड़ें। हालांकि, कोविड के कारण चुनाव रद्द हो गया। बाद में गोपी पंचायत की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। सोने की ईंट खरीदी मामले में फरार हो गया था युवक सोने की ईंट की खरीद-बिक्री मामले का भी विवाद सामने आया है। पूर्व सरपंच रामकरण सिंह तोमर ने किसी व्यक्ति से सोने की ईंट खरीदने के लिए मृतक जय तोमर के जरिए पैसे दिलवाए थे, लेकिन पैसे लेकर वह व्यक्ति फरार हो गया। अब पूर्व सरपंच जय से अपने पैसे मांग रहा था। सरपंच को लगा कि जय ने जानबूझकर उसे धोखा दिया है और पैसे हड़पे हैं। हालांकि, इस तरह के कोई सबूत नहीं मिले हैं। ग्रामीणों में भी इस तरह की कोई चर्चा नहीं थी। मौके पर अब भी चप्पल पड़ी, डिस्टेंपर फैला है भास्कर की टीम 30 किलोमीटर दूर मोहनपुरा गांव पहुंची। गांव से एक किलोमीटर पहले, टीम उस घटनास्थल पर गई जहां 10 नवंबर को बाजार से सोने के जेवर और घर की पुताई के लिए डिस्टेंपर लेने गए जय को रात में आरोपियों ने घेरकर लाठियों से पीटा था। मौके पर जय तोमर की चप्पल पड़ी थी। सड़क पर डिस्टेंपर फैला हुआ था। जैसे ही टीम गांव पहुंची तो चारों तरफ खामोशी छा गई। आगे बढ़ने पर गांव के अंतिम छोर पर मृतक जय तोमर का घर है। रिश्तेदार परिजन को सांत्वना दे रहे थे। घर के अंदर महिलाएं विलाप कर रही थीं। मां ढोलक बजा रही, बहनें कपड़े, लहंगे दिखा रहीं जय की मां को 2012 में पैरालिसिस हो गया था, जिससे वह बीमार रहती हैं। उन्हें नहीं पता कि जय की हत्या हो गई है। वह बार-बार अपने बेटे की शादी के लिए ढोलक लेकर बजाने बैठ जाती हैं। तेल-हल्दी भी पास में रख लेती हैं, क्योंकि उन्हें बेटे की शादी की रस्म निभानी है। इस दौरान वह बेटे की शादी के गीत भी गाने लगतीं। बड़ी और छोटी बहनें अपने भाई जय की दूल्हे वाली शेरवानी और नई नवेली दुल्हन के लिए खरीदे गए कपड़े, लहंगे दिखा रही हैं। वे रोते-रोते बेहोश हो रही हैं। ऐसा भावुक दृश्य देखकर किसी को भी रोना आ जाए। पिता बोले- 22 नवंबर को शादी थी, कार्ड बंट चुके थे जय के पिता भगवान सिंह का भी रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा- कोई और विवाद नहीं था। सिर्फ चरनोई भूमि पर कब्जे की शिकायत का मामला था। सरपंच ने पहले भी जय के साथ मारपीट की थी। उस मामले में राजीनामा करने का दबाव बना रहा था। भगवान सिंह ने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी शादी धौलपुर में हुई है। जय इकलौता बेटा था। बड़ी बेटी की शादी के बाद, 2012 से जय की मां को पैरालाइसिस का अटैक आया था, तब से वह मानसिक रूप से बीमार हैं। जय ही उनकी देखभाल करता था। 22 नवंबर को शादी थी। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। 20 नवंबर को गांव में पंगत का कार्यक्रम था। कार्ड भी बंट चुके थे। बस, बैंड, घोड़ी, हलवाई सभी बुक किए जा चुके थे। बहन बोली- सभी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए बड़ी बहन निशा का कहना है कि जय अपनी शादी को लेकर बहुत खुश था। कुछ दिन पहले ही वह मुझे ससुराल से लेकर आया था। निशा ने बताया कि जय सभी की मदद करता था, तो फिर उसे क्यों मार डाला गया। वह उनकी मम्मी की देखभाल करता था, अब कौन करेगा? मम्मी को गोद में उठाकर छत पर ले जाना, खाना खिलाना, बाल निकालना, कपड़े पहनाना, दवा देना, सभी काम जय ही करता था। निशा का कहना है कि सिर्फ सरकारी जमीन की शिकायत करना ही उसकी जान ले गया। सभी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। बहन ने भाई के लिए खरीदा गया सूट भी दिखाया। चचेरा भाई विशाल बोला- पुलिस मौके पर तुरंत नहीं पहुंची जय के चचेरे भाई विशाल तोमर ने बताया कि जय लगातार जमीन की शिकायत करता था, जिसके कारण पूर्व सरपंच से उसका विवाद था। विशाल ने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन पुलिस मौके पर तुरंत नहीं पहुंची, जबकि उन्हें लगातार सूचना दी जा रही थी। काफी देर बाद पुलिस पहुंची, लेकिन खेड़ियाहर अस्पताल से ही लौट गई। जबकि डॉक्टरों ने गंभीर हालत में जय को जिला अस्पताल रेफर किया था। विशाल का कहना है कि पुलिस को अपनी गाड़ी से या एम्बुलेंस से जय को मुरैना ले जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस वापस लौट गई और वे लोग प्राइवेट ऑटो से जय को मुरैना अस्पताल लेकर पहुंचे। ताऊ बोले- एसआई ने एसडीएम को भी गुमराह किया मृतक के ताऊ महाराज सिंह तोमर ने बताया कि वे पीडब्ल्यूडी में कर्मचारी हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद, वे तुरंत अंबाह एसडीएम के पास पहुंचे। एसडीएम ने सिहोनिया थाना प्रभारी को जल्द मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए, लेकिन सिहोनिया प्रभारी एसआई मनोज वर्डिया ने एसडीएम को गुमराह करते हुए बताया कि पार्टी पहुंच गई है। एक घंटे तक कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा, जिसके बाद वे फिर से एसडीएम के पास गए। इस बार एसडीएम ने कड़क लहजे में सिहोनिया थाना प्रभारी को बोला, तब जाकर पुलिस सक्रिय हुई। ग्रामीण बोले- यहां से चले जाएं, माहौल ठीक नहीं है दैनिक भास्कर की टीम जय तोमर के परिजन से मिलकर मोहनपुरा से दो किलोमीटर दूर गोपी गांव पूर्व सरपंच के घर पहुंची तो वहां कोई नहीं मिला। आगे बढ़ने पर एक ग्रामीण से विवादित जमीन पर चलने की बात कही तो उसने साफ कहा कि आप अगर अपनी सलामती चाहते हैं तो यहां से चले जाएं माहौल ठीक नहीं है। खुद अपनी रिस्क पर जाना चाहते हो तो सीधे चले जाएं, पता मैं बता देता हूं। ग्रामीण के बताए गए पते पर दैनिक भास्कर की टीम पहुंची। चरनोई की जमीन को समतल कर उस पर कई सालों से खेती की जा रही है। एक कांटेदार तार लगाकर रास्ता भी बंद किया हुआ था। जहां तक नजर जा रही थी, वही कब्जे वाली 100 बीघा से अधिक जमीन ही नजर आ रही थी। यहां से लौटकर ग्रामीणों से जब पूर्व सरपंच के घर परिवार के लोगों के बारे में पूछा तो दहशत के मारे वे कैमरे के सामने बोलने से बचते नजर आए । गोपी गांव के ग्रामीण बात करने का तैयार नहीं दैनिक भास्कर की टीम गोपी गांव पहुंची। ग्रामीणों से बातचीत करने की कोशिश की, तो पूर्व सरपंच और उनके परिजनों की दहशत के चलते कोई भी बात करने को राजी नहीं हुआ। मृतक जय के एक दोस्त, विशाल तोमर के अनुसार, पूर्व सरपंच रामकरण सिंह तोमर और मृतक जय के बीच असली दुश्मनी जय के द्वारा पंचायत चुनाव में सरपंच के लिए खड़े होने से हुई। पूर्व सरपंच ने जय से चुनाव लड़ने से मना किया था और कहा था कि वे पहले से यहां सरपंच रहे हैं और उनकी चलती है, इसलिए जय चुनाव न लड़े। लेकिन जय ने रामकरण की बात मानने से इनकार कर दिया था। विशाल ने बताया कि जय अक्सर गरीब, असहाय और कमजोर लोगों की मदद करता था। इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... पूर्व सरपंच ने युवक को घेरकर लाठियों से पीटा, मौत मुरैना जिले के सिहोनिया थाना क्षेत्र के मोहनपुरा गांव के रहने वाले जय सिंह तोमर (25) की ग्वालियर ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। 10 नवंबर को पूर्व सरपंच रामकरण सिंह तोमर और उसके परिजनों ने जय को लाठियों से बेरहमी से पीटा था। पढ़ें पूरी खबर...

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